नक्सलवाद के अंत की आखिरी पुकार गरियाबंद में हथियारों की जगह अब अपील से होगा सरेंडर,अपनों के आंसुओं ने पिघलाया पत्थर,देखे वीडियो।

Sangani

By Sangani

नक्सलवाद के अंत की आखिरी पुकार गरियाबंद में नक्सलवाद के खात्मे की तैयारी, DBCM अंजू और बलदेव ने गोबरा सीता नदी कमेटी के बचे 9 नक्सलियों से घर वापसी की अपील की है। जानिए पुलिस की नई रणनीति ।

गरियाबंद छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नक्सलवाद अपने अस्तित्व की अंतिम लड़ाई लड़ रहा है। जिला पुलिस प्रशासन ने अब बचे हुए नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए एक ऐसी मास्टर रणनीति तैयार की है, जिसमें गोलियों की तड़तड़ाहट नहीं, बल्कि अपनों की ममता और साथ बीते कल की यादें हैं। 19 जनवरी को सरेंडर कर चुके बड़े कैडर के नक्सलियों ने अब जंगल में छिपे अपने साथियों से घर वापसी की भावुक अपील की है।

​नक्सलवाद के अंत की आखिरी पुकार

नक्सलवाद के अंत की आखिरी पुकार अंजू और बलदेव बने शांति दूत

हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाली DBCM अंजू और अपने परिजनों की भावुक अपील वाले वीडियो के बाद सरेंडर करने वाले उसके साथी बलदेव ने अब बंदूक छोड़कर माइक थाम लिया है। कल तक जो साथी साथ में मिलकर दहशत का पर्याय बने थे, आज वही अंजू अपने बाकी बचे 9 साथियों से अपील कर रही है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़ दें। अंजू और बलदेव का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति नक्सलियों के भविष्य के लिए एक सुनहरा अवसर है।

इन 9 बड़े चेहरों पर टिकी है नजर

​गरियाबंद पुलिस का फोकस अब गोबरा सीता नदी कमेटी के उन अंतिम सदस्यों पर है जो अब भी जंगलों में भटक रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • उषा (DBCM)
  • ज्योति (DBCM)
  • उमा (ACM)
  • रीना (ACM)
  • ​अन्य 5 सक्रिय सदस्य।

SP के मोबाइल से सीधे संपर्क की सुविधा

​पुलिस प्रशासन ने इस अभियान को और भी सुलभ बना दिया है। गरियाबंद एसपी के मोबाइल नंबर के माध्यम से सीधे संपर्क करने की छूट दी गई है। उषा के परिजनों की भावुक अपील के बाद अब पुलिस को उम्मीद है कि इमोशनल कार्ड और पुनर्वास नीति का लाभ देखते हुए ये अंतिम टुकड़ी भी जल्द ही हथियार डाल देगी।

गरियाबंद में इस टुकड़ी के सरेंडर करते ही जिला लगभग पूरी तरह नक्सल मुक्त हो जाएगा, हमारा लक्ष्य है कि बिना खून बहाए ये साथी मुख्यधारा में लौटें । वेदव्रत सिरमौर एसपी गरियाबंद

क्यों खास है यह रणनीति?

  1. मनोवैज्ञानिक दबाव: अपनों की अपील नक्सलियों के मनोबल को तोड़ रही है।
  2. पुनर्वास का भरोसा: सरेंडर कर चुके नक्सलियों की बेहतर स्थिति देखकर बाकी सदस्यों में विश्वास जागा है।
  3. शून्य हिंसा लक्ष्य: पुलिस अब मुठभेड़ के बजाय शांतिपूर्ण समर्पण को प्राथमिकता दे रही है।

पुलिस की मंशा साफ

आख़िरी पंक्ति भी लौटे मुख्यधारा में पुलिस प्रशासन स्पष्ट कर चुका है कि वह चाहता है कि नक्सलियों की अंतिम पंक्ति भी बिना खून-खराबे के सरेंडर करे और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का पूरा लाभ उठाए।इस टुकड़ी के आत्मसमर्पण के बाद गरियाबंद जिले से नक्सलवाद का लगभग पूरी तरह से सफाया हो जाएगा।

यह भी पढ़ें…लाल सलाम पर भारी पड़ा मार्मिक पैगाम,19 साल का नक्सली सफर… और अंत में सरेंडर, देखे इतने लाख के इनामी नक्सलियों ने कैसे बदला अपना इतिहास?

कृपया शेयर करें

लगातार सही खबर सबसे पहले जानने के लिए हमारे वाट्सअप ग्रुप से जुड़े

Join Now

Join Telegram

Join Now

error: Content is protected !!