रक्तदान शिविर मालगांव,शस्त्र त्याग कर अब जीवन-दान के साक्षी बने आत्म-समर्पित नक्सली,भीम निषाद के रक्तदान शिविर ने रची मानवता की नई इबारत ।

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By Sangani

रक्तदान शिविर मालगांव ऐतिहासिक रक्तदान शिविर,भीम निषाद ने 28वीं बार किया रक्तदान, आत्मसमर्पित नक्सली सुनील और जानसी ने मुख्यधारा में जुड़कर बढ़ाया रक्तदाताओं का उत्साह।

गरियाबंद छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का मालगांव आज एक ऐतिहासिक और भावनात्मक बदलाव का साक्षी बना,जहाँ कभी नक्सलवाद की आहट गूँजती थी, वहां आज जीवनदान का उत्सव मनाया गया,अवसर था स्थानीय समाजसेवी और जनपद सदस्य भीम निषाद के जन्मदिन का, जिन्होंने स्वयं 28 वीं बार रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की, लेकिन इस आयोजन की सबसे बड़ी और भावुक तस्वीर तब सामने आई, जब पूर्व नक्सली लीडर सुनील और जानसी समेत 10 आत्मसमर्पित नक्सली रक्तदाताओं का हौसला बढ़ाने पहुंचे।

पूर्व नक्सली कमांडर सुनील

रक्तदान शिविर मालगांव

रक्तदान शिविर मालगांव,एक मदद ने आत्मसमर्पित नक्सली सुनील का दिल

​इस रक्तदान शिविर में सुनील की मौजूदगी के पीछे एक गहरी कहानी छिपी है। कुछ समय पूर्व, सुनील की पत्नी (जो स्वयं एक पूर्व आत्मसमर्पित नक्सली हैं) को गंभीर स्थिति में रक्त की अत्यंत आवश्यकता थी। उस कठिन समय में सुनील ने भीम निषाद से संपर्क किया। भीम निषाद ने बिना देरी किए उन्हें रक्त उपलब्ध कराया ।

​भीम निषाद के इस निस्वार्थ सेवा भाव ने सुनील के मन पर गहरा प्रभाव डाला। तब से सुनील भी भीम निषाद के साथ जुड़कर समाज में रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने और प्रेरित करने का कार्य कर रहे हैं।

मुख्यधारा की नई तस्वीर पहली बार सामाजिक सेवा के मंच पर

​गरियाबंद के इतिहास में यह संभवत पहला मौका है, जब इतनी बड़ी संख्या में पूर्व नक्सली किसी रक्तदान शिविर का हिस्सा बने,समाज की मुख्यधारा में लौटने के बाद सुनील और उनकी टीम ने रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया,पूर्व नक्सली लीडर सुनील ने भावुक होते हुए कहा

​जब मेरी पत्नी को खून की जरूरत थी, तब भीम निषाद ने हमारी मदद की। समाज की इस मुख्यधारा से जुड़कर और सेवा के इस रास्ते पर चलकर हमें बहुत सुकून मिल रहा है। भविष्य में हम भी रक्तदान करेंगे।

मालगांव जहां हर शुभ मुहूर्त पर बहती है रक्तदान की गंगा

​मालगांव को रक्तदाताओं का गांव यूं ही नहीं कहा जाता। यहाँ भीम निषाद जैसे युवा हैं जो अपने हर जन्मदिन पर शिविर लगाते हैं। इस बार भी उनके एक आह्वान पर 120 से अधिक लोगों ने रक्तदान किया, गांव की परंपरा ऐसी है कि शादी, सालगिरह या किसी भी पारिवारिक उत्सव पर लोग सामूहिक रूप से रक्तदान केंद्र पहुँचते हैं। शिविर में एक दिव्यांग युवा की उपस्थिति ने सबको प्रेरित किया, जो शारीरिक चुनौतियों के बावजूद 22 बार रक्तदान कर चुके हैं।

मानवता के रक्त-सारथी भीम निषाद

मालगांव के भीम निषाद केवल एक नाम नहीं, बल्कि गरियाबंद जिले के लिए ब्लड डोनर की एक पहचान बन चुके हैं। उनकी सेवा का आँकड़ा किसी भी संवेदनशील हृदय को झकझोरने के लिए पर्याप्त है। भीम निषाद प्रतिवर्ष औसतन 1 हजार से अधिक जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराने का महती कार्य कर रहे हैं। यदि पिछले 5 से 6 वर्षों पर दृष्टि डालें, तो वे अब तक 5 हजार से अधिक लोगों के जीवन की रक्षा के लिए रक्त की व्यवस्था कर चुके हैं।

पीढ़ियों का मार्गदर्शन

भीम की विशेषता केवल स्वयं रक्तदान करना नहीं, बल्कि एक रक्तदाता समाज का निर्माण करना है। उन्होंने मालगांव के हर घर में सेवा के बीज बोए हैं। उनके आह्वान पर गाँव के नन्हे बालक से लेकर अनुभवी बुजुर्गों तक, सभी रक्तदान को एक पुनीत कर्तव्य मानते हैं। भीम निषाद की यही प्रेरणा-शक्ति है कि आज मालगांव का बच्चा-बच्चा रक्त की कमी से जूझ रहे अपरिचितों के लिए भी तत्पर खड़ा रहता है।

महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी

​इस पुनीत कार्य में गरियाबंद की पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सहित क्षेत्र की कई गणमान्य महिलाएं और स्कूल के छात्र भी शामिल हुए। बच्चों ने भी रक्तदान शिविर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर यह संदेश दिया कि वे भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार हैं।

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