संपादक पैरी टाइम्स 24×7 डेस्क
गरियाबंद में आरएसएस की जन-गोष्ठी ने खोला भविष्य का ब्लूप्रिंट जानें कैसे बिना शोर मचाए यह संगठन वोट की मशीन नहीं बल्कि फ्यूचर लीडर और फौलादी चरित्र तैयार कर रहा है। पैरी टाइम्स पर पढ़िए संजय जी का वो क्रांतिकारी संबोधन जिसने समाज के सॉफ्टवेयर अपडेट की नई बहस छेड़ दी है
गरियाबंद जब दुनिया भर के संगठन सोशल मीडिया और मार्केटिंग के दम पर अपनी धाक जमाने में जुटे हैं, तब गरियाबंद की एक गोष्ठी ने उस खामोश इंजीनियरिंग का खुलासा किया है जो पिछले कई दशकों से समाज की नींव में काम कर रही है। यहाँ चर्चा किसी चुनावी बिसात की नहीं, बल्कि उस आर्किटेक्चर की थी जो पत्थर को तराशकर राष्ट्र का स्तंभ बनाने का दावा करता है।

गरियाबंद में आरएसएस प्रतिस्पर्धा के शोर में सेल्फ-अपग्रेड का बड़ा धमाका
गरियाबंद के इस संवाद कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ प्रांत के प्रांत प्रचारक संजय जी ने बड़े ही क्रांतिकारी अंदाज में एक बात साफ कर दी कि संघ की रेस किसी बाहरी खिलाड़ी से है ही नहीं। उन्होंने चुटकी लेते हुए समझाया कि असली कॉम्पिटिशन तो इंसान के अपने भीतर छिपे वायरस से है। उनका कहना था कि जब तक समाज की सबसे छोटी इकाई यानी व्यक्ति खुद को अनुशासित और चारित्रिक रूप से अपग्रेड नहीं करेगा, तब तक राष्ट्र की सुपरपावर बनने की फाइल केवल प्रोसेसिंग में ही अटकी रहेगी।
बिना हेडलाइन वाली वो वर्कशॉप जहाँ चरित्र को धार दी जाती है
संजय जी ने गोष्ठी में मौजूद प्रबुद्धजनों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि संघ केवल एक नाम नहीं बल्कि वह प्रोसेसर है जो समाज में सकारात्मकता का डेटा फीड करता है। यहाँ मुद्दा किसी को नीचा दिखाना नहीं बल्कि खुद को इतना ऊंचा उठाना था कि चुनौतियां बौनी नजर आने लगें। गरियाबंद की इस चर्चा का सार यह रहा कि असली ताकत किसी दफ्तर या कुर्सी में नहीं, बल्कि उस सामाजिक समरसता में है जो हर नागरिक के व्यवहार में झलकनी चाहिए।
नए क्षितिज और भविष्य के आयाम
गोष्ठी का निष्कर्ष बिल्कुल कड़क और सीधा था कि अगर भविष्य का भारत सशक्त चाहिए, तो आज के इंसान को सेल्फ-डिसिप्लिन के मोड पर डालना होगा, गरियाबंद से निकला यह संदेश उन लोगों के लिए एक बड़ा जवाब है जो संघ को केवल एक संगठन मानते हैं, जबकि असल में यह व्यक्ति निर्माण की वो अनंत यात्रा है जो अब नए आयामों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार है।