जिसे जंगल बचाना था वही बना जंगल का दुश्मन दो बाघों की खाल तस्करी मामले में बड़ा खुलासा,महाराष्ट्र पुलिस में कार्यरत दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद सरकारी क्वार्टर से 5 किलो पैंगोलिन के शल्क बरामद,पढ़ें पूरी रिपोर्ट पैरी टाईम्स पर ।
गरियाबंद जंगल की हिफाजत करने वाले अक्सर वन विभाग के जवान माने जाते हैं और कानून-व्यवस्था की रक्षा का जिम्मा पुलिस के कंधों पर होता है। लेकिन जब जांच की सुई ऐसे लोगों तक पहुंच जाए, जिनके कंधों पर खुद कानून की वर्दी हो, तो सवाल सिर्फ एक मामले का नहीं रह जाता, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर खड़ा हो जाता है।महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ सीमा पर दो बाघों की खाल के साथ पकड़े गए अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी मामले ने अब ऐसा मोड़ ले लिया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार दोनों आरोपी महाराष्ट्र पुलिस विभाग में वर्तमान में कार्यरत कर्मचारी हैं। इनमें बिजेश्वर गेडाम गढ़चिरौली जिले में हेड कांस्टेबल के पद पर पदस्थ है, जबकि दूसरा आरोपी बाबूराव मड़ावी लोकल इंटेलिजेंस ब्रांच (LIB) में कार्यरत है।

जिसे जंगल बचाना था वही बना जंगल का दुश्मन
fविडंबना देखिए… जिन पर कानून की रक्षा और अपराधियों की तलाश की जिम्मेदारी है, अब वही खुद वन्यजीव तस्करी के गंभीर मामले में जांच एजेंसियों के शिकंजे में हैं। यह खबर इसलिए भी चर्चा का विषय बन गई है क्योंकि मामला केवल दो बाघों की खाल तक सीमित नहीं रहा।पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर एंटी-पोचिंग टीम ने बिजेश्वर गेडाम के सरकारी पुलिस क्वार्टर की तलाशी ली। तलाशी में करीब 5 किलोग्राम पैंगोलिन (साल खपरी) के शल्क बरामद किए गए। इस बरामदगी ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। अब जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह नेटवर्क केवल बाघों की तस्करी तक सीमित था या फिर अनुसूची-1 में शामिल अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के अवैध कारोबार से भी इसका संबंध है।
पुलिस कर्मी के सरकारी आवास से बरामद पैंगोलीन का शल्क
कहावत है कि चोर की दाढ़ी में तिनका होता है,लेकिन यहां तो मामला सरकारी क्वार्टर तक पहुंच गया। हालांकि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन अब तक सामने आए तथ्य कई गंभीर सवाल जरूर छोड़ रहे हैं। आखिर इतने संवेदनशील पदों पर कार्यरत लोगों के नाम इस तरह के मामले में कैसे सामने आए? यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या यह किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा है?संयुक्त कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपियों को दो बाघों की खाल और एक मोटरसाइकिल के साथ गिरफ्तार किया गया था। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि बरामद खालें इंद्रावती टाइगर रिजर्व–अबूझमाड़ क्षेत्र में शिकार किए गए बाघों की हो सकती हैं। यह इलाका मध्य भारत के सबसे महत्वपूर्ण टाइगर लैंडस्केप में शामिल माना जाता है और यहां से जुड़े वन्यजीव कॉरिडोर की सुरक्षा लंबे समय से वन विभाग की प्राथमिकता रही है।
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की टीम और एंटी पोचिंग टीम की कार्रवाई
इस पूरे अभियान को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन की टीम और एंटी-पोचिंग यूनिट ने वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर अंजाम दिया। खुफिया सूचना के आधार पर हुई इस कार्रवाई को वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। साथ ही जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा इसका फैलाव किन राज्यों तक है।
आरोपियों से मिली सूचना के आधार पर कई राज्यों में छापामारी
यह मामला केवल दो बाघों की खाल की बरामदगी भर नहीं है। यह उन सवालों का आईना भी है, जिनका जवाब व्यवस्था को देना होगा। जंगल बचाने की जिम्मेदारी जिन संस्थाओं पर है, अगर उन्हीं संस्थाओं से जुड़े लोगों के नाम जांच में सामने आते हैं तो यह केवल वन्यजीव संरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि जनता के भरोसे की भी परीक्षा है।वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव अपराधों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई गई है और पूरे मामले की गहन जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी अहम खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वही इस मामले में आगे भी कई लोगों की गिरफ्तारी होने की संभावनाएं बढ़ गई है ।
जाने इस मामले को लेकर क्या बोले वरुण जैन
बाघ तस्करी मामले में दोनों आरोपी महाराष्ट्र पुलिस विभाग से जुड़े हुए हैं जिसके चलते मामला और भी गंभीर हो गया है बरहाल पूरे मामले की जांच जारी है और भी दूसरे राज्यों में इनके तार खंगाले जा रहे हैं और इस मामले में और भी आरोपियों की गिरफ्तारी होने की पूरी संभावना है