सुप्रीम कोर्ट के रात्रिकालीन यातायात प्रतिबंध के फैसले के बाद उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में जैव-विविधता बढ़ी। दुर्लभ गिलहरियां, हॉर्नबिल और बाघों की गतिविधियां बढ़ने लगी हैं।
गरियाबंद कभी बाघों की घटती मौजूदगी और जैव-विविधता के संकट से जूझ रहा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अब एक नई उम्मीद की कहानी लिख रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह बना है माननीय सुप्रीम कोर्ट का वह ऐतिहासिक फैसला, जिसके तहत देशभर के टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्रों में रात्रिकालीन यातायात पर प्रतिबंध लगाया गया। इस निर्णय के लागू होने के कुछ ही महीनों में उदंती-सीतानदी के जंगलों में ऐसे सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं, जिन्हें वन्यजीव विशेषज्ञ भी उत्साहजनक मान रहे हैं।

रात का सन्नाटा बना जंगल का रक्षक, वर्षों बाद लौटने लगे दुर्लभ वन्यजीव
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्रों से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग NH-130C और NH-130CD पर वर्षों तक रातभर वाहनों की आवाजाही होती रही। इसके कारण जंगल की प्राकृतिक शांति और वृक्षों की छत्राकार संरचना प्रभावित होती थी। दिसंबर 2025 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने के बाद रात के समय जंगलों में फिर से सन्नाटा लौट आया और इसी के साथ वन्यजीवों की स्वाभाविक गतिविधियां भी बढ़ने लगीं।सबसे दिलचस्प बदलाव दुर्लभ वृक्षवासी प्रजातियों में देखने को मिला है।
गिलहरियों से लेकर बाघ तक की बढ़ी हलचल
भारतीय विशाल उड़न गिलहरी (Indian Giant Flying Squirrel) और भारतीय विशाल गिलहरी (Malabar Giant Squirrel) जैसी प्रजातियां अब पहले से कहीं अधिक क्षेत्रों में दिखाई दे रही हैं। ये गिलहरियां अपना अधिकांश जीवन वृक्षों की ऊपरी परतों में बिताती हैं और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक ग्लाइड या छलांग लगाकर पहुंचती हैं। वन विशेषज्ञ इन्हें स्वस्थ जंगल का सबसे भरोसेमंद जैव-सूचक मानते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर: जंगलों में फिर गूंजने लगी जैव-विविधता की आहट
वन विभाग के अनुसार इन दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी अब उदंती और सीतानदी कोर क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही। रिसगांव, इंदागांव, आरसीकन्हार और कुल्हाड़ीघाट जैसे क्षेत्रों में भी इनकी गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं। यह संकेत है कि जंगलों की प्राकृतिक संपर्कता (Canopy Connectivity) दोबारा मजबूत हो रही है और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास तैयार हो रहे हैंउदंती-सीतानदी
रात्रिकालीन यातायात बंद होते ही बदली तस्वीर, वन्यजीवों को मिला सुरक्षित आशियाना
टाइगर रिजर्व में मालाबार पाइड हॉर्नबिल जैसे दुर्लभ पक्षियों की बढ़ती उपस्थिति भी विशेषज्ञों को उत्साहित कर रही है। हॉर्नबिल जंगलों में बीज प्रसार कर वनों के पुनर्जनन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं विशाल गिलहरियों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि जंगलों का पर्यावरण तेजी से स्वस्थ हो रहा है
जहां 15 साल से नहीं थी बाघों की मौजूदगी, वहां फिर दिखने लगी जीवन की हलचल
।सबसे रोमांचक संकेत बाघों की वापसी को लेकर सामने आए हैं। जनवरी 2026 में सीतानदी कोर क्षेत्र में बाघ की गतिविधि दर्ज की गई थी। वन अधिकारियों का मानना है कि रात के समय मानव हस्तक्षेप कम होने से बाघों की आवाजाही के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं। यही कारण है कि उन क्षेत्रों में भी बाघों की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जहां पिछले डेढ़ दशक से उनकी मौजूदगी का कोई रिकॉर्ड नहीं था।इस बदलाव का लाभ स्थानीय आदिवासी समुदायों को भी मिल सकता है।
उड़न गिलहरियों और हॉर्नबिल की वापसी ने सुनाई जंगल के पुनर्जीवन की कहानी
दुर्लभ वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी से इको-टूरिज्म, बर्ड वॉचिंग और नेचर ट्रेल जैसी गतिविधियों के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। इससे रोजगार और आजीविका के नए रास्ते खुल सकते हैं।उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केवल यातायात नियंत्रण का आदेश नहीं, बल्कि जंगलों को उनका खोया हुआ जीवन लौटाने वाला ऐतिहासिक कदम है। रात्रि की शांति ने जंगल को फिर से जीवंत कर दिया है और अब यहां जैव-विविधता नए पंखों के साथ उड़ान भरती दिखाई दे रही है।