गरियाबंद कांग्रेस की नई कार्यकारिणी ,सुखचंद बेसरा की एक बिसात ने दशकों पुरानी ढर्रे वाली राजनीति का किया अंत ? एक सूची से साधे कई निशाने ।

Sangani

By Sangani

संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद

गरियाबंद कांग्रेस की नई कार्यकारिणी में जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा का मास्टरस्ट्रोक,पूर्व मुख्यमंत्री और उनके करीबियों की सहमति से तैयार इस सूची ने बिंद्रानवागढ़ और राजिम के सियासी समीकरण बदल दिए हैं। जानिए कैसे एक अधिकारी और महिला नेत्री की एंट्री ने उड़ाए दिग्गजों के होश।पूरी खबर पैरी टाईम्स पर ।

गरियाबंद राजनीति में कभी-कभी एक खामोश चाल भी बड़े-बड़े धुरंधरों की नींद उड़ा देती है। जिले में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने अपनी नई कार्यकारिणी की घोषणा कर कुछ ऐसा ही सियासी धमाका किया है। जो लोग अब तक बेसरा को राजनीति का कमजोर खिलाड़ी समझ रहे थे, उनकी गणना और गणित जिला कार्यकारणी की नई सूची ने पूरी तरह से फेल कर दी है। जिले की राजनीति में मचे घमासान के बीच एक बड़ी सच्चाई छनकर सामने आ रही है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने अपनी जिस नई कार्यकारिणी से दिग्गजों की नींद उड़ाई है, उसके पीछे की पटकथा सीधे राजधानी के बड़े गलियारों में लिखी गई है। सूत्रों के पुख्ता दावों की मानें तो, इस नई टीम का चयन पूर्व मुख्यमंत्री और उनके बेहद खास करीबियों की सीधी सहमति के बाद ही किया गया है।

गरियाबंद कांग्रेस की नई कार्यकारिणी

गरियाबंद कांग्रेस की नई कार्यकारिणी हाईकमान का वरदहस्त और बेसरा की ढाल

​जो लोग अब तक सुखचंद बेसरा को राजनीति का कच्चा खिलाड़ी बता रहे थे, उन्हें अब समझ आ रहा है कि इस बिसात के पीछे असली खिलाड़ी कौन है। पूर्व मुख्यमंत्री और उनके सलाहकारों की पसंद से बनी यह सूची इस बात का प्रमाण है कि गरियाबंद में अब पुराने गुटों की नहीं, बल्कि नई सोच और हाईकमान के भरोसेमंदों की चलेगी,बेसरा ने विरोधियों को खामोश करने के लिए दिल्ली और रायपुर के समीकरणों का बखूबी इस्तेमाल किया है।

बिंद्रानवागढ़ और राजिम करीबियों के फिल्टर से निकले नाम

​इस सूची में बिंद्रानवागढ़ से सरकारी नौकरी छोड़कर आए चेहरे और राजिम से एक बड़े समाज की प्रभावशाली महिला नेत्री का नाम शामिल होना, केवल संयोग नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। बिंद्रानवागढ़ यहाँ एक पूर्व अधिकारी का राजनीति में प्रवेश सीधे तौर पर पावर कॉरिडोर के दखल को दर्शाता है। राजिम यहाँ महिला शक्ति और सामाजिक समीकरणों को जिस तरह साधा गया है, उसमें पूर्व मुख्यमंत्री की टीम की माइक्रो-प्लानिंग साफ नजर आती है।

विरोध के सुर, मगर इरादे अटल

​किसी भी बड़े बदलाव के साथ विरोध का स्वर उठना लाजिमी है। सूची जारी होते ही कुछ हलकों में असंतोष भी देखा गया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विरोध उस परिवर्तन की आहट है जिसे सालों से दबा कर रखा गया था। बेसरा ने विरोध की परवाह किए बिना जिस तरह से नए सियासी समीlकरण बैठाए हैं, उसने पार्टी कार्यकर्ताओं में एक नया उत्साह भर दिया है।

पुराने ढर्रे को तोड़ने के लिए बड़े आशीर्वाद की जरूरत

​सालों से एक ही ढर्रे पर चल रही गरियाबंद कांग्रेस को हिलाने के लिए एक मजबूत इच्छाशक्ति और बड़े समर्थन की जरूरत थी। सूत्रों की माने तो बेसरा ने पूर्व मुख्यमंत्री की सहमति लेकर न केवल अपनी स्थिति मजबूत की है, बल्कि जिले के उन नेताओं को भी कड़ा संदेश दिया है जो खुद को संगठन से ऊपर समझने लगे थे। सूची जारी होने के बाद हो रहा विरोध दरअसल उसी पावर स्ट्रक्चर के टूटने की छटपटाहट है।

क्या बदलने वाला जिले का इतिहास?

​राजिम और बिंद्रानवागढ़ के ये नए चेहरे अब केवल बेसरा के नहीं, बल्कि बड़े साहब के भरोसेमंद सिपाही बनकर मैदान में उतरेंगे। आने वाले विधानसभा चुनाव में ये नए समीकरण न केवल सालों पुराने इतिहास को बदलेंगे, बल्कि गरियाबंद की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत करेंगे।

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