संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
CG में मर्यादा तार-तार गरियाबंद की उस शर्मनाक रात के बाद छत्तीसगढ़ के एक और सरकारी विश्राम गृह (Rest House) से आया बेहद आपत्तिजनक वीडियो, घने जंगलों के बीच सरकारी कमरे में आखिर क्या कर रहे थे ये लोग? इस सनसनीखेज खुलासे को देखकर आप भी दंग रह जाएंगे पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर ।
छत्तीसगढ़ गरियाबंद के उरमाल में हुए अश्लील ओपेरा डांस की गूँज अभी थमी भी नहीं थी कि प्रदेश के एक और जिले से सरकारी मर्यादा को शर्मसार करने वाली खबर सामने आ गई है, इस बार अश्लीलता का यह नंगा नाच किसी सार्वजनिक मैदान में नहीं, बल्कि वन विभाग के एक सुरक्षित विश्राम गृह (Rest House) के भीतर हुआ है।

CG में मर्यादा तार-तार सरकारी चौखट के अंदर गंदा खेल
वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता फैलाने के लिए किया जा रहा है। कुमेली वाटरफॉल के पास स्थित इस रेस्ट हाउस के सन्नाटे में आधी रात को फिल्मी गानों पर फूहड़ डांस किया गया। वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।
देखे वायरल वीडियो।
https://twitter.com/i/status/2010541526074712308
गरियाबंद में नप गए SDM और 3 पुलिस कर्मी
देवभोग के उरमाल में हुए ओपेरा कार्यक्रम में अश्लील डांस।के मामले जिला प्रशासन की किरकिरी के बाद सबसे पहले पुलिस प्रशासन ने कार्यवाही करते हुए अपने 3 कर्मियों को निलंबित कर दिया और 4 आयोजकों पर दूसरे ही दिन FIR दर्ज कर दी जिसके बाद जिला प्रशासन ने भी बवाल बढ़ता देख मैनपुर एसडीएम तुलसीदास मरकाम को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए गरियाबंद अटैच कर दिया ।
क्या प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा था यह सब ?
गरियाबंद मामले से इस घटना को जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि दोनों ही घटनाओं में मर्यादाओं को ताक पर रखा गया। लेकिन यहाँ भी मामला गंभीर है क्योंकि यह घटना एक फॉरेस्ट रेस्ट हाउस के भीतर की है, जहाँ आम आदमी की अनुमति के बिना परिंदा भी पर नहीं मार सकता। ऐसे में सवाल यह है कि
आखिर किसके इशारे पर रेस्ट हाउस के दरवाजे खुले?
वीडियो में दिख रहे रसूखदार लोग कौन हैं?
क्या गरियाबंद की तरह यहाँ भी रसूखदारों को बचाने की कोशिश होगी?
जांच की उठ रही मांग
वीडियो कुछ दिन पुराना बताया जा रहा है, लेकिन इसकी गंभीरता को देखते हुए अब उच्च स्तरीय जांच की मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सरकारी दफ्तर और विश्राम गृह ही अय्याशी के अड्डे बन जाएंगे, तो कानून का डर कहाँ बचेगा?