राजिम कुंभ कल्प या इवेंट कंपनी के अहंकार का कुंभ, न प्रशासन की सुनवाई,न पुलिस की परवाह, न विधायक का डर, बस अपनी मनमानी,नाराज रोहित साहू ने जमकर ली क्लास,देखे वीडियो।

Sangani

By Sangani

संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद

राजिम कुंभ कल्प या इवेंट कंपनी के अहंकार का कुंभ राजिम कुंभ 2026 इवेंट कंपनी की तानाशाही पर भड़के विधायक रोहित साहू, जिला प्रशासन की लगाई जमकर क्लास,नन्ही गायिका आरु साहू के अपमान और अव्यवस्थाओं को लेकर नगरवासियों ने खोला मोर्चा। पढ़ें पूरी खबर पैरी टाईम्स पर देखें क्या है जनता की मांग ।

गरियाबंद धर्म, अध्यात्म और आस्था के संगम राजिम कुंभ कल्प में इन दिनों भक्ति कम और इवेंटिया तानाशाही का शोर ज्यादा है। ऐसा लगता है कि प्रशासन ने मेले की चाबी किसी इवेंट कंपनी को नहीं, बल्कि किसी रियासत के वारिसों को सौंप दी है, जिन्हें न तो मर्यादा का पता है और न ही प्रोटोकॉल का।

राजिम कुंभ कल्प या इवेंट कंपनी के अहंकार का कुंभ

राजिम कुंभ कल्प या इवेंट कंपनी के अहंकार का कुंभ विधायक ने दिखाया रुद्र रूप और रोमांचक सिस्टम की क्लास लगी

इवेंट कंपनी की बदतमीजी और कुप्रबंधन का घड़ा तब फूटा जब क्षेत्रीय विधायक रोहित साहू का सामना हकीकत से हुआ।विधायक जी ने जिला प्रशासन और इवेंट कंपनी के नुमाइंदों को एक लाइन में खड़ा कर वह प्रवचन सुनाया कि अफसरों के पसीने छूट गए। विधायक ने दो टूक कहा कि यह जनता का मेला है, इवेंट कंपनी की प्राइवेट पार्टी नहीं। उन्होंने कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को जमकर लताड़ते हुए पूछा कि आखिर किसके शह पर ये ठेकेदार बेलगाम हो चुके हैं?

आरु साहू का अपमान और कंपनी का शाही अहंकार

​छत्तीसगढ़ की माटी की आवाज, नन्ही गायिका आरु साहू को कार्यक्रम के बाद भोजन के लिए तरसाना इवेंट कंपनी के मैनेजमेंट पर सबसे बड़ा तमाचा है। कलाकारों को घंटों बंधक की तरह बिठाए रखना और उनके साथ दुर्व्यवहार करना ही क्या इस बार के कुंभ की नई परंपरा है? शायद कंपनी के मैनेजरों को लगता है कि लाइट और साउंड लगाने से वे धर्म के रक्षक बन गए हैं।

सुपर पावर इवेंट कंपनी पुलिस और प्रेस भी बौने

​मेला परिसर में इवेंट कंपनी के कर्मचारियों का जलवा ऐसा है कि उनके आगे पुलिस की वर्दी की चमक फीकी पड़ रही है और पत्रकारों का कैमरा उन्हें दुश्मन नजर आ रहा है। बिना किसी जवाबदेही के चल रही यह तानाशाही बता रही है कि सिस्टम ने घुटने टेक दिए हैं। नगरवासी अब सड़कों पर हैं और उनका सीधा सवाल है जब काम में सफाई नहीं, प्याऊ में पानी नहीं, और शौचालय में स्वच्छता नहीं, तो फिर करोड़ों का भुगतान किस बात का? प्रशासन भी इंवेट कंपनी के सामने नतमस्तक और बेबस नजर आ रहा है ।

कुंभ में इवेंट कंपनी के अनोखे रंग

कौन है परेशान?कारण (व्यंग्य)
कलाकारक्योंकि उन्हें कला के बदले अपमान और भूख का प्रसाद मिल रहा है।
पत्रकारक्योंकि कंपनी के बाउंसर्स और कर्मचारियों को सच से एलर्जी है।
विधायकक्योंकि प्रशासन ने आँखों पर इवेंट के चश्मे चढ़ा रखे हैं।
आम जनताक्योंकि वे कुंभ देखने आए थे, कंपनी राज नहीं।

कुंभ कल्प या इवेंट कंपनी का भूल-भुलैया ?

राजिम कुंभ में इस बार श्रद्धा की डुबकी लगे न लगे, लेकिन इवेंट कंपनी के बिछाए बाधाओं के जाल में जनता की डुबकी जरूर लग रही है। कंपनी के मैनेजमेंट गुरुओं ने मेला स्थल को किसी अंतरराष्ट्रीय सीमा की तरह बेरिकेट्स से पाट दिया है। बिना किसी तर्क और जरूरत के जगह-जगह खड़े ये लोहे के अवरोध जनता को भक्ति मार्ग के बजाय भूल-भुलैया का अहसास करा रहे हैं। हालात ये हैं कि मुख्य मंच तक पहुँचना अब किसी दुर्गम पहाड़ी चढ़ने जैसा हो गया है। कई रास्तों को तो ऐसे ब्लॉक किया गया है जैसे वहाँ से गुजरने के लिए किसी वीजा की जरूरत हो। इवेंट कंपनी के इस अत्यधिक हस्तक्षेप ने मेले की रौनक को बेरिकेट्स के पीछे कैद कर दिया है। श्रद्धालु परेशान हैं, स्थानीय लोग हैरान हैं, और मुख्य मंच के सामने की खाली कुर्सियां इस अति-मैनेजमेंट की गवाही दे रही हैं। शायद कंपनी को लगता है कि जितने ज्यादा रास्ते बंद होंगे, उनका रुतबा उतना ही ज्यादा बढ़ेगा, भले ही जनता बेहाल हो जाए।

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