हिमांशु साँगाणी
गरियाबंद में रेत की अवैध ढुलाई लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। प्रधानमंत्री आवास योजना की आड़ में जिले के विभिन्न नदी-नालों से ट्रैक्टरों के माध्यम से रेत का अवैध परिवहन हो रहा है, जबकि नगर पालिका के अनुसार 95% से अधिक पीएम आवास निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है।

CMO गिरीश कुमार ने इस पर चिंता जताते हुए कहा,
हमारे यहां प्रधानमंत्री आवास योजना का लगभग 95% कार्य पूरा हो चुका है। यदि बचे हुए 5% कार्य के नाम पर रेत की अवैध ढुलाई की जा रही है तो यह गलत है। संबंधित विभाग को ट्रैक्टरों की जांच करनी चाहिए कि वे रेत किस हितग्राही के लिए ले जा रहे हैं और क्या वास्तव में वहां निर्माण कार्य हो रहा है या नहीं।
खनिज अधिकारी ने क्या कहा?
इस मामले में खनिज विभाग के अधिकारी रोहित साहू ने Pairi Times 24×7 को बताया कि“हमने इस मामले में जानकारी ले ली है, जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
आरटीओ ने साधी चुप्पी
वहीं दूसरी ओर, जब Pairi Times 24×7 ने आरटीओ विभाग से इस मामले में जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। फिलहाल विभाग की ओर से चुप्पी बनी हुई है, जबकि रेत की ढुलाई में कृषि प्रयोजन के लिए खरीदे गए ट्रैक्टरों का खुलेआम व्यावसायिक उपयोग हो रहा है।
खेती के नाम पर लोन, कारोबार रेत का
स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में ऐसे ट्रैक्टर मालिक हैं जिन्होंने कृषि उपयोग के लिए बैंक से लोन लिया, लेकिन अब वे ट्रैक्टर अवैध रेत खनन और परिवहन में लगा रहे हैं। इनमें से कुछ मालिक जनप्रतिनिधि भी हैं, जो अपने रसूख के दम पर नियमों से बच निकलते हैं।
4 से 5 सौ में बिकने वाली रेत , 1 हजार से 12 सौ में बिक रही
सूत्रों के अनुसार, पहले एक ट्रिप रेत 4 से 5 सौ में मिल जाती थी ।और वही रेत नगर में ऊपर तक चढ़ावा देने की बात कहकर 1 हजार से 12 सौ में बेची जाती है। इस अवैध मुनाफे से न तो प्रशासन को कोई राजस्व मिल रहा है, और न ही ग्रामीणों को कोई राहत।
नदी-नालों की स्थिति गंभीर
गरियाबंद और मालगांव के आसपास के नदी-नालों को रेत निकालकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ट्रैक्टरों से उड़ने वाली धूल, टूटी सड़कें और कम होता जलस्तर अब आम समस्या बन गई है।—
Pairi Times 24×7 की यह विशेष रिपोर्ट “गरियाबंद में रेत की अवैध ढुलाई” को लेकर आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई पर नजर बनाए रखेगी।
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