गरियाबंद क्या धरातल से कट चुका है संगठन ? कांग्रेस की नई सूची में दिवंगत नेता का नाम शामिल होने पर उठे सवाल ।

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By Sangani

संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद

गरियाबंद क्या धरातल से कट चुका है संगठन गरियाबंद कांग्रेस की सूची में बड़ी लापरवाही 22 अगस्त 2025 को दुनिया छोड़ चुके पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष को दी गई नई जिम्मेदारी, क्या संगठन जमीनी हकीकत से कट चुका है? पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

गरियाबंद राजनीतिक दलों के लिए उनके कार्यकर्ता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत होते हैं, लेकिन जब संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद की कमी होने लगे, तो स्थिति असहज हो जाती है। गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। यहाँ इंदागांव मंडल अध्यक्ष की नई सूची में एक ऐसे व्यक्ति का नाम शामिल है, जो अब हमारे बीच नहीं हैं।

गरियाबंद क्या धरातल से कट चुका है संगठन

गरियाबंद क्या धरातल से कट चुका है संगठन तकनीकी चूक या संवाद का अभाव?

प्रदेश ​कांग्रेस द्वारा जारी हालिया नियुक्तियों में स्व. रूपेंद्र सोम को इंदागांव मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गौरतलब है कि रूपेंद्र सोम का निधन 22 अगस्त 2025 को हो चुका है। वे संगठन के एक कर्मठ नेता थे और पूर्व में आदिवासी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर रहकर पार्टी को अपनी सेवाएं दे चुके थे।

किसी दिवंगत व्यक्तित्व को पद की जिम्मेदारी मिलना यह दर्शाता है कि संभवत जमीनी स्तर से भेजी गई जानकारी और प्रदेश स्तर पर तैयार की गई सूची के बीच कहीं कोई कम्युनिकेशन गैप रह गया है।

स्वर्गीय रूपेंद्र सोम

जमीनी हकीकत से दूरी पर मंथन जरूरी

​इस घटना के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या संगठन का संपर्क अपने जमीनी कार्यकर्ताओं से कम होता जा रहा है? स्थानीय कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर एक मौन असंतोष देखा जा रहा है कि उनके बीच के एक वरिष्ठ साथी के निधन की जानकारी संगठन के शीर्ष पदों तक समय पर क्यों नहीं पहुंची। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि सूची जारी करने से पहले एक बार स्थानीय स्तर पर सत्यापन (Verification) कर लिया जाता, तो इस असहज स्थिति से बचा जा सकता था।

विपक्ष का रुख और संगठनात्मक चुनौती

​विपक्षी दल भाजपा ने इस मुद्दे पर तंज कसते हुए इसे संगठन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान बताया है। अब सवाल यह उठता है कि यह एक प्रशासनिक और तकनीकी त्रुटि या जमीनी हकीकत से पार्टी की जुड़ाव की कमी है, चुनावी साल और संगठन विस्तार के समय ऐसी चूक पार्टी की छवि के लिए चुनौती बन सकती है। अब देखना यह होगा कि पार्टी इस मानवीय त्रुटि को कितनी जल्दी सुधारती है और आने वाले समय में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद को कैसे मजबूत करती है।

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