संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
5-5 लाख के दो इनामी नक्सलियों ने गरियाबंद पुलिस की ‘पूना मोद्दोल’ नीति से प्रभावित होकर किया आत्मसमर्पण। Area Committee Member (ACM) रैंक के इन नक्सलियों के सरेंडर से नक्सल मोर्चे पर बड़ा बदलाव आया है। जानिए गरियाबंद में पुलिस की ‘नया सवेरा’ नीति ने कैसे 2025 में 20 नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटाया।
गरियाबंद नक्सल मोर्चे पर गरियाबंद पुलिस ने केवल बंदूक के दम पर नहीं, बल्कि एक मास्टरस्ट्रोक नीति के दम पर ऐसी सफलता हासिल की है, जिसने जंगल में वर्षों से जड़ जमाए लाल आतंक को जड़ से हिला दिया है। छत्तीसगढ़ में इस साल की यह सबसे बड़ी खबर है संगठन के दो सबसे खतरनाक और 5-5 लाख रुपये के इनामी एरिया कमेटी मेंबर (ACM) नक्सलियों ने आखिरकार कानून के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है!

यह पूना मोद्दोल क्या है? जिससे खूंखार नक्सली भी डरने लगे!
सवाल यह उठता है कि आखिर गरियाबंद पुलिस की पूना मोद्दोल (नया सवेरा) नाम की यह नीति क्या है, जिसके आगे 10 लाख रुपये के इनामी नक्सली भी बेबस हो गए? पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह सिर्फ एक पुनर्वास योजना नहीं, बल्कि एक गहन मनोवैज्ञानिक रणनीति है। इसके तहत
सुरक्षा का वादा: आत्मसमर्पण करने वालों को तुरंत सुरक्षा और सम्मान की जिंदगी का वादा।
गुप्त संपर्क: पुलिस ने जंगल के भीतर अपने विश्वसनीय तंत्र के माध्यम से इन इनामी नक्सलियों तक ‘नया सवेरा’ का संदेश पहुंचाया।
पुनर्वास का पैकेज: 5-5 लाख के इन ACM को मिलने वाली सरकारी सहायता राशि, जमीन और बच्चों की शिक्षा के वादे ने उन्हें हिंसा छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
दोनों ACM— एक पुरुष और एक महिला ने गरियाबंद उप पुलिस अधीक्षक (DSP) के सामने सरेंडर किया। उनके चेहरे पर संगठन छोड़ने की राहत साफ दिख रही थी।
1 माह में 9 सरेंडर, गरियाबंद में कुछ बड़ा पक रहा है!
यह कामयाबी इसलिए भी सनसनीखेज है, क्योंकि पिछले एक माह के भीतर गरियाबंद पुलिस ने दो बड़ी सफलताएं हासिल की हैं:
- पिछले माह (8 नवंबर): 7 नक्सलियों का हथियारों के साथ आत्मसमर्पण।
- आज: 5-5 लाख के दो इनामी ACM का सरेंडर एसडीके एरिया कमेटी सदस्य संतोष उर्फ लालपवन सीनापाली एरिया कमेटी सदस्य मंजू उर्फ नंदू कुल 10 लाख ईनामी नक्सली द्वारा गरियाबंद में सरेंडर
कुल आंकड़ा साल 2025 में अब तक गरियाबंद में 20 नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं। वहीं दूसरे जिले की बात वहां भी 12 से अधिक गरियाबंद के नक्सली सरेंडर कर चुके है कुल आंकड़ा 32 है तो आंकड़ा साबित करता है कि नक्सल संगठन के भीतर भयंकर टूटन शुरू हो गई है।
गरियाबंद पुलिस का कहना है: हमारी ‘पूना मोद्दोल’ नीति जंगल में तेजी से फैल रही है। कई और इनामी नक्सलियों से संपर्क साधा गया है। बहुत जल्द कुछ और बड़े नाम सामने आने वाले हैं। यह नीति हिंसा के रास्ते को हमेशा के लिए बंद कर देगी।”
क्या यह आत्मसमर्पण की लहर पूरे छत्तीसगढ़ के नक्सल मोर्चे पर गेम चेंजर साबित होगी? समय ही बताएगा।