संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन करीब ओडिशा के कालाहांडी में 1.34 करोड़ के इनामी 11 नक्सलियों ने सरेंडर किया। सरकार की डेडलाइन से पहले BGN डिवीजन का पूरी तरह सफाया हो गया है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें पैरी टाईम्स पर.
गरियाबंद/कालाहांडी देश से नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा तय की गई डेडलाइन का असर अब पूरी तरह से जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। गरियाबंद जिलेा की ओड़िशा सीमा से लगे कालाहांडी जिले में सुरक्षाबलों को एक बड़ी रणनीतिक सफलता मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के बंसधारा-घुमसर-नागाबली (BGN) डिवीजन के 11 हार्डकोर नक्सलियों ने एक साथ हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है। इस सामूहिक आत्मसमर्पण के साथ ही क्षेत्र में माओवादियों का यह महत्वपूर्ण डिवीजन पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है।

नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन करीब प्रमुख माओवादी नेताओं का आत्मसमर्पण
कालाहांडी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वालों में माओवादी संगठन के उच्च पदों पर आसीन कैडर शामिल हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में एक डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVCM), पांच एरिया कमेटी मेंबर (ACM) और पांच पार्टी मेंबर (PM) शामिल हैं। इन नक्सलियों ने न केवल हथियार डाले हैं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी अटूट आस्था भी व्यक्त की है।

बीजीएन (BGN) डिवीजन का हुआ पूर्ण सफाया
पुलिस अधिकारियों ने इस घटनाक्रम को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। बंसधारा-घुमसर-नागाबली (BGN) डिवीजन लंबे समय से ओडिशा के इन दुर्गम क्षेत्रों में सक्रिय था। इस डिवीजन के 11 प्रमुख सदस्यों के एक साथ मुख्यधारा में लौटने से अब यह डिवीजन पूरी तरह से निष्क्रिय और समाप्त हो गया है। आत्मसमर्पण के दौरान इन कैडरों ने अपने कब्जे में मौजूद भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस को सौंपे हैं।
1.34 करोड़ की इनामी राशि और हथियारों का जखीरा
आत्मसमर्पण करने वाले इन 11 नक्सलियों की प्रोफाइल सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बनी हुई थी। इन सभी पर सामूहिक रूप से 1,34,23,690 रुपये (एक करोड़ चौंतीस लाख से अधिक) का इनाम घोषित था। सरेंडर करने वालों में शामिल प्रमुख कैडर इस प्रकार हैं
1 डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVCM) राजू कोला उर्फ नकुल (महाराष्ट्र का निवासी), जो लंबे समय से संगठन की रणनीतियों का हिस्सा था।
5 एरिया कमेटी मेंबर (ACM) संगठन के क्षेत्रीय विस्तार और हमलों की योजना बनाने वाले पांच मुख्य कमांडर।
5 पार्टी मेंबर (PM) सक्रिय कैडर जो सैन्य अभियानों में शामिल थे।
इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण के दौरान अपने साथ रखे घातक हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस को सौंपे हैं