संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग छत्तीसगढ़ की 16 KM तस्करी रोड देखिए अमलीपदर में धान तस्करों ने JCB से जंगल के बीच बना दी एक्सप्रेस-वे, 18 बार नाला पार जानिए कैसे वन विभाग की निगरानी में फेल हुई और तस्करों ने जुगाड़ से करोड़ों का अवैध कारोबार खड़ा किया।
गरियाबंद छत्तीसगढ़ वाह रे छत्तीसगढ़ जहां सरकारें सड़कों पर गड्ढे भरने में सालों लगा देती हैं वहीं हमारे धान तस्करों ने गरियाबंद के अमलीपदर इलाके में जंगल के बीचों-बीच मात्र 6-7 दिनों में JCB चलाकर 16 किलोमीटर की हाईवे तैयार कर दी है वो भी कोई मामूली सड़क नहीं बल्कि एक ऐसी सिंगल ट्रैक एक्सप्रेस-वे जिस पर अवैध धान से लदे ट्रैक्टर और पिकअप धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं और सबसे मज़ेदार बात इस रास्ते में एक ही नाले को अदद्वारा नाले के नाम से 18 बार पार करना पड़ता है इसे कहते हैं भारतीय जुगाड़ का अंतरराष्ट्रीय संस्करण

छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग PMGSY को टक्कर देते तस्कर ग्राम सड़क योजना
अक्सर हम सरकार के आधारभूत संरचना Infrastructure के विकास की बातें करते हैं लेकिन अब हमें मानना पड़ेगा कि असली विकास पुरुष तो हमारे गरियाबंद जिले बिचौलिए कोचिए भाई लोग हैं इन्होंने तो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को भी पीछे छोड़ दिया है सोचिए जहां सरकारी योजनाओं को अनुमति निविदा ठेकेदार लागत आकलन और पर्यावरण मंजूरी जैसे अड़ंगों से गुजरना पड़ता है वहीं हमारे तस्करों ने बिना परमिट बिना टेंडर और बिना किसी लालफीताशाही के एक हफ्ते में ही जंगल के सीने पर सड़क खोद डाली इसे अगर तस्कर ग्राम सड़क योजना नाम दे दिया जाए तो शायद ही किसी को आपत्ति होगी
पहले यह रास्ता इतना संकरा था कि केवल बाइक ही चल पाती थी अब इस नवीनतम तकनीकी सड़क पर रात के अंधेरे में लगभग 50 गाड़ियाँ ओडिशा से पवित्र धान लेकर छत्तीसगढ़ में पुण्य कमाने आ रही हैं दिन में डबरी गांव में धान डंप होता है और रात में वितरण का काम शुरू क्या गजब का लॉजिस्टिक मैनेजमेंट है
वन विभाग की गहरी निद्रा और स्थानीय प्रशासन का मूक-दर्शन
अब बात करते हैं हमारे वन विभाग की अरे भाई आपकी तो जय हो इतना विशाल जंगल उसके बीच 16 किलोमीटर लंबी सड़क बन गई जेसीबी की आवाज गूंजी दर्जनों गाड़ियाँ दिन-रात दौड़ती रहीं और आप सुसुप्तावस्था में रहे क्या वन विभाग के कर्मचारी सिर्फ वन में सेल्फी लेने और सांप पकड़ने के लिए हैं या फिर उन्होंने भी सोचा होगा कि चलो कोई तो विकास कर रहा है भले ही वह अवैध विकास क्यों न हो यह तो ऐसा लग रहा है जैसे वन विभाग ने तस्करों को ग्रीन सिग्नल हरा संकेत दे दिया हो जाओ बेटा जंगल तुम्हारा सड़क तुम्हारी
और हमारे स्थानीय प्रशासन की बात करें तो अमलीपदर के तहसीलदार सुशील कुमार भोई साहब ने बड़ी ईमानदारी से कहा है कि तस्कर लगातार रणनीति बदल रहे हैं सर रणनीति तो बदल ही रहे हैं उन्होंने तो सड़क ही बदल दी और आप अभी भी नई रणनीति बनाने की तैयारी कर रहे हैं तब तक तो ये तस्कर धान बेचकर विला खरीद चुके होंगे
प्रशासन की पिच रिपोर्ट और आउट ऑफ फॉर्म खिलाड़ी
प्रशासन ने 1255 क्विंटल धान 28 चार पहिया वाहन और 4 लावारिश वाहन जब्त किए हैं यह ठीक वैसा ही है जैसे क्रिकेट मैच में एक टीम 500 रन बना दे और दूसरी टीम कहे कि हमने तो 50 रन बचा लिए ये तो छिटपुट कार्रवाई है जबकि असली प्लेयर तो 16 किलोमीटर की सड़क बनाकर करोड़ों का खेल कर रहे हैं
यह एक केस स्टडी है जो हमें बताती है कि अगर इरादे नेक न हों तो जुगाड़ कितना खतरनाक हो सकता है यह व्यंगात्मक इसलिए है क्योंकि यह हमारी प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलता है जहां छोटी-मोटी चोरी तो पकड़ी जाती है लेकिन जब कोई बड़े दिमाग वाला आदमी सड़क ही बना दे तो फिर सब सलाम ठोकते नजर आते हैं
तो बस अगली बार जब कोई कहे कि भारत में कुछ नहीं बदलता तो उसे अमलीपदर की 16 किलोमीटर लंबी तस्करी रोड की कहानी सुना देना शायद उन्हें पता चले कि बदलाव कैसे आता है भले ही वह अवैध ही क्यों न हो
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