गरियाबंद में सत्ता पक्ष का रेत राज चौबेबांधा और पिताइबांध रेतघाटों में अवैध खनन का खेल जारी, कार्रवाई से पहले माफियाओं को मिल जाती है सूचना, खनिज विभाग पकड़ पाया सिर्फ एक मशीन।
गरियाबंद जिले की चौबेबांधा और पिताइबांध रेत खदानें पिछले कई महीनों से सत्ता पक्ष के रेत माफियाओं की ओपन यूनिवर्सिटी बन चुकी हैं, जहां अवैध उत्खनन का खेल दिन-रात जारी है और प्रशासन हर बार सरप्राइज विजिट पर जाकर खुद ही सरप्राइज हो जाता है। हालत यह है कि कार्रवाई करने निकलने वाली टीम से पहले ही सूचना रेत माफियाओं तक पहुंच जाती है और मौके पर पहुंचते-पहुंचते मशीनें, हाइवा और चालक हवा हो जाते हैं।
बुधवार को खनिज विभाग की टीम चौबेबांधा रेतघाट में कार्रवाई करने पहुंची। मगर हमेशा की तरह इस बार भी विभाग के हाथ बड़ी सफलता के नाम पर केवल एक चेन माउंटेन मशीन ही लगी। बाकी हाइवा वाहन ऐसे गायब हुए जैसे उन्हें पहले से पूरी पटकथा पता हो। सबसे दिलचस्प बातें की जैसे कार्यवाही करने के बाद टीम गरियाबंद पहुंचती है अवैध खनन फिर से शुरू हो जाता है । इधर प्रशासन छोटी मोटी कार्यवाही करके अपनी पीठ थपथपाता है और उधर खनन माफिया प्रशासन की कार्यवाही की खिल्ली उड़ाते हुए अवैध खनन दोबारा शुरू कर देते है । बताया जा रहा है कि दोनों ही खदानों का संचालन सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के द्वारा किया जा रहा है । अब सवाल यह उठता है कि क्या यही वजह है कि प्रशासन के हाथ कांप रहे कार्यवाही के लिए ?

गरियाबंद में सत्ता पक्ष का रेत राज..कार्रवाई से पहले ही अलर्ट मोड में पहुंच जाते हैं माफिया
सूत्रों की मानें तो गरियाबंद से जैसे ही कार्रवाई की टीम निकलती है, राजिम क्षेत्र के कुछ विभागीय सूत्रों के माध्यम से इसकी जानकारी अवैध खनन करने वालों तक पहुंच जाती है। इसके बाद खदानों में ऑपरेशन सफाई शुरू हो जाता है। मशीनें गायब, वाहन फरार और मौके पर सिर्फ धूल उड़ती नजर आती है। बताया जा रहा है कि बुधवार की कार्रवाई के दौरान कुछ हाइवा वाहनों को विभाग ने पकड़ भी लिया था, लेकिन चालक गाड़ियां बंद कर चाबी लेकर ऐसे भागे जैसे किसी फिल्म का क्लाइमेक्स चल रहा हो। यहां तो ठीक भी है मगर जब गाँव के सरपंच को वाहन सुपुर्दगी नामा में हस्ताक्षर करने के लिए बुलाया गया तो सरपंच भी दहशत के मारे मौके पर नहीं पहुंचा ।
मिस्त्री भी डर गया, छह गाड़ियां छोड़ लौटी टीम
सूत्रों के अनुसार विभाग ने वाहनों को चालू करवाने के लिए एक मिस्त्री भी बुलाया था, लेकिन कथित तौर पर खदान माफियाओं के डर और धमकी के कारण मिस्त्री आधे रास्ते से ही लौट गया। नतीजा यह हुआ कि मौके पर खड़ी करीब छह गाड़ियों को छोड़ना पड़ा और टीम केवल एक मशीन लेकर वापस लौट आई। जब्त मशीन को पांडुका थाने में खड़ा कराया गया है।
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी चौबेबांधा रेतघाट में कार्रवाई के दौरान केवल एक मशीन जब्त कर विभाग ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, जबकि बाकी वाहन आराम से निकल गए थे।
रातभर दौड़ते हैं हाइवा, मगर राजिम राजस्व और पुलिस विभाग को नहीं दिखता अवैध खनन
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात 12 बजे से सुबह 8 बजे तक सैकड़ों रेत से भरे हाइवा राजिम क्षेत्र से गुजरते हैं। सूत्रों कीमते तो आम जनता खुलेआम यह नजारा देखती है, लेकिन जब कार्रवाई की बात आती है तो राजिम के राजस्व विभाग और राजिम पुलिस के जिम्मेदारों का जवाब होता है हमें जानकारी नहीं है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर अवैध रेत खनन पर लगाम लगाने में प्रशासन असफल क्यों साबित हो रहा है? क्या कार्रवाई से पहले सूचना लीक हो रही है या फिर पूरा सिस्टम सिर्फ औपचारिकता निभा रहा है?
क्या बोली खनिज अधिकारी?
खनिज अधिकारी अर्चना ठाकुर ने बताया कि बुधवार को चौबेबांधा रेतघाट में कार्रवाई की गई, जहां एक चेन माउंटेन मशीन जब्त की गई है।