संपादक पैरी टाइम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
नक्सली आत्मसमर्पण महासमुंद में खूंखार माओवादी सुदर्शन सहित 15 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण,गृहमंत्री को पत्र लिखकर मांगी थी मुख्यधारा,पढ़िए आधी रात के उस रोमांचक सरेंडर की पूरी कहानी पैरी टाइम्स पर ।
गरियाबंद/महासमुंद छत्तीसगढ़ और ओड़िसा के सरहदी जंगलों में सक्रिय BBM (बलांगीर, बरगढ़, महासमुंद) कमेटी के भीतर चल रही बगावत की चिंगारी आखिरकार एक बड़े धमाके के साथ शांत हुई,यह कोई अचानक हुआ आत्मसमर्पण नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति और फिक्स्ड डेट का नतीजा था,ओड़िसा राज्य के खूंखार पश्चिम सब जोनल सचिव विकास उर्फ सुदर्शन ने अपने 14 साथियों के साथ मिलकर माओवाद के ताबूत में आखिरी कील ठोक दी है।

नक्सली आत्मसमर्पण गृहमंत्री को पत्र और 2 तारीख का सस्पेंस
इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा कई दिनों पहले ही लिखी जा चुकी थी, सूत्रों के मुताबिक, सुदर्शन और उसके दस्ते ने संगठन की खोखली विचारधारा से तंग आकर मुख्यधारा में लौटने का मन बना लिया था। इसके लिए उन्होंने सीधे प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा को एक गोपनीय पत्र (सीक्रेट लेटर) भेजा था। पत्र में न केवल आत्मसमर्पण की इच्छा जताई गई थी, बल्कि 2 तारीख की डेडलाइन भी फिक्स कर दी गई थी। पुलिस प्रशासन और गृह विभाग के बीच इस मिशन सरेंडर’ को लेकर पहले से ही सुगबुगाहट थी, लेकिन इसे बेहद गुप्त रखा गया था।
आधी रात का वो सस्पेंस और बलौदा थाना
सरायपाली के बलौदा के घने और दुर्गम जंगलों में शनिवार की रात कुछ अलग ही हलचल थी। रात के गहरे सन्नाटे को चीरते हुए 15 साये एक के बाद एक जंगल की पगडंडियों से बाहर निकल रहे थे। स्थानीय ग्रामीणों को भी अंदाजा नहीं था कि ये वो लोग हैं, जिनकी एक आहट से पूरा इलाका थर्राता था। आधी रात को जब ये 15 माओवादी (जिनमें 09 खूंखार महिला कैडर और 06 पुरुष शामिल थे) सीधे बलौदा थाना पहुंचे, तो वहां तैनात पुलिसकर्मी भी एक पल के लिए चौंक गए। लेकिन यह कोई हमला नहीं, बल्कि माओवाद के अंत की शुरुआत थी।
महासमुंद रक्षित केंद्र में कड़ी सुरक्षा
इस ऐतिहासिक सरेंडर के बाद अब सभी 15 नक्सलियों को कड़ी सुरक्षा के बीच महासमुंद के रक्षित केंद्र (Police Lines) लाया गया है। विकास उर्फ सुदर्शन जैसे बड़े लीडर का इस तरह योजनाबद्ध तरीके से मुख्यधारा में आना नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। अब पुलिस इन सरेंडर कर चुके नक्सलियों से पूछताछ कर रही है, जिससे ओड़िसा और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में माओवादियों के अन्य गुप्त ठिकानों का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।
हथियारों का जखीरा और भविष्य की रणनीति
ये 15 नक्सली खाली हाथ नहीं लौटे थे। उनके पास 14 आधुनिक ऑटोमैटिक और देशी हथियारों का बड़ा जखीरा था। इन हथियारों को पुलिस के सामने सरेंडर करना माओवादी कैंपों के लिए एक करारा तमाचा है। फिलहाल, विकास उर्फ सुदर्शन समेत सभी 15 नक्सलियों को सुरक्षित तरीके से महासमुंद के रक्षित केंद्र (Police Lines) पहुंचा दिया गया है। पुलिस के आला अधिकारी उनसे पूछताछ कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में ओड़िसा-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर बड़े ऑपरेशन्स की उम्मीद जताई जा रही है।
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