गरियाबंद में सुपेबड़ा पार्ट-2 की आहट? पथर्री गांव में पानी नहीं मौत बरस रही है, 3 साल में 7 चिताएं और हर घर में खौफ ।

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By Sangani

गरियाबंद जिले के पथर्री गांव में किडनी की बीमारी से हड़कंप मच गया है ग्रामीणों का दावा है कि बीते 3 साल में 7 लोगों की मौत हो चुकी है और पानी में फ्लोराइड की मात्रा मिलने से दहशत का माहौल है पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ पढ़ें

गरियाबंद जिला एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन वजह कोई विकास कार्य नहीं बल्कि मौत का वह साया है जो धीरे-धीरे एक पूरे गांव को अपनी आगोश में ले रहा है। फिंगेश्वर ब्लॉक का पथर्री गांव आज दहशत के उस मुहाने पर खड़ा है, जहां पानी की हर बूंद में जिंदगी नहीं बल्कि किडनी खराब करने वाला जहर घुला हुआ है। सुपेबड़ा की त्रासदी को अभी लोग भूले भी नहीं थे कि पथर्री गांव से आई तस्वीरों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।

खौफनाक खुलासा गांव बना किडनी का डेथ जोन

​ग्रामीणों ने पड़ताल के दौरान जो खुलासे किए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले महज 2 से 3 सालों के भीतर गांव के 7 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। यह कोई सामान्य मौतें नहीं थीं, बल्कि इन सभी की किडनी ने एक-एक करके काम करना बंद कर दिया था। आज स्थिति यह है कि गांव में 10 से ज्यादा लोग ऐसे हैं जिनकी किडनी पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है और वे अस्पताल के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कई मरीजों का तो नियमित तौर पर डायलिसिस चल रहा है, जिससे उनके परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं।

पानी में मिला सफेद जहर

​इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब गांव के जल स्रोतों की जांच की गई। पड़ताल में पता चला कि गांव के हैंडपंपों और अन्य स्रोतों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से कई गुना अधिक है। यह वही फ्लोराइड है जिसे ‘धीमा जहर’ कहा जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। लोग आज भी वही जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं, जो उनकी नसों में मौत बनकर दौड़ रहा है।

पथर्री की गलियों में सन्नाटा और सिसकियां

​गांव की गलियों में अब सन्नाटा पसरा रहता है। लोग एक-दूसरे को देख कर बस यही सोचते हैं कि अगला नंबर किसका होगा? कई परिवारों ने अपने कमाऊ सदस्यों को खो दिया है। डायलिसिस पर चल रहे मरीजों के पास अब इलाज के लिए पैसे नहीं बचे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर वक्त रहते सरकार नहीं जागी, तो पथर्री गांव भी सुपेबड़ा की तरह श्मशान में तब्दील हो जाएगा।

प्रशासन से गुहार हमें बचा लीजिए

​अब ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे रहा है। गांव वालों ने एकजुट होकर प्रशासन से मांग की है कि पथर्री में तत्काल विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया जाए और हर घर के सदस्य की बारीकी से जांच की जाए। इसके साथ ही, गांव में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने की भी अपील की गई है ताकि आने वाली पीढ़ी को इस जानलेवा बीमारी से बचाया जा सके। क्या प्रशासन इस खौफनाक दस्तक को सुनेगा, या एक और त्रासदी का इंतजार करेगा?

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