संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
गरियाबंद कोर्ट का फैसला 7 साल की मासूम से दुष्कर्म के आरोपी विश्राम निषाद को शेष प्राकृतिक जीवन काल तक के लिए जेल भेज दिया है। पढ़ें ऐतिहासिक फैसले की पूरी रिपोर्ट पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद समाज में कुछ लोग उम्रदराज होने का मतलब अनुभव और संस्कार समझते हैं, लेकिन फिंगेश्वर के 50 वर्षीय विश्राम निषाद ने साबित कर दिया कि दरिंदगी का उम्र से कोई लेना-देना नहीं होता। हालांकि, गरियाबंद के अपर सत्र न्यायाधीश यशवंत वासनीकर ने भी यह साफ कर दिया कि जब पाप का घड़ा भरता है, तो न्याय की लाठी बिना आवाज के ऐसी पड़ती है कि फिर पूरी जिंदगी सलाखों को गिनने में ही बीतती है।

गरियाबंद कोर्ट का फैसला अंधेरे खेत की वो खौफनाक शाम और न्याय की मशाल
घटना उस वक्त की है जब दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली एक 7 साल 11 माह की मासूम बच्ची को अकेला पाकर इस ‘सभ्य’ समाज के कलंक विश्राम निषाद ने उसे सुनसान खेत में ले जाकर अपनी हवस का शिकार बनाया। शायद आरोपी को लगा होगा कि सुनसान इलाका और मासूम की खामोशी उसे बचा लेगी, लेकिन उसे क्या पता था कि विवेचना अधिकारी सुश्री निशा सिन्हा और निरीक्षक नवीन राजपूत की पैनी नजरें और विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी की दलीलें उसकी आजादी के सूरज को हमेशा के लिए ढालने की तैयारी कर रही हैं।
न्यायालय का प्रहार अब जेल ही स्थायी पता
न्यायालय ने इस मामले को केवल एक अपराध नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ युद्ध माना। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश 12 गवाहों की गवाही ने आरोपी के झूठ के किलों को ढहा दिया। न्यायाधीश यशवंत वासनीकर ने पॉक्सो एक्ट की धारा-6 और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत आरोपी को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
कठोर से कठोरतम सजा सुनाई गई
यह सजा कोई मामूली नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कारावास शेष प्राकृतिक जीवन काल के लिए होगा। यानी अब विश्राम निषाद को बाहर की दुनिया देखने के लिए अगले जन्म का इंतजार करना होगा, 2 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है, जो शायद उस घिनौने कृत्य की कीमत तो नहीं, पर कानून की मुहर जरूर है।
समाज के लिए एक कड़ा सबक
यह फैसला उन लोगों के मुंह पर तमाचा है जो सोचते हैं कि मासूमों की चीखें दब जाएंगी,गरियाबंद पुलिस और न्यायपालिका की यह जुगलबंदी बताती है कि अगर तंत्र ठान ले, तो दरिंदों का ठिकाना सिर्फ और सिर्फ जेल की कालकोठरी ही होगी। सकारात्मक बात यह है कि आज एक माँ को सुकून मिला होगा कि उसकी बच्ची का अपराधी अब कभी किसी और मासूम की तरफ नजर उठाने लायक नहीं रहा।
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