गरियाबंद खनिज विभाग का देवभोग पलायन,रसूखदार रेत माफिया पर मेहरबानी और गिट्टी की गाड़ियों पर रौब का अनोखा खेल, जानिए चौबेबांधा,बकली और नागझर रेत खदान का पूरा सच पैरी टाईम्स पर ।
गरियाबंद जिले में खनिज विभाग ने आपदा को अवसर में बदलने की एक नई कला ईजाद कर ली है। जब जिले की चौबेबांधा, बकली और नागझर जैसी बड़ी रेत खदानों में माफिया दिन-रात नदियों का सीना छलनी कर रहे हों, तो अपनी खाल बचाने का सबसे आसान तरीका क्या है? जवाब है- उस तरफ मुंह कर लो जहां कोई बड़ा माफिया या रसूखदार न हो! जी हां, गरियाबंद का खनिज अमला इन दिनों देवभोग पलायन पर है। देवभोग वह इलाका है जहां कोई बड़ी रेत खदान या संगठित अवैध उत्खनन का नामोनिशान तक नहीं है। लेकिन साहब लोगों को अपनी हाजिरी जो लगानी है, तो वह वहां जाकर बिना रॉयल्टी वाली गिट्टी की गाड़ियों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। इसे विभाग की चतुराई कहें या रसूखदारों के आगे घुटने टेकना, सच यह है कि जहां सचमुच नदियों को बचाने की जरूरत है वहां सन्नाटा पसरा हुआ है।
फाइल फोटो

गरियाबंद खनिज विभाग का देवभोग पलायन कागजी कोरम पूरा करने का नायाब नुस्खा
देवभोग में गिट्टी ढोने वाले छोटे-मोटे वाहनों पर डंडा चलाकर विभाग अपनी फाइलों में कार्रवाई का कोरम पूरा कर रहा है। इससे ऊपर बैठे आकाओं को यह दिखाने में आसानी होती है कि अमला मैदानी स्तर पर कितना सक्रिय है। यह पूरी कसरत सिर्फ इसलिए की जा रही है ताकि चौबेबांधा, बकली और नागझर के बड़े खिलाड़ियों को कोई परेशानी न हो। नदियों के जलस्तर का गिरना और किनारों का कटना साफ गवाही दे रहा है कि हम आने वाली पीढ़ी का भविष्य माफियाओं की तिजोरियों में बंद कर रहे हैं। इस प्राकृतिक और मानवीय त्रासदी की सबसे बड़ी जड़ विभाग के भीतर ही छिपे वो भेदिए हैं, जो किसी भी ईमानदार जांच की कोशिश को पलीता लगा देते हैं।
नागझर में आंख-मिचौली का लाइव ड्रामा
इस पूरे ड्रामे की पोल नागझर खदान में खुल जाती है। बीते दिन जब भारी दबाव के बाद टीम वहां पहुंची, तो उन्हें केवल एक लावारिस चैन माउंटेन मशीन हाथ लगी। विभागीय अधिकारियों की गाड़ी के पहिए दफ्तर लौटने के लिए घूमे ही थे कि पीछे से खदान में फिर से मशीनों की चीख और अवैध लोडिंग का खेल शुरू हो गया, माफिया व्हाट्सएप पर लाइव अपडेट दे रहे हैं और सरकारी अमला देवभोग में गिट्टी नाप रहा है। सरकारी गाड़ी का हॉर्न बजने से पहले ही माफियाओं के मोबाइल घनघना उठते हैं और जब तक अमला मौके पर पहुंचता है, वहां केवल उड़ती हुई धूल और बिखरी रेत के सिवा कुछ नहीं मिलता। यह सूचनाओं का लीक होना सीधे तौर पर सरकारी तंत्र और नदियों के अस्तित्व के साथ बड़ा खिलवाड़ है। जब तक प्रशासन अपने घर के भेदियों पर नकेल नहीं कसेगा, तब तक गरियाबंद की नदियां यूं ही सिसकती रहेंगी और कागजों पर देवभोग जैसी आसान कार्रवाइयां चमकती रहेंगी।
खनिज मौन तो राजस्व ने की आंखे बंद
नदियों के सीने पर चल रही इस लूट में केवल खनिज अमला ही मौन व्रत धारण किए नहीं बैठा है, बल्कि राजिम का राजस्व विभाग भी इस बहती गंगा में हाथ धोने या फिर आंखें मूंदने में पीछे नहीं है। कायदे से जहां अवैध उत्खनन हो रहा है वहां राजस्व अमले को भी संयुक्त रूप से डंडा चलाना चाहिए, लेकिन राजिम राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इस पूरे मामले में धृतराष्ट्र बने बैठे हैं। चौबेबांधा, बकली और नागझर की खदानों से रोजाना सैकड़ों गाड़ियां बिना किसी खौफ के निकल रही हैं, लेकिन मजाल है कि राजस्व विभाग की नींद टूटे और वे माफियाओं पर कोई एक्शन लें। जब दोनों जिम्मेदार विभाग ही हाथ पर हाथ धरे बैठ जाएं, तो माफियाओं के हौसले बुलंद होना लाजिमी है।