संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
गरियाबंद का मेगा कायाकल्प कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने 4 घंटे का मैराथन निरीक्षण कर अवैध कब्जों पर मेगा एक्शन के निर्देश, बस स्टैंड की सफाई से लेकर टैक्सी स्टैंड शिफ्टिंग तक, जानें कैसे बदलेगी शहर की सूरत,विकास की इस राह में रोड़ा अटकाने वाले सोशल मीडिया के कुछ एक्टिव स्टार्स भी जल्द होंगे सक्रिय पढ़ें पूरी रिपोर्ट और कलेक्टर की जनता से खास अपील पैरी टाईम्स पर ।
गरियाबंद कहते हैं कि सरकारी तंत्र में फाइलें कछुए की चाल से चलती हैं, लेकिन जब कप्तान खुद मैदान में उतर जाए, तो वही तंत्र खरगोश बनकर दौड़ने लगता है, गरियाबंद जिला मुख्यालय में शनिवार की सुबह कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। जब कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने ऑफिस की ठंडी हवा को छोड़कर गरियाबंद की तपती सड़कों पर मैराथन निरीक्षण कर यह साबित कर दिया कि अब शहर की कुंडली बदलने वाली है।
आमतौर पर कलेक्टरों को वीआईपी गाड़ियों के काले शीशों के पीछे से शहर देखते पाया जाता है, लेकिन भगवान सिंह उइके ने 4 से 5 घंटे तक पैदल चलकर गरियाबंद का जो पोस्टमार्टम किया है, उसने नगर पालिका से लेकर राजस्व विभाग तक के पसीने छुड़ा दिए हैं।

गरियाबंद का मेगा कायाकल्प,अब बसें खड़ी होंगी या दुकान ?
गरियाबंद बस स्टैंड की हालत ऐसी है कि वहाँ बसें कम और अवैध कब्जे ज्यादा नजर आते थे। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पाया कि कुछ रसूखदारों ने अपनी दुकानों को रबर की तरह खींचकर आगे बढ़ा लिया है। कलेक्टर ने साफ शब्दों में कह दिया है । ये दुकान है या साम्राज्य?
तत्काल प्रभाव से अवैध कब्जे हटाने के लिए नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इतना ही नहीं, बस स्टैंड पर लगा वह ऐतिहासिक वॉटर प्लांट, जो उद्घाटन के बाद से ही प्यासा खड़ा था, उसे भी हटाने का हुक्म हो गया है। प्रशासन अब बस स्टैंड को सिर्फ बस स्टैंड बनाने की जिद पर अड़ा है।

पालिका भी एक्शन में गायत्री मंदिर के सामने टैक्सी का नया ठिकाना
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था ऐसी है कि पैदल चलने वाले को भी ट्रैफिक जाम का सर्टिफिकेट मिल जाए। इस अव्यवस्था को सुचारू करने के लिए कलेक्टर ने मैगा फैसला लेते हुए टैक्सी स्टैंड को गायत्री मंदिर के सामने वाले मैदान में शिफ्ट करने का निर्देश दिया है। अब शहर के बीचों-बीच होने वाली चिक-चिक कम होगी और गायत्री मंदिर का शांत इलाका टैक्सियों के हॉर्न से गूंजता नजर आएगा। नगर पालिका के द्वारा सभी अवैध कब्जाधारियों को आज से तत्काल नोटिस देना शुरू कर दिया गया है ।

सब्जी बाजार की शिफ्टिंग और भारी वाहनों पर नो एंट्री
सब्जी बाजार की भीड़ और गरियाबंद की पतली सड़कें, ये एक-दूसरे के जानी दुश्मन रहे हैं। कलेक्टर साहब ने अब सब्जी बाजार को भी नए ठिकानों पर भेजने की तैयारी कर ली है। इसके साथ ही, छुरा मार्ग पर दिन के उजाले में दैत्याकार भारी वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया गया है। यानी अब आम आदमी को सड़क पार करने के लिए किसी सुपरपावर की जरूरत नहीं पड़ेगी।

