हिमांशु साँगाणी
गरियाबंद | छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने पूर्व सेवा गणना, वेतन विसंगति, क्रमोन्नति, महंगाई भत्ता और पेंशन जैसी मांगों को लेकर महासमुंद सांसद रूप कुमारी चौधरी और राजिम विधायक रोहित साहू को शिक्षक वितन विसंगति को लेकर ज्ञापन सौंपा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि शिक्षकों का संघर्ष इस बार भी सिर्फ ज्ञापन देने तक सीमित रहेगा या सरकार वास्तव में कुछ करेगी?

आश्वासन की फैक्ट्री फिर चालू!
शिक्षक वेतन विसंगति को लेकर वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन हर बार नेताओं के बयान एक जैसे होते हैं—”हम जल्द बात करेंगे,” “हम मुख्यमंत्री से मिलेंगे,” “हम समाधान निकालेंगे।” अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार भी सिर्फ चर्चा होगी या कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा?
शिक्षकों की मांगें और सरकारी गणना
शिक्षक: हमारी पूर्व सेवा गणना की जाए।
सरकार: हम गणना कर रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे!
शिक्षक: महंगाई भत्ता और एरियर भुगतान किया जाए।
सरकार: बजट का इंतजार करिए, अभी चुनाव भी आने वाले हैं!
शिक्षक: 20 साल की सेवा पर पूर्ण पेंशन दी जाए।
सरकार: 20 साल में सरकार कितनी बार बदलेगी, ये भी सोचिए!
ज्ञापन देने वालों की लंबी फौज, लेकिन क्या फर्क पड़ेगा?
इस शिक्षक आंदोलन में छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के गिरीश शर्मा, परमेश्वर निर्मलक, नंदकुमार रामटेके, सुरेश केला, दीनबंधु वैष्णव, जितेंद्र सोनवानी, संजय यादव, भूपेंद्र पुरी गोस्वामी, सुनील मेहर समेत कई शिक्षक नेता शामिल हुए। लेकिन सवाल वही है—क्या यह आंदोलन शिक्षक वेतन विसंगति दूर कर पाएगा या यह भी सिर्फ ज्ञापन तक ही सीमित रहेगा?
अब आगे क्या? शिक्षकों की अगली चाल!
अगर शिक्षक वेतन विसंगति की समस्या का समाधान जल्द नहीं निकला, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। लेकिन सरकार की रणनीति भी साफ है—पहले ज्ञापन, फिर चर्चा, फिर कमेटी, फिर वही “हम विचार कर रहे हैं” वाला जवाब!
अब देखना यह है कि इस बार शिक्षक सिर्फ सवाल पूछेंगे या जवाब भी लेंगे!