गरियाबंद का आत्मानंद बना विवादों का अखाड़ा मैडम की वापसी पर छात्रों का पैदल मार्च, कमीशन-खोरी और प्रताड़ना के बीच छिड़ा महाभारत ।

Sangani

By Sangani

संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद

गरियाबंद आत्मानंद स्कूल में प्राचार्या वंदना पांडेय के खिलाफ छात्रों और शिक्षकों ने खोला मोर्चा,कमीशनखोरी और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों के बीच कलेक्ट्रेट का घेराव। पढ़ें पूरी खबर।

गरियाबंद गरियाबंद का पीएम श्री स्वामी आत्मानंद स्कूल इन दिनों पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि प्रोफेशनल कुश्ती और साजिशों के सस्पेंस के लिए चर्चा में है। मामला तब और गरमा गया जब निलंबित प्राचार्या वंदना पांडेय की घर वापसी हुई। तो स्कूल के गुरुजी से लेकर नौनिहालों तक ने कलेक्ट्रेट की ओर दौड़ लगा दी।

इंटर्नशिप के पैसों पर कट-मनी का खेल?

​छात्रों का आरोप है कि शिक्षा के मंदिर में अब चढ़ावा भी मांगा जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इंटर्नशिप के जो 11 सौ रुपये उनके खाते में आते हैं, उसमें से पांडे मैडम को 20 सौ रुपये का कमीशन चाहिए,इसके पहले भी बच्चों से पैसे मांगने की शिकायत हो चुकी है एडमिशन के वक्त पैसे मांगने के आरोप और अब ये, छात्र पूछ रहे हैं मैडम, ये स्कूल है या कोई वसूली केंद्र?

रील, वीडियो और साजिश की सतरंगी दुनिया

​स्कूल में केवल पढ़ाई नहीं हो रही, बल्कि आईटी सेल वाला दिमाग भी चल रहा है। शिक्षिकाओं का आरोप है कि उनके निजी वीडियो (पति के स्वागत वाली रील) को सोशल मीडिया पर वायरल कर उनकी छवि धूमिल की जा रही है। शिक्षिकाओं का कहना है कि यह तत्कालीन प्राचार्या के खिलाफ मोर्चा खोलने का रिटर्न गिफ्ट है। अब रील और मर्यादा के बीच गरियाबंद की शिक्षा व्यवस्था उलझ कर रह गई है।

जब तक मैडम नहीं हटेंगी, हम कलेक्ट्रेट नहीं छोड़ेंगे’

​कड़कड़ाती धूप और बीईओ (BEO) की तमाम कोशिशों को दरकिनार कर सैकड़ों छात्र 2 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट जा पहुंचे। शिक्षकों ने तो सामूहिक इस्तीफे की धमकी तक दे डाली है। आलम यह है कि 28 शिक्षक एक तरफ और बहाली पाकर लौटी प्राचार्या दूसरी तरफ। प्रशासन फिलहाल मूकदर्शक बना इस ‘गुटबाजी के अखाड़े’ को देख रहा है।

प्रशासनिक आदेश के विकल्प को मैडम की जिद ने बनाया विवाद की जड़ डीईओ की चुप्पी पर उठे सवाल

गरियाबंद के आत्मानंद स्कूल में विवाद की मुख्य वजह प्रशासनिक आदेशों की व्याख्या और मैडम की जिद का संगम है, जहां 17 अक्टूबर 2025 को अनुशासनहीनता और लापरवाही के चलते निलंबित हुईं वंदना पांडेय को 29 जनवरी 2026 को शासन द्वारा बहाल तो किया गया, लेकिन आदेश में स्पष्ट रूप से उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी के विकल्प पर पदस्थ करने की शर्त रखी गई थी। इस आदेश का सीधा आशय यह था कि विवादों से बचने के लिए डीईओ उन्हें जिले के किसी भी अन्य स्कूल में भेज सकते थे, परंतु मैडम की उसी स्कूल में लौटने की हठ और प्रशासनिक मेहरबानी के चलते उन्हें दोबारा वहीं ज्वाइन कराया गया। यही कारण है कि आज स्कूल का माहौल पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है, जहाँ शिक्षक चरित्र हनन के आरोपों से जूझ रहे हैं और छात्र अपनी पढ़ाई को दांव पर लगाकर मैडम को हटाने की मांग के साथ कलेक्ट्रेट की सड़कों पर मोर्चा खोले बैठे हैं।

सुलगता सवाल

क्या गरियाबंद प्रशासन किसी बड़े हादसे या सामूहिक इस्तीफे का इंतजार कर रहा है? प्रशासन की चुप्पी पर सवाल ​हैरानी की बात यह है कि स्कूल के सभी 28 शिक्षकों के सामूहिक विरोध और छात्रों के सड़क पर उतरने के बावजूद, विभाग ने इस प्रतिशोध की राजनीति पर लगाम नहीं लगाई है। रील वायरल करने के पीछे के मास्टरमाइंड की जांच करने के बजाय मामला ठंडे बस्ते में नजर आ रहा है।

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