गरियाबंद में ‘लाल आतंक’ का अंत! कलेक्टर भगवान सिंह उइके और एसपी वेदव्रत सिरमौर ने 17 आत्म-समर्पित नक्सलियों को 50-50 हजार की सहायता राशि के चेक सौंपे। अब तक 29 नक्सली मुख्यधारा में लौटे, शासन की पुनर्वास नीति से मिल रही शिक्षा और ट्रेनिंग। पूरी खबर पढ़ें।
गरियाबंद बस्तर के बाद अब गरियाबंद जिले में भी लाल आतंक की कमर टूटती नजर आ रही है। कभी हाथों में बंदूक थामकर जंगलों की खाक छानने वाले नक्सलियों के हाथों में अब विकास की चाबी और आर्थिक मजबूती के चेक नजर आ रहे हैं। जिला प्रशासन और पुलिस की ‘पुनर्वास नीति’ का असर ऐसा हुआ कि गरियाबंद में अब तक कुल 29 नक्सलियों ने आतंक का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में कदम रख दिया है।

17 पूर्व नक्सलियों के चेहरे पर खिली मुस्कान, कुल 29 हुए लाभान्वित
शनिवार को गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उइके और पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने समर्पण करने वाले 17 पूर्व नक्सलियों को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक सौंपे। प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य इन युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर एक बेहतर भविष्य देना है। बता दें कि इससे पहले भी 12 नक्सलियों को सहायता राशि दी जा चुकी है, जिससे अब तक कुल 29 आत्म-समर्पित नक्सली लाभान्वित हो चुके हैं।
शिक्षा और हुनर से बदल रही है जिंदगी: सिर्फ पैसा ही नहीं, मिल रही है ट्रेनिंग
दिलचस्प बात यह है कि ये पूर्व नक्सली सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं हैं। पुनर्वास नीति के तहत गरियाबंद प्रशासन इन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष ट्रेनिंग दे रहा है। इनमें से कुछ युवा अब शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, तो कुछ अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य सीखकर समाज का उपयोगी हिस्सा बन रहे हैं।
प्रशासन का संदेश हिंसा छोड़ें, विकास की राह चुनें
चेक वितरण के दौरान कलेक्टर और एसपी ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार की मंशा हर भटकते हुए युवा को सही राह पर लाना है। पुलिस प्रशासन की इस मानवीय पहल ने यह साबित कर दिया है कि हिंसा के रास्ते में सिर्फ विनाश है, जबकि समर्पण और शांति के मार्ग में विकास की असीम संभावनाएं हैं।