​पीएम आवास फर्जीवाड़ा कागज़ी गृह प्रवेश कराना पड़ा भारी सुश्री श्वेता वर्मा पर गिरी गाज ।

Sangani

By Sangani

संपादक पैरी टाईम्स 24× 7 डेस्क गरियाबंद

​पीएम आवास फर्जीवाड़ा मैनपुर जनपद सीईओ श्वेता वर्मा पर गिरी गाज पीएम आवास योजना के अधूरे सच का पर्दाफाश कागज़ों में कैसे हो गया गृह प्रवेश और किसने करवाया पीएम मोदी के हाथों सस्पेंस जानने के लिए पढ़ें पूरी कहानी

गरियाबंद यह एक ऐसी कहानी है जो सिद्ध करती है कि अधूरे सपने भी कागज़ों पर पूरे हो सकते हैं बशर्ते आपके पास दृढ़ प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की जनपद पंचायत मैनपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सीईओ सुश्री श्वेता वर्मा को आखिरकार अपनी इस अभूतपूर्व प्रशासनिक रचनात्मकता का खामियाजा भुगतना पड़ा है उन्हें जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने तत्काल प्रभाव से सीईओ के पद से हटा दिया है

पीएम आवास फर्जीवाड़ा

​पीएम आवास फर्जीवाड़ा नाटक का मंचन अधूरा आवास पूरा सम्मान

मामला कोई सामान्य नहीं बल्कि सीधे प्रधानमंत्री आवास योजना पीएमएवाई से जुड़ा है सूत्रों की मानें तो मैडम सीईओ ने अपने प्रशासनिक जादू का इस्तेमाल करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों वर्चुअल तरीके से आयोजित होने वाले गृह प्रवेशम कार्यक्रम के लिए वह कर दिखाया जो असंभव था अधूरे आवासों को कागज़ों पर 100% पूर्ण घोषित कर दिया

विकास को गति देने के नाम अधूरे मकानों को दिखा दिया पूरा

​मैनपुर के एक ग्रामीण ने व्यंग्य करते हुए कहा मैडम ने शायद सोचा होगा कि जब गृह प्रवेश डिजिटल हो सकता है तो आवास का निर्माण भी डिजिटल कागज़ों पर पूरा हो जाना चाहिए सोचिए पीएम मोदी देश के विकास की गाथा गा रहे थे और उनके हाथों जिन लाभार्थियों के पूरे हो चुके आवासों में गृह प्रवेश कराया गया असल में वे घर अभी भी प्रेम से अधूरा बनकर अपनी पूर्णता की प्रतीक्षा कर रहे थे इसे कहते हैं विकास को गति देने के लिए समय से पहले की गई कागज़ी कार्यवाही

एसईओ फोकस क्यों हुई ये कागज़ी कारिस्तानी

​यह अनियमितता बताती है कि कैसे योजना के क्रियान्वयन में जमीनी हकीकत को फोटोग्राफिक और कागज़ी प्रमाणों के तले दबा दिया जाता है लर्निंग पॉइंट प्रशासनिक अधिकारियों का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि उन्हें टारगेट पूरे करने की चिंता जमीनी स्तर पर ईमानदारी से काम करने की ज़िम्मेदारी से कहीं ज़्यादा भारी पड़ गई यह फास्ट ट्रैक अप्रूवल का एक ऐसा मॉडल था जिसकी बलि लाभार्थियों का हक चढ़ा

गाज का गिरना जब जादू चला नहीं

​बहरहाल ज़िला पंचायत के सीईओ प्रखर चंद्राकर की नज़र इस जादुई निर्माण कार्य पर पड़ गई आदेश जारी हुआ और सुश्री वर्मा को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया अब उन्हें अपनी इस कागज़ी कलाकृति का जवाब देना होगा यह घटना उन सभी अधिकारियों के लिए एक ठोस सीख है जो सोचते हैं कि कागज़ों पर हेरफेर करके वे गरीबों के हक और प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगा सकते हैं

आगे क्या

​मामले की जांच जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही कागज़ के इन घरों को ज़मीन पर उतारने वाले असली गुनहगारों पर कड़ी कार्रवाई होगी

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