नक्सल गढ़ में सिंघम अवतार गरियाबंद SPगरियाबंद SP वेदव्रत सिरमौर ने घोर नक्सल प्रभावित छिंदौला और कुल्हाड़ीघाट कैंप का औचक निरीक्षण किया। ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और जवानों को फिट रहने का मंत्र दिया।
गरियाबंद गरियाबंद जिले के नव-पदस्थ पुलिस अधीक्षक (SP) वेदव्रत सिरमौर अपनी ज्सावाइनिंग के बाद से ही एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। शनिवार को SP सिरमौर ने जिले के सबसे चुनौतीपूर्ण और घोर नक्सल प्रभावित इलाकों का दौरा कर न केवल जवानों में जोश भरा, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं को सुनकर व्यवस्था सुधारने का भरोसा भी दिलाया।

नक्सल गढ़ में सिंघम अवतार गरियाबंद SP जवानों के बीच पहुंचे कप्तान फिटनेस है तो सुरक्षा है
SP वेदव्रत सिरमौर अचानक छिंदौला, ओढ़ और कुल्हाड़ीघाट जैसे संवेदनशील पुलिस कैंपों में जा पहुंचे। कप्तान को अपने बीच पाकर जवानों का उत्साह दोगुना हो गया। निरीक्षण के दौरान SP ने जवानों से सीधी बात की और उनके रहन-सहन का हाल जाना।उन्होंने जवानों को मंत्र दिया कि मानसिक और शारीरिक मजबूती ही नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। इसी कड़ी में उन्होंने सभी जवानों को ड्यूटी के साथ-साथ नियमित व्यायाम और योगाभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित किया।

अपनों के बीच कप्तान ग्रामीणों की सुनी अनसुनी दास्तां
सिर्फ कैंप तक सीमित न रहते हुए, SP सिरमौर छिंदौला, ओढ़, कुल्हाड़ीघाट और अमलोर के गांवों की गलियों में भी पहुंचे। उन्होंने वहां के बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं से आत्मीय चर्चा की। यह दृश्य देख ग्रामीण भी हैरान रह गए कि जिले का सबसे बड़ा पुलिस अधिकारी जमीन पर बैठकर उनकी बातें सुन रहा है।
ग्रामीणों ने रखीं ये प्रमुख समस्याएं
- बिजली कई इलाकों में आज भी अंधेरा पसरा हुआ है।
- पानी स्वच्छ पेयजल की भारी किल्लत।
- शिक्षा जर्जर स्कूल भवन और शिक्षकों की कमी।
- बुनियादी ढांचा सामुदायिक भवनों की आवश्यकता।
ऑन द स्पॉट समाधान का आश्वासन
ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल संबंधित विभागों के अधिकारियों से संपर्क करने की बात कही। उन्होंने आश्वासन दिया कि शासन की मूलभूत सुविधाएं हर घर तक पहुंचे, इसके लिए पुलिस प्रशासन सेतु का काम करेगा।
सुरक्षा और विश्वास का नया अध्याय
गरियाबंद के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस अधीक्षक का यह दौरा केवल एक निरीक्षण नहीं, बल्कि जनता और पुलिस के बीच बढ़ते विश्वासका प्रतीक है। जब वर्दीधारी जनता के बीच जाकर उनकी बुनियादी जरूरतों की बात करता है, तो नक्सलवाद की जड़ें अपने आप कमजोर होने लगती हैं।