छीन तालाब में शुरू हुआ तत्काल ट्रीटमेंट
छीन तालाब के पास के अंधे मोड़ पर उगी घास और झाड़ियाँ एक्सीडेंट को न्योता दे रही थीं। लेकिन कलेक्टर की पैनी नजर से ये घास भी नहीं बच पाई। नगर पालिका और वन विभाग को आदेश मिलते ही कुल्हाड़ियाँ चलने लगीं और मोड़ क्लियर होने लगा। कलेक्टर ने इस तालाब के सौंदर्यीकरण और नई सड़क निर्माण का भी मेगा प्लान तैयार किया है। जल्द ही यहाँ सेल्फी पॉइंट और घूमने की जगहें नजर आ सकती हैं।

पैदल मार्च और अफसरों की सांसें फूलती रहीं
इस निरीक्षण की सबसे रोचक बात यह रही कि कलेक्टर भगवान सिंह उइके लगभग 3 से 4 किलोमीटर तक पैदल चले। उनके पीछे-पीछे राजस्व और नगर पालिका की टीम भी अपनी फाइलें दबाए मैराथन दौड़ लगाती रही। पहली बार गरियाबंद ने देखा कि एसी कमरों में बैठने वाले बाबू और अफसर धूल फांकते हुए शहर की नालियों और मोड़ों का हिसाब दे रहे थे।

अब 5 साल वाले सूरमा मोबाइल पर दिखाएंगे दम
गरियाबंद को समस्या जगह या विकास की नहीं गरियाबंद को अब चुनौती उन डिजिटल दिग्गजों से है, जो प्रशासन की इस गंभीरता को राजनीति के चश्मे से देखेंगे, और सब काम छोड़कर सोशल मीडिया में तत्काल इसका विरोध करना शुरू करेंगे , गरियाबंद की जनता अब इन चेहरों को पहचानती है, जो अपने कार्यकाल में 5 साल विकास के समय तो गायब रहते हुए बैंकॉक और पटाया जैसे शहरों का निरीक्षण करते रह गए और लेकिन गरियाबंद के विकास के समय सिंपैथी बटोरने के लिए सोशल मीडिया पर मैराथन कमेंट बाजी शुरू कर देते हैं।

कलेक्टर की गरियाबंद वासियों से अपील शहर आपका है, फैसला भी आपको करना है ?
इस पूरे मामले पर कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने गरियाबंद की जनता के सामने एक आईना रखा है। उन्होंने दो-टूक शब्दों में अपील की है कि अगर आप अपने शहर की सीरत और सूरत बदलना चाहते हैं, तो प्रशासन का साथ दें। विकास के लिए कुछ कड़े निर्णय लेने ही पड़ेंगे। हर विकसित होता शहर इस दौर से गुजरता है कलेक्टर ने साफ कर दिया है कि गरियाबंद के लोग ही तय करेंगे कि उन्हें एक व्यवस्थित जिला मुख्यालय चाहिए या फिर वही पुराना ढर्रा, जहाँ अवैध कब्जों का बोलबाला हो। उन्होंने जनता से इस मेगा बदलाव में सहयोग की उम्मीद जताई है।
जनता की उम्मीदें और भविष्य का गरियाबंद
जिला बनने के बाद पहली बार किसी कलेक्टर ने जिला मुख्यालय के विकास को इतनी गंभीरता से लिया है। नगर पालिका अध्यक्ष रिखी राम यादव और अन्य लोग इस मेगा निरीक्षण की सराहना कर रहे हैं। हालांकि, सवाल वही पुराना है क्या ये निर्देश कागजों से निकलकर जमीन पर उतरेंगे? या फिर कलेक्टर साहब के जाते ही अतिक्रमणकारी फिर से अपनी सरहदें बढ़ा लेंगे?
फिलहाल, गरियाबंद की जनता को उम्मीद है कि इस मैराथन प्रयास से शहर का चेहरा जरूर चमकेगा। अगर इसी तरह हर महीने एक पैदल मार्च हो जाए, तो गरियाबंद को पेरिस बनने से कोई नहीं रोक सकता ।