संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
जमीन गाइडलाइन वृद्धि पर हाहाकार सैकड़ों जमीन कारोबारी काले गुब्बारे और झंडे लेकर कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े प्रदर्शन हिंसक होते ही पुलिस ने चलाया लाठीचार्ज, कई घायल! जानिए, प्रदर्शन की पूरी इनसाइड स्टोरी और क्यों हुआ ये काले दिन का प्रदर्शन…
गरियाबंद छत्तीसगढ़ जमीन गाइडलाइन की दरों में अप्रत्याशित वृद्धि को लेकर दुर्ग में बवाल मच गया है। आज शहर में एक ऐतिहासिक और हिंसक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जिसमें सैकड़ों की संख्या में जमीन कारोबारी, जिन्हें अक्सर ‘जमीन के राजा’ कहा जाता है, सड़कों पर उतर आए। स्थिति तब विस्फोटक हो गई जब कलेक्ट्रेट का घेराव करने के लिए पैदल मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज कर दिया।

काला प्रदर्शन आक्रोश का सैलाब
विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। वे अपने हाथों में काला गुब्बारा और काले झंडे लिए हुए थे, जो यह दर्शाता है कि यह वृद्धि उनके कारोबार के लिए किसी काले कानून से कम नहीं है। गाइडलाइन वृद्धि वापस लो के नारों के साथ, प्रदर्शनकारियों का यह सैलाब कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रहा था।
- प्रदर्शनकारी: सैकड़ों की संख्या में जमीन कारोबारी।
- मांग: जमीन गाइडलाइन वृद्धि को वापस लेना।
- प्रतीक: काला गुब्बारा और काले झंडे – विरोध का चरम प्रतीक।

पुलिस बल का शक्तित प्रदर्शन हुई सीधी झड़प
प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया था। कलेक्ट्रेट से पहले ही प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुख्ता घेराबंदी की गई थी। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को वापस जाने की चेतावनी दी, लेकिन आक्रोशित भीड़ ने पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया।
लाठीचार्ज से मची भगदड़ दुर्ग में खूनी मंजर
सूत्रों के अनुसार, जब प्रदर्शनकारियों ने घेराबंदी तोड़ने की कोशिश की और कलेक्ट्रेट की ओर बलपूर्वक आगे बढ़ने लगे, तब पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अंतिम उपाय के तौर पर लाठीचार्ज का सहारा लिया। चश्मदीदों का कहना है कि पुलिस के ने तांडव मचा दिया हो। अफरातफरी के माहौल में भगदड़ मच गई। लाठीचार्ज में कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस ने दावा किया है कि यह कार्रवाई शांति व्यवस्था बनाए रखने।के लिए जरूरी थी, लेकिन कारोबारी इसे अलोकतांत्रिक और दमनकारी बता रहे हैं और इस कार्रवाई को खूनी लाठीचार्ज करार दे रहे हैं।
राजनीतिक तापमान चरम पर
फिलहाल, इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। इस लाठीचार्ज की घटना ने न सिर्फ जमीन कारोबारियों को नाराज किया है, बल्कि इसने स्थानीय राजनीति का तापमान भी बढ़ा दिया है। कारोबारियों ने धमकी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो वे और भी बड़े और उग्र आंदोलन के लिए तैयार हैं। सरकार के लिए यह प्रदर्शन अब केवल राजस्व का नहीं, बल्कि जनता के गुस्से को शांत करने का विषय बन गया है।
यह भी पढ़े….