हिमांशु साँगाणी
गरियाबंद छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी ब्लॉक में शिक्षा की परीक्षा नहीं, “सेटिंग” की परीक्षा चल रही है। 23 मार्च को डीएलएड (D.El.Ed) की प्रायोगिक परीक्षा के दौरान जो कुछ हुआ, उसने शिक्षा व्यवस्था की असल तस्वीर सीसीटीवी कैमरे में उतार दी।

शिक्षक की हरकत गुरुदक्षिणा या नकल शुल्क ?
DIET नगरी के परीक्षा कक्ष में छात्र-छात्राएं खुलेआम मोबाइल और गाइड से नकल करते नजर आ रहे हैं, मानो ये कोई ओपन बुक एग्जाम हो। और यही नहीं, सीसीटीवी में एक शिक्षक छात्रों से पैसे लेते भी साफ दिखाई दे रहे हैं — अब इसे आप “गुरुदक्षिणा” कहें या “नकल शुल्क“, ये आपकी समझ पर निर्भर करता है।
वीडियो वायरल होते ही शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठने लगे सवाल
वीडियो जैसे ही वायरल हुआ, सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। लेकिन अफसरों का वही पुराना रटा-रटाया जवाब आया – “मामले की जांच की जा रही है।” यानी तब तक सब चुप, सिस्टम फिर से एक्टिव — अगली परीक्षा तक।
क्या अब DIET का नाम बदलकर DPT (District Paper-Twisting Institute) कर देना चाहिए?
क्या छात्रों की मेहनत से ज्यादा असरदार हो गया है “पेमेंट प्लान”?
कार्यवाही होगी या फिर ….यह घटना भी जांच की आड़ में दबा दी जाएगी ।
व्यंग्य अपनी जगह, लेकिन सवाल गंभीर हैं – क्या इस प्रकार की घटनाएं शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों की छवि को नुकसान नहीं पहुंचा रहीं? और क्या ये नकल केवल अंकों तक सीमित रहेगी, या आने वाले कल में हमारी पूरी व्यवस्था की छवि बन जाएगी?
देखे और भी खबरें…..प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण सर्वे 2025