सड़क परसूली वन विभाग का बड़प्पन गंभीर घायल ग्रामीण को थमाए 1 हजार रुपये और रोती पत्नी के साथ खिंचवाई फोटो ।

Sangani

By Sangani

सड़क परसूली वन विभाग का बड़प्पन गरियाबंद जिले के परसूली वन परिक्षेत्र में भालू के हमले से ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया है जिसे इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है। वन विभाग द्वारा घायल ग्रामीण को महज 1 हज़ार रुपये की सहायता राशि देकर अस्पताल में फोटो खिचाई पढें पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।

गरियाबंद का सड़क परसूली वन परिक्षेत्र और धन्य है यहाँ का वन अमला। ग्राम कोचई मुड़ा के जंगल में महुआ बीनने गए पुराणिक राम यादव पर जब खूंखार भालू ने हमला किया तो उनके सिर चेहरे और हाथ के मांस के लोथड़े बाहर आ गए। खून से सने इस मंजर के बीच जब वन विभाग की टीम अस्पताल पहुंची तो उनकी संवेदनशीलता देखकर अस्पताल में मौजूद लोग भी दंग रह गए।

सड़क परसूली वन विभाग का बड़प्पन

सड़क परसूली वन विभाग का बड़प्पन सूचना पर पहुंचा अमला और शुरू हुआ फोटो सेशन

जंगल में भालू के खूनी हमले के बाद बदहवास परिजनों ने सबसे पहले वन विभाग को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हुई और घायल ग्रामीण के साथ जिला अस्पताल भी पहुंची। लेकिन अस्पताल पहुँचते ही विभाग की प्राथमिकता इलाज से ज्यादा प्रचार पर टिकी नजर आई। गंभीर रूप से घायल ग्रामीण जो स्ट्रेचर पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था उसे विभाग ने फौरी राहत के नाम पर महज 1 हजार रुपये थमा दिए। शायद साहबों को लगता है कि भालू के जानलेवा हमले का इलाज और रायपुर तक का सफर इस भारी-भरकम राशि में सिमट जाएगा।

रोती पत्नी और बेबस तमाशा

हद तो तब हो गई जब घायल की बदहवास और रोती हुई पत्नी के साथ विभाग के नुमाइंदों ने तसल्ली से फोटो खिंचवाई। साहबों को शायद दफ्तर में यह सबूत देना था कि देखिए हम कितने मददगार हैं। एक तरफ खून बह रहा था दूसरी तरफ विभाग फोटो सेशन में मशगूल था और तीसरी तरफ सरकारी सिस्टम की पोल खोलती 108 एंबुलेंस आधे घंटे से नदारद है तड़पते घायल के परिजन जिला अस्पताल में रायपुर ले जाने के लिए गुहार लगाते बैठे हैं लेकिन सिस्टम की रफ्तार कछुए से भी धीमी निकली।

साहब जख्म गहरे हैं फोटो से नहीं भरेंगे

ग्रामीण इलाकों में महुआ बीनना गरीबी की मजबूरी है लेकिन विभाग की यह कागजी मदद और फोटोबाजी किसी मजाक से कम नहीं है। एक तरफ भालू ने शरीर को चीर दिया और दूसरी तरफ सिस्टम की इस बेरुखी ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। अब देखना यह है कि क्या इस फोटो सेशन के बाद घायल को वास्तविक आर्थिक सहायता मिलती है या विभाग एक हजार रुपये की रसीद को ही अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानकर बैठ जाएगा।

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