संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
सिविक एक्शन प्रोग्राम गरियाबंद के पायलीखण्ड में CRPF 211 बटालियन ने सिविक एक्शन प्रोग्राम के जरिए ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और दवाइयां बांटी जानिए कैसे जवानों ने एनीमिया के खिलाफ छेड़ी जंग पूरी खबर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद जिले के पायलीखण्ड गांव में जब सीआरपीएफ 211 बटालियन के जवान पहुँचे, तो माहौल डर का नहीं बल्कि उम्मीद का था। इसे कहते हैं वक्त का बदलना जहाँ कभी नक्सलियों की धमक हुआ करती थी, वहाँ अब सिविक एक्शन कार्यक्रम के जरिए सेहत की जांच हो रही है। ग्रामीणों के स्वास्थ्य परीक्षण में जब एनीमिया (खून की कमी) की बात सामने आई, तो जवानों ने तुरंत मेडिकल स्ट्राइक करते हुए दवाइयों का वितरण किया। साथ ही, घरेलू जरूरत का सामान देकर जवानों ने उन ग्रामीणों का दिल जीत लिया, जो बरसों से विकास की मुख्यधारा से कटे हुए थे।

सिविक एक्शन प्रोग्राम बटालियन के इस सिविक एक्शन कार्यक्रम
में जब स्वास्थ्य परीक्षण शुरू हुआ, तो एक चौंकाने वाला सच सामने आया यहाँ के ग्रामीण दुश्मनों से ज्यादा खून की कमी (एनीमिया) से जूझ रहे हैं। अब जवानों ने भी आव देखा न ताव, तुरंत मेडिकल स्ट्राइक करते हुए दवाइयों का वितरण शुरू कर दिया।

सिर्फ इलाज नहीं, सौगातों की बौछार
गरियाबंद जिले के लिए अब वह दिन दूर नहीं जब इसे आधिकारिक तौर पर नक्सल मुक्त घोषित कर दिया जाएगा। हालाँकि कागजी पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिन गांवों में कभी नक्सल धमक हुआ करती थी उन गांव के लोगों की सेहत ही नहीं, जवानों ने ग्रामीणों की दिनचर्या का भी पूरा ख्याल रखा। घर-गृहस्थी और जरूरत का सामान पाकर ग्रामीणों के चेहरे ऐसे खिले, जैसे नक्सली विचारधारा पर कोई तगड़ा प्रहार हुआ हो। दरअसल, यह सीआरपीएफ का वो ‘सॉफ्ट पावर’ है, जिससे अंदरूनी इलाकों में पैठ बनाई जाती है। जवानों ने जता दिया कि वे सिर्फ लोहे की वर्दी पहनना नहीं, बल्कि दिलों को जीतना भी बखूबी जानते हैं।