हिमांशु साँगाणी
गरियाबंद। घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में प्रशासन की पहुंच अक्सर मुश्किल होती है, लेकिन गरियाबंद पुलिस अधीक्षक निलिख राखेचा अपनी टीम के साथ खुद छोटे गोबरा और नवागांव (पथराझोरकी) पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर न सिर्फ उनकी समस्याएं सुनीं, बल्कि समाधान का भरोसा भी दिया।
ग्रामीणों ने बिजली, पानी, स्कूल, भवन जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी पर खुलकर अपनी बात रखी। इस पर SP राखेचा ने संबंधित विभागों से बात कर जल्द से जल्द समाधान कराने का आश्वासन दिया।

नक्सलियों को आत्मसमर्पण का संदेश!
इस सिविक एक्शन कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक ने नक्सल प्रभावित ग्रामीणों को सरकार की आत्मसमर्पण नीति के बारे में भी बताया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि—
“जो नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सरकार की आत्मसमर्पण नीति बड़ा अवसर है। इससे वे अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन बिता सकते हैं।”
उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को—
✔ स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण
✔ निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा
✔ सरकारी आवास और नौकरी
✔ अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ
मिल सकता है।

ग्रामीणों के बीच पुलिस, एक नया विश्वास!
SP राखेचा और उनकी टीम ने इस दौरान ग्रामीणों को दैनिक उपयोग की सामग्री भी वितरित की। ग्रामीण अपने बीच पुलिस अधीक्षक को पाकर बेहद खुश नजर आए। कार्यक्रम के अंत में शासन की योजनाओं और आत्मसमर्पण नीति के पर्चे (Pamphlet) भी बांटे गए ताकि लोग अधिक से अधिक जानकारी ले सकें।
SP राखेचा ने कहा कि—
“हमारा उद्देश्य सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि सुदूर अंचलों तक शासन की योजनाएं पहुंचाना भी है, ताकि कोई भी व्यक्ति मूलभूत सुविधाओं से वंचित न रहे।”
अब देखना यह होगा कि इस दौरे के बाद प्रशासन कितनी जल्दी ग्रामीणों की समस्याओं का हल निकालता है और क्या यह पहल नक्सलियों के आत्मसमर्पण की दिशा में भी कोई बड़ा बदलाव ला पाएगी?