फिंगेश्वर में 12 घंटे चला कृषि महाविद्यालय का संग्राम पर मीडिया ने कलेक्टर से मांगा जवाब तो बोले मैं कोई जवाब नहीं दूंगा तुम मुझे क्या सपोर्ट करते हो ?

Sangani

By Sangani

संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद

फिंगेश्वर में 12 घंटे चला कृषि महाविद्यालय का संग्राम ​फिंगेश्वर कृषि महाविद्यालय भूमि विवाद पर रात 2 बजे जब मीडिया ने संवेदनशील मामले में कलेक्टर भगवान सिंह उईके से जवाब मांगा तो बोले मैं कोई जवाब नहीं दूंगा तुम मुझे क्या सपोर्ट करते हो जानिए 12 घंटे चले ऐतिहासिक चक्काजाम और आधी रात को हुए हंगामे की पूरी रिपोट पैरी टाईम्स पर ।

गरियाबंद/फिंगेश्वर प्रशासन की संवेदनहीनता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि जब एक पूरा शहर अपने भविष्य (कृषि कॉलेज) के लिए सड़कों पर था, 12 घंटे से चक्काजाम चल रहा था और आधी रात को जनता की सांसें अटकी हुई थीं, तब जिले के मुखिया अपनी जवाबदेही से भाग रहे थे। जब मीडिया ने इस बेहद संवेदनशील मामले में कलेक्टर का पक्ष जानना चाहा, तो उनका जवाब किसी लोकतांत्रिक अधिकारी का नहीं, बल्कि एक अहंकारी शासक जैसा था।

फिंगेश्वर में 12 घंटे चला कृषि महाविद्यालय का संग्राम

फिंगेश्वर में 12 घंटे चला कृषि महाविद्यालय का संग्राम कलेक्टर बोले नहीं दूंगा जवाब ?

आधी रात 2 बजे जब फिंगेश्वर की सड़कों पर तनाव चरम पर था, तब मीडिया भी डेट हुए थे मामला ही ऐसा था कि मीडियाकर्मी भी अपना घर परिवार छोड़कर मौके पर थे और इस पूरे मामले को लेकर जब कलेक्टर से सवाल किया कि 21 नवंबर को फिंगेश्वर में जमीन मांगने वाले साहब 8 दिसंबर को किरवई के लिए क्यों अड़ गए? इस पर स्पष्टीकरण देने के बजाय कलेक्टर ने बेहद तीखे लहजे में कहा तुम चाहे कोई भी हो मैं कोई जवाब नहीं दूंगा, तुम मुझे क्या सपोर्ट करते हो? साहब का यह बयान अब आग की तरह फैल रहा है। सवाल यह है कि क्या किसी अधिकारी का वर्जन जनता के प्रति उसकी जिम्मेदारी है या मीडिया से मिलने वाला कोई सपोर्ट ?

12 घंटे का ऐतिहासिक संघर्ष जब हार गया प्रशासन

​कल फिंगेश्वर ने वह देखा जो जिले के इतिहास में कभी नहीं हुआ। सुबह से रात तक व्यापार ठप्प रहा और चक्काजाम ने राजिम-महासमुंद मार्ग की रफ़्तार रोक दी।

  • सत्ता पक्ष के विधायक भी बेबसभाजपा विधायक रोहित साहू की मौजूदगी में भी प्रशासन अपनी जिद पर अड़ा रहा, जिससे विधायक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
  • आधी रात का ड्रामा जब पूरा अमला पहुंचा, तो समाधान के बजाय अहंकार की भाषा सुनने को मिली।

फिर नहीं उठाया कॉल आखिर जवाब देने से क्यों बचते हैं साहब ?

​इस पूरे मामले को लेकर जब उनसे उनका पक्ष जानने के लिए पैरी टाईम्स ने उनके नंबर 9424272310 पर कॉल किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया हैंरानी की बात यह है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। गरियाबंद जिले में अक्सर देखा गया है कि जब भी कोई गंभीर मुद्दा सामने आता है या मीडियाकर्मी जनहित के सवालों पर जवाब मांगने जाते हैं तो कलेक्टर भगवान सिंह उइके जवाब देने से बचते नजर आते हैं। मीडिया के प्रति उनकी यह बेरुखी और सवालों से भागने की आदत अब जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है

7 दिन की मोहलत क्या वाकई होगा समाधान है या केवल मिला है आश्वासन ?

​अंत में एसपी वेदव्रत सिरमौर की मध्यस्थता से 7 दिन का समय तय हुआ है। संघर्ष समिति को अब 50 एकड़ जमीन चिन्हांकित करनी होगी। लेकिन बड़ा सवाल वही खड़ा है क्या 7 दिन बाद प्रशासन फिर से सपोर्ट और जवाब नहीं दूंगा वाली भाषा पर उतर आएगा?

साहब ने ठीक ही कहा, जवाब क्यों दें? जवाब देने के लिए तर्क चाहिए होते हैं और यहाँ तो सिर्फ आदेश हैं। जब अपनी ही चिट्ठी (21 नवंबर वाली) का जवाब न बने, तो मीडिया सपोर्ट का बहाना ही सबसे सुरक्षित रास्ता बचता है।

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