गरियाबंद धान खरीदी केंद्र में गेटकीपर बना सुपरवाइज़र, बोरे बने 850 ग्राम भारी नागाबुड़ा उपार्जन केंद्र में नमी से ज्यादा सिस्टम बहता दिखा .

Sangani

By Sangani

गरियाबंद धान खरीदी केंद्र नागाबुड़ा उपार्जन केंद्र जहां व्यवस्था लंच पर और गेटकीपर ड्यूटी पर नागाबुड़ा धान खरीदी केंद्र में अव्यवस्था गेटकीपर सुपरवाइज़र, हर बोरे पर 850 ग्राम अतिरिक्त वसूली, 11–19% नमी वाला धान भी पास। निरीक्षण में कलेक्टर को ये कमी कभी नहीं दिखती।

गरियाबंद जिले के नागाबुड़ा धान उपार्जन केंद्र में सोमवार को ऐसा दृश्य देखने मिला जिसने किसानों को हैरान और सिस्टम को शर्मिंदा कर दिया केंद्र प्रभारी और दो कर्मचारी भोजन अवकाश पर चले गए और गेटकीपर कमलेश सुपरवाइज़र बनकर टेबल पर बैठा किसानों की एंट्री कर रहा था।यही नहीं, कलेक्टर साहब के औचक निरीक्षण की भी अपनी एक खास टाइमिंग है जहां सब ठीक दिखाना हो, वहीं पहुंचते हैं और जहां अव्यवस्था चीख-चीखकर बुला रही हो वहां कलेक्टर साहब की गाड़ी का ब्रेक काम नहीं करता

गरियाबंद धान खरीदी केंद्र

गरियाबंद धान खरीदी केंद्र नमी 14 से 17 % तक, फिर भी धान पास और ऊपर से हर बोरे पर 850 ग्राम की विशेष कटौती

जांच में पाया गया कि केंद्र में खरीदे जा रहे धान की नमी कहीं 11–13% तो कई बोरों में 17.8 से 19% तक थी। जबकि नियम के हिसाब से 14 से 17% नमी के धान को लेना है लेकिन आश्चर्य यह कि इतना ज्यादा नमी वाला धान गेट पर ओके होकर अंदर पहुंच गया और असली बम तो तब फूटा जब किसानों ने बताया

हर बोरे के पीछे लगभग 850 ग्राम धान अतिरिक्त लिया जा रहा है।

किसानो से पूछने पर बताया अपनी मर्जी से ज्यादा धान दे रहे है अब किसान तो बोलेंगे ही बोले धान बेचने आए थे, चावल भेंट नहीं करने किसान बिसाहू राम के डेढ़ सौ क्विंटल धान की मॉइश्चर मशीन चेक में 11.2% नमी आई नोडल अधिकारी ने मान लिया कि धान पुराना है। लेकिन फिर वही सवाल पुराने धान को गेट पर पास किसने किया और कैसे?

प्रभारी बोले मुझे नहीं पता नोडल बोले धान संदिग्ध है

केंद्र प्रभारी छोटू सोनवानी से सवाल किया गया, और उन्होंने क्लासिक सरकारी जवाब दिया मुझे नहीं मालूम नोडल अधिकारी ने धान को इस सीजन का ना मानते हुए वापस करने की बात कह दी, पर सच ये है कि धान पहले ही अंदर पहुंच चुका था।

अधिकारियों से जवाब मांगो तो मोबाइल मीटिंग मोड में चला जाता है

जब इस पूरे मामले पर कुछ जिले के अधिकारियों से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो सभी के फोन पर एक ही ट्यून सुनाई दी
अभी मीटिंग में हूँ
नेटवर्क नहीं आ रहा
थोड़ा बाद में बात करते हैं

किसानों का समर्थन मूल्य जहां शासन की मंशा है,
वहीं व्यावहारिक स्तर पर बिचौलियों और कटौती तंत्र की मंशा ज्यादा मजबूत दिख रही है। नतीजा धान में नमी कम, सिस्टम में नमी ज्यादाऔर हर बोरा पहले से 850 ग्राम भारी

नागाबुड़ा केंद्र की स्थिति साफ है

धान की नमी तो चलो मापी जा सकती है, लेकिन सिस्टम की नमी का कोई मीटर अभी बना ही नहीं किसान लाइन में, कर्मचारी गायब, नोडल उलझन में और गेटकीपर सीधे सुपरवाइज़र की कुर्सी पर धान खरीदी का भविष्य लिखते हुए!

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