गरियाबंद जिले में शिक्षक पार्टी मूड़ में DMC शिवेश शुक्ला के निरीक्षण में 19 शिक्षक गायब मिले और मध्याह्न भोजन में भारी अनियमितता पाई गई। कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद कहते हैं गुरु गोविंद दोऊ खड़े, लेकिन गरियाबंद और मैनपुर के सरकारी स्कूलों में गुरुजी तो क्या, उनकी परछाईं भी ढूंढने से नहीं मिल रही। जब जिले के डीएमसी (DMC) शिवेश शुक्ला अचानक स्कूलों का हाल जानने पहुंचे, तो उन्हें शिक्षा के मंदिर में विद्या तो मिली, लेकिन विधाता (शिक्षक) गायब मिले।

गरियाबंद शिक्षा व्यवस्था पर सवाल परीक्षा सिर पर, शिक्षक गायब गजब है जिम्मेदारी
बोर्ड परीक्षाएं दरवाजे पर दस्तक दे रही हैं, बच्चों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं, लेकिन जिले के 06 प्राचार्य और 13 शिक्षक इतने तनावमुक्त हैं कि स्कूल आना ही भूल गए। डीएमसी शुक्ला जब मैनपुर और गरियाबंद ब्लॉक के स्कूलों में घुसे, तो वहां सन्नाटा पसरा था। ऐसा लगा मानो शिक्षकों ने सामूहिक रूप से अदृश्य होने की कला सीख ली है।
थाली में सिर्फ सोयाबीन का राज दाल हुई डायनासोर की तरह लुप्त
मैनपुर के बरगांव स्कूल की कहानी तो किसी ट्रैजेडी फिल्म जैसी है। यहाँ के बच्चों ने डीएमसी को बताया कि उनके नसीब में दाल शायद पिछले जन्म के पुण्य से ही मिलती है। रोजाना मेनू में सिर्फ चावल और सोयाबीन बड़ी का एकतरफा प्यार चल रहा है।
- बहाना समूह संचालक कहते हैं पैसा नहीं मिला।
- सच्चाई शासन की व्यवस्था फाइलों में दौड़ रही है, और बच्चों की थाली में सिर्फ पानी तैर रहा है।
कलेक्टर की सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी
जब प्राचार्य प्रकाश देवांगन को फोन लगाया गया, तो उन्होंने बड़े आराम से फरमाया साहब, मैं तो छुट्टी पर हूँ! अब इस लापरवाही महोत्सव की पूरी लिस्ट कलेक्टर महोदय के पास भेज दी गई है।
गरियाबंद जिला प्रशासन का कड़ा रुख
बोर्ड परीक्षा के समय जो शिक्षक अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं, प्रशासन अब उन्हें स्थायी आराम देने की तैयारी में है। बच्चों के भविष्य और भोजन से समझौता करने वालों पर FIR जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।
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