22 साल तक आश्वासन देता रहा सिस्टम, मुर्गा सेंटर चलाने वाले लोचन ने कर्ज लेकर बना दिया पुल ।

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By Sangani

गरियाबंद के मैनपुर में 22 साल तक पुल निर्माण की मांग पूरी नहीं हुई तो एक छोटे व्यापारी लोचन चक्रधारी ने 12 लाख रुपये खर्च कर और कर्ज लेकर खुद पुल बनवा दिया, पढ़िए पूरी खबर।


गरियाबंद जिले के मैनपुर मुख्यालय से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो एक ओर आम नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी को सलाम करती है तो दूसरी ओर वर्षों से विकास के दावे करने वाली व्यवस्था पर कई सवाल भी खड़े करती है। फुलझर नाला पार कर अपने घरों तक पहुंचने वाले करीब 35 परिवारों के लिए आखिरकार राहत का रास्ता बन गया है, लेकिन यह राहत किसी सरकारी योजना या विभागीय पहल से नहीं, बल्कि एक छोटे व्यापारी की व्यक्तिगत पहल से संभव हुई है।

वर्षों की मांग के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, एक व्यापारी ने खुद उठाई जिम्मेदारी

मैनपुर के लोचन चक्रधारी, जो मुख्यालय में एक मुर्गा कटिंग सेंटर संचालित करते हैं, ने लगभग 12 लाख रुपये खर्च कर फुलझर नाला पर पुल का निर्माण करा दिया। हैरानी की बात यह है कि इस पुल की मांग ग्रामीण पिछले 22 वर्षों से लगातार प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सरकारी मंचों पर उठाते आ रहे थे। हर बार आश्वासन तो मिला, लेकिन समाधान नहीं।

फाइलों में घूमता रहा प्रस्ताव, जमीन पर उतर आया आम आदमी का संकल्प

स्थानीय लोगों के अनुसार, मोहल्ले के बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को रोजाना सिंचाई विभाग के जर्जर स्टॉप डेम के सहारे आवाजाही करनी पड़ती थी। स्कूली बच्चों को भी जान जोखिम में डालकर डेम पर छलांग लगाते हुए नाला पार करना पड़ता था। बरसात के दिनों में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता था, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नजर शायद इस परेशानी तक कभी नहीं पहुंची।

पुल चाहिए की गुहार से लेकर पुल बन गया तक, एक आम आदमी की असाधारण कहानी

लोचन चक्रधारी स्वयं भी इसी मार्ग का उपयोग करते थे। रोजाना लोगों की परेशानी देखने के बाद उन्होंने तय किया कि अब इंतजार नहीं, समाधान होना चाहिए। करीब एक माह पहले उन्होंने अपने परिवार के सहयोग से पुल निर्माण का कार्य शुरू कराया। निर्माण में लगी राशि का एक हिस्सा उनकी वर्षों की जमा पूंजी से आया, जबकि शेष रकम उन्होंने परिचितों से कर्ज लेकर जुटाई।

22 साल की सरकारी चुप्पी पर भारी पड़ा लोचन का 12 लाख का संकल्प

विडंबना यह है कि जिस पुल के लिए दो दशक तक फाइलें घूमती रहीं, प्रस्ताव बनते रहे और मांगपत्र सौंपे जाते रहे, वह पुल एक आम नागरिक ने अपने संसाधनों से तैयार कर दिया। आज यह पुल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली पर एक मौन प्रश्नचिह्न भी बन गया है।
ग्रामीण हरि सिंह, रामकृष्ण ध्रुव सहित मोहल्ले के अन्य लोगों ने लोचन चक्रधारी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल लोगों की वर्षों पुरानी समस्या दूर की है, बल्कि यह भी साबित किया है कि समाज के प्रति जिम्मेदारी केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं है।

35 परिवारों की परेशानी खत्म, कर्ज लेकर बनाया ऐसा पुल जो सिस्टम नहीं बना सका

फुलझर नाला पर बना यह पुल अब 35 परिवारों की सुविधा का माध्यम है, लेकिन इसके साथ ही यह कहानी उस सिस्टम को भी आईना दिखा रही है, जो 22 वर्षों तक केवल आश्वासन देता रहा और एक साधारण व्यापारी ने वह काम कर दिखाया, जिसका इंतजार पूरा मोहल्ला कर रहा था।

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