उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व की टीम ने ओडिशा में घुसकर 5 शिकारियों को गिरफ्तार किया,गुलेल और तीर-धनुष से किया था कोटरी का शिकार। पढ़ें पूरी रोमांचक खबर पैरी टाईम्स पर ।
गरियाबंद छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व की जांबाज एंटी पोचिंग टीम ने एक बार फिर सरहद पार जाकर वन्यजीव तस्करों और शिकारियों के मंसूबों को धवस्त कर दिया है। टाइगर रिज़र्व के इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर जोन में अवैध शिकार की सूचना मिलते ही विभाग ने एक बड़ी घेराबंदी की, जिसका जाल सीधे पड़ोसी राज्य ओडिशा के नबरंगपुर जिले तक जा पहुंचा। इस रोमांचक और साहसिक कार्रवाई में टीम ने 5 शिकारियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कई अन्य की तलाश जारी है।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व खूनी खेल का पर्दाफाश गुलेल से उड़न गिलहरी और तीर-धनुष से कोटरी का शिकार
वन विभाग को सूचना मिली थी कि पीपलखूंटा बीट के कक्ष क्रमांक 1204 में कुछ बाहरी शिकारी घुसपैठ कर चुके हैं। ये शिकारी आधुनिक हथियारों के बजाय पारंपरिक लेकिन घातक औजारों जैसे गुलेल और तीर-धनुष से लैस थे। पकड़े गए आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने गुलेल के सटीक निशाने से दुर्लभ ‘उड़न गिलहरी’ (Flying Squirrel) और तीर-धनुष से कोटरी (Barking Deer) का निर्दयतापूर्वक शिकार किया है।
तलाशी के दौरान आरोपी गुड्डू के घर से अज्ञात वन्यप्राणी (बयान के अनुसार कोटरी) का कच्चा मांस भी बरामद किया गया, जिसे जब्त कर लिया गया है।
आधी रात को दबिश ओडिशा का प्लांटेशन चौकीदार भरमार बंदूक के साथ गिरफ्तार
मामला तब और गंभीर हो गया जब पकड़े गए आरोपियों की निशानदेही पर टीम ओडिशा के ग्राम कोलिहाडबरी पहुंची। यहाँ से पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने हिरासिंग पिता कान्दरु कमार को गिरफ्तार किया। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी प्लांटेशन चौकीदार के रूप में कार्यरत था, जिसके पास से 01 नग अवैध भरमार बंदूक बरामद की गई है। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि शिकारी अब सरहदों का फायदा उठाकर अवैध नेटवर्क चला रहे हैं।
टाइगर रिज़र्व का सख्त अल्टीमेटम 50 किलोमीटर दूर रहें शिकारी
इस बड़ी सफलता के बाद विभाग ने शिकारियों और तस्करों को दो टूक चेतावनी जारी की है। अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शिकारी टाइगर रिज़र्व की सीमा से कम से कम 50 किलोमीटर दूर रहें, अन्यथा छत्तीसगढ़ की एंटी पोचिंग टीम उन्हें पाताल से भी ढूँढ निकालेगी, गौरतलब है कि इससे पहले भी यह टीम नुआपाड़ा, नबरंगपुर, कालाहांडी, बोलांगीर और रायगडा जैसे ओडिशा के जिलों में घुसकर बड़ी कार्रवाइयां कर चुकी है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला, भेजे गए जेल
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण पाण्डे, मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक श्रीमती सतोविशा समाजदार और उप निदेशक वरुण जैन के कुशल मार्गदर्शन में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 9, 27, 29, 31, 39(1)द, 50, 50(स), 51 एवं 52 के तहत पी.ओ.आर. प्रकरण क्रमांक 16/392 दर्ज किया गया। पकड़े गए आरोपियों- चमरु कमार, मनीराम पारधी, गुड्डू कमार और लखमु पारधी को देवभोग न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर गरियाबंद जेल भेज दिया गया है।
इस संयुक्त मिशन के हीरो
इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफल बनाने में सहायक संचालक (उदंती) गोपाल सिंह कश्यप, इंदागांव परिक्षेत्र अधिकारी सुशील कुमार सागर, दक्षिण उदंती अधिकारी चन्द्रबली ध्रुव सहित भूपेन्द्र कुमार सोनी (वनपाल), जय ललीता ध्रुव, पामेश्वरी, विरेन्द्र कुमार ध्रुव, टकेश्वर देवागन (सभी वनरक्षक), रुस्तम यादव, देवीसिंग यादव और गिरधारी बिसी का विशेष योगदान रहा। ओडिशा वनमंडल से ए.सी.एफ. सुभाष खुंटिया और उनकी टीम ने भी इस अंतरराज्यीय कार्रवाई में पूरा सहयोग दिया ।