गरियाबंद पेड़ कटाई मामला साहिब का रुतबा और खेतों में चलते जेसीबी के दांत, डिप्टी कलेक्टर की जमीन पर दम तोड़ता कानून ।

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By Sangani

गरियाबंद पेड़ कटाई मामला डिप्टी कलेक्टर की जमीन पर चली जेसीबी तो 10 की जगह उखड़ गए 50 से ज्यादा पेड़, नोट उड़ाने और बिना प्रभार कुर्सी पर जमे रहने वाले साहब का नया कारनामा पढ़ें।

गरियाबंद नियम और कानून अक्सर आम जनता के लिए वह लक्ष्मण रेखा होते हैं जिसे पार करते ही चालान कट जाता है, लेकिन रसूखदारों के लिए यही नियम रबर की तरह होते हैं जितना चाहो खींच लो! ताजा मामला गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड के ग्राम नयापारा का है, जहां करीब 7.26 एकड़ के हरे-भरे क्षेत्र को जेसीबी मशीनों से ऐसे रौंदा गया जैसे वहां कोई हरियाली नहीं, बल्कि अतिक्रमण हो।

​यह जमीन किसी आम किसान की नहीं, बल्कि जिले के डिप्टी कलेक्टर तुलसीराम मरकाम की धर्मपत्नी प्रभातबेला मरकाम के नाम पर दर्ज है।

गरियाबंद पेड़ कटाई मामला

गरियाबंद पेड़ कटाई मामला,नोट उड़ाने से लेकर कुर्सी पर कुंडली मारने तक का सफर

​साहब का विवादों से पुराना और अटूट याराना है। आपको याद ही होगा देवभोग का वह मशहूर ओपेरा डांस जहां साहब कलाकारों पर इस तरह नोट उड़ा रहे थे जैसे वह कोई प्रशासनिक योजना का फंड बांट रहे हों। वीडियो वायरल हुआ, तो प्रशासन ने गुस्से में आकर उन्हें एसडीएम की कुर्सी से बेदखल कर दिया।

​मगर साहब भी गजब के खिलाड़ी निकले। वे सीधे हाई कोर्ट की चौखट पर पहुंचे और स्टे ऑर्डर का ऐसा कवच लेकर आए कि सीधे वापस कुर्सी पर आ धमके,अब आलम यह है कि प्रशासन ने उन्हें एसडीएम पद का आधिकारिक प्रभार तक नहीं दिया है, लेकिन साहब बिना प्रभार के ही कुर्सी पर ऐसे जमे हैं जैसे फेविकोल का मजबूत जोड़ हो!

विकास की जेसीबी और पर्यावरण का विसर्जन

​कहते हैं जहां रसूख होता है, वहां जेसीबी के पहिए बिना किसी ब्रेक के और बिना किसी हॉर्न के चलते हैं। ग्रामीणों की मानें तो कुछ महीने पहले तक यह इलाका किसी मिनी जंगल जैसा दिखता था। जहां पीपल, महुआ और साजा जैसे सैकड़ों पेड़ लहलहा रहे थे।

​लेकिन साहब के खेत में अचानक ऐसे विकास की बयार चली कि दो-दो जेसीबी मशीनों ने मिलकर 50 से अधिक पेड़ों को कबाड़ घोषित कर जड़ से उखाड़ फेंका। अब वहां परिंदों की चहचहाहट की जगह सिर्फ धूल उड़ रही है।

तहसीलदार साहब की महानिद्रा और जादुई जेसीबी

​प्रशासनिक नियमों की किताब कहती है कि अपनी निजी जमीन पर भी पेड़ काटने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। लेकिन यहां तो नियम साहब के घर पानी भरते नजर आए। सूचना पाकर तहसीलदार साहब घटनास्थल पर तब पहुंचे, जब जेसीबी अपना पूरा काम खत्म कर के सुस्ता रही थी।

​हैरानी की बात यह रही कि रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद भी मशीनों को जब्त करने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। उन्हें ससम्मान छोड़ दिया गया। दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन फाइलों की कछुआ चाल देखकर लग रहा है कि जांच करने वाले अधिकारी अभी भी “पेड़ गिरने के बाद की शांति” का अनुभव कर रहे हैं।

बयानों का अद्भुत सर्कस लीज बनाम परमिशन

​इस पूरे मामले में भूस्वामी और प्रशासन के दावों को सुनकर तो कोई भी सिर पकड़ ले:

पक्ष…गजब का दावा

तुलसीराम मरकाम (डिप्टी कलेक्टर) जमीन को लीज पर दिया है, वहां सोलर प्लांट लगेगा, पेड़ तो एसडीएम कार्यालय के निर्देशानुसार ही काटे जा रहे हैं।

प्रशासन ..देखते है …

अंजलि खालखो (एसडीएम, छुरा) हमने तो केवल 10 पेड़ों को काटने की अनुमति दी थी अगर ज्यादा कटे है तो यह जांच का विषय है ।

वाह!,परमिशन 10 की थी और गिर गए 50 से ज्यादा। शायद जेसीबी चलाने वाले को गिनती नहीं आती थी या फिर रसूख के चश्मे में 10 और 50 का फर्क ही खत्म हो गया। अब एसडीएम साहिबा कह रही हैं कि “जांच की जाएगी”, तो जनता भी अच्छे से जानती है कि ऐसी जांचों का क्या अंजाम होता है।

सुलगते सवाल: क्या यह जांच वाकई किसी मुकाम तक पहुंचेगी, या फिर ठंडे बस्ते में जाकर सो जाएगी? क्या पर्यावरण बचाने का पाठ सिर्फ स्कूल की किताबों और आम जनता के चालान तक ही सीमित है?

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