गरियाबंद कलेक्टर उइके का रौद्र रूप स्कूली बच्चों के हक की आवाज उठाने का बड़ा असर हुआ है। हमारी खबर के बाद कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने 116 स्कूलों में शौचालय निर्माण में लापरवाही बरतने वाली फर्म के 93 कार्यादेश निरस्त कर वसूली के आदेश दिए हैं।
गरियाबंद जिले के 116 स्कूलों में शौचालय निर्माण के नाम पर चल रही लापरवाही को लेकर कल हमारे न्यूज़ पोर्टल द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी इस खबर का बड़ा असर हुआ है। खबर के जरिए प्रशासन के संज्ञान में लाए गए तथ्यों और जनता की आवाज के बाद कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने तत्काल कड़ा फैसला लेते हुए लापरवाह निर्माण एजेंसी और ठेका फर्म पर सर्जिकल स्ट्राइक की है।

गरियाबंद कलेक्टर उइके ने निर्माण कार्य में हो रही लापरवाही के बाद लिया एक्शन
कल हमने अपनी विशेष रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया था कि कैसे 116 स्कूलों में बच्चों की सुविधाओं के लिए आए बजट को सात महीने से दबाकर रखा गया है। हमने बताया था कि किस तरह दुर्ग की एक फर्म एडवांस राशि डकार कर बैठ गई और स्कूलों में शौचालय का काम शुरू ही नहीं हुआ। खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और कलेक्टर ने मामले की फाइलों को तलब किया।
कलेक्टर का कड़ा एक्शन 93 टेंडर निरस्त
जांच में हमारे द्वारा उठाए गए तथ्यों की पुष्टि होने के बाद कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने आदिवासी विकास कार्यालय को दिए गए 1 करोड़ 23 लाख रुपये के 93 निर्माण कार्यों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। प्रशासन ने माना कि सात महीने बाद भी काम शुरू न होना सीधे तौर पर लापरवाही और सरकारी पैसे का दुरुपयोग है।
45.85 लाख की वसूली का अल्टीमेटम
सिर्फ काम निरस्त ही नहीं हुआ, बल्कि प्रशासन ने अब ठेका फर्म की घेराबंदी भी कर दी है। निर्माण एजेंसी को काम शुरू होने से पहले जो 61.88 लाख रुपये जारी किए गए थे, उनमें से 45.85 लाख रुपये की राशि 15 दिनों के भीतर सरकारी खजाने में वापस जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि राशि जमा नहीं हुई, तो राजस्व वसूली (आरआरसी) के तहत फर्म के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कल हमने बताई थी निर्माण कार्यों की स्थिति
जिले के कुल 116 स्कूलों में शौचालय निर्माण और कायाकल्प का जिम्मा आदिवासी विकास विभाग को सौंपा गया था जिसकी कुल लागत 1 करोड़ 23 लाख रुपये तय की गई थी विभाग द्वारा अब तक लगभग 62 लाख रुपये से अधिक की राशि आहरित कर व्यय दिखाई जा चुकी है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सभी 116 कार्य आज भी अपूर्ण की श्रेणी में लटके हुए हैं और एक भी शौचालय का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है जो सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है विभाग अब इन अधूरे कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है ताकि दोषियों पर कार्यवाही की जा सके ।
आगे भी जारी रहेगी हमारी नजर
यह कार्रवाई उन दीमकों के लिए एक सबक है जो सरकारी योजनाओं को खोखला कर रहे हैं। स्कूलों में बच्चों के लिए शौचालय निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में जिस तरह की ढिलाई बरती गई, उस पर हमारी खबर ने न केवल प्रशासन को जगाया, बल्कि दोषियों की जवाबदेही भी तय करवाई।