संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
गरियाबंद में नया तालाब से अवैध मुरूम खनन का मामला। तहसीलदार चितेश देवांगन ने कार्रवाई की चेतावनी दी है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
गरियाबंद: जिले में इन दिनों विकास की ऐसी अनोखी गंगा बह रही है कि सरकारी खजाना और नियम-कायदे सब ‘नया तालाब’ की गहराई में गोते लगा रहे हैं। नेशनल हाईवे 130C का निर्माण जारी है और इसके लिए मुरूम की व्यवस्था गरियाबंद के नया तालाब से की जा रही है। मजेदार बात यह है कि यहां रॉयल्टी का चक्कर नहीं बल्कि ‘नगर पालिका की ममता’ का लंगर चल रहा है।

रॉयल्टी को ठेंगा, ठेकेदार की मौज
रायपुर के मुख्य ठेकेदार ने गरियाबंद के पेटी कांट्रेक्टर (जेके कंस्ट्रक्शन) को काम क्या सौंपा, मानो उसे तालाब खोदकर मुरूम बेचने का ‘लाइसेंस टू किल’ मिल गया। नगर पालिका का तर्क सुनकर तो बड़े-बड़े विशेषज्ञ भी अपना सिर पकड़ लें। पालिका का कहना है कि उनके पास तालाब गहरा करने के लिए फंड नहीं है इसलिए ठेकेदार को मुफ्त में मुरूम ले जाने की छूट दी गई है। अब सवाल यह है कि जब ठेकेदार को हाईवे विभाग से मुरूम का पैसा मिलना ही है तो नगर पालिका अपनी संपत्ति मुफ्त में क्यों लुटा रही है?
तहसीलदार की समझाइश का तड़का
इस पूरे मामले पर जब हंगामा बढ़ा तो प्रशासन हरकत में आया। गरियाबंद तहसीलदार चितेश देवांगन ने इस मामले में बेहद ‘सुलझा’ हुआ बयान दिया है। उन्होंने कहा कि खनन करने वालों को समझाइश दे दी गई है और अगर वे नहीं मानते हैं तो जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।
पुराना खिलाड़ी, वही पुराना खेल
सूत्रों का दावा है कि यह पेटी कांट्रेक्टर पुराना अनुभवी है। पहले भी गहरीकरण के नाम पर इसी तालाब से मुरूम निकालकर बाजार में बेची गई थी। तब भी नगर पालिका को एक रुपये का लाभ नहीं हुआ और आज भी इतिहास खुद को दोहरा रहा है। अगर यही मुरूम शहर के सार्वजनिक विकास कार्यों में लगती तो शायद जनता का कुछ भला होता पर यहाँ तो भला सिर्फ ठेकेदार की बैलेंस शीट का हो रहा है।