राजिम विधायक रोहित साहू की गाड़ी से घायल बुजुर्ग महिला विधायक का दावा इलाज करवाया , महिला बोली नहीं मिली कोई मदद , देखे वीडियो।

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By Himanshu Sangani

हिमांशु साँगाणी

गरियाबंद लगता है कि राजिम विधायक रोहित साहू की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कुछ दिन पहले उनका “हेकड़ी निकाल दूंगा” वाला वीडियो वायरल हुआ था, और अब एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला उर्वशी पटेल निवासी डुमरपाली ने आरोप लगाया है कि विधायक की गाड़ी से टक्कर लगने के बाद भी उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। न ही विधायक खुद मिलने आए और न ही उनका कोई आदमी हालचाल पूछने पहुंचा।

हादसे की पूरी कहानी: सड़क पर तड़पती रही बुजुर्ग महिला, लेकिन विधायक अपने कार्यकर्ता को बोलकर आगे बढ़ गए!

बुधवार को जब विधायक रोहित साहू अपने दौरे पर थे, तब कोपरा के पास उनकी गाड़ी एक बुजुर्ग महिला से टकरा गई। हादसे में महिला के पैर और छाती में चोट आई। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि विधायक की गाड़ी का साइड मिरर पकड़कर खड़ी रही महिला—तब तक जब तक विधायक खुद बाहर नहीं आए। विधायक ने बाहर आकर अपने कार्यकर्ता से महिला को अस्पताल ले जाने के लिए कहा और फिर वहां से निकल गए।

बुजुर्ग महिला का आरोप: “कोई मदद नहीं मिली, अपना इलाज खुद करवा रही हूं!”

जब ‘Pairi Times 24×7′ की टीम ने महिला से बात की, तो उन्होंने कहा—
मुझे न कोई देखने आया, न ही कोई आर्थिक मदद मिली। मैं गरीब हूं, अपना इलाज खुद करवा रही हूं। अगर विधायक साहब ने मदद की होती, तो मैं आज यूं दर्द में नहीं होती।”

विधायक का दावा: “इलाज भी कराया, आर्थिक मदद भी दी!”

इस मामले को लेकर जब विधायक रोहित साहू से सवाल किया गया, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा—
महिला को मेरी गाड़ी से चोट जरूर लगी थी, लेकिन मैंने तुरंत अपने कार्यकर्ताओं को कहकर उसे स्पेशल गाड़ी करवाकर राजिम के अस्पताल में इलाज दिलवाया और आर्थिक सहयोग भी किया।”

अब बड़ा सवाल यह है कि अगर मदद दी गई थी, तो पीड़िता अब भी अपने स्तर पर इलाज क्यों करवा रही है? क्या यह महज एक बयानबाजी है या फिर गरीबों के लिए इलाज की मदद बस कागजों तक ही सीमित है?

वायरल वीडियो के बाद दूसरा विवाद, क्या जनता के लिए जवाबदेह होंगे विधायक?

कुछ दिन पहले विधायक रोहित साहू का “हेकड़ी निकाल दूंगा” वाला वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था, जिसमें वह एक व्यक्ति को धमकाते नजर आ रहे थे। अब यह नया विवाद सामने आ गया है।

नेताओं की संवेदनहीनता पर सवाल

क्या जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव के समय जनता के हमदर्द होते हैं?

अगर विधायक खुद जाकर महिला का हालचाल लेते, तो क्या यह मुद्दा इतना बड़ा बनता?

क्या जनता को नेताओं से सहानुभूति की उम्मीद करना छोड़ देना चाहिए?

अब प्रशासन क्या करेगा?

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या विधायक साहब अपनी गलती सुधारेंगे या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

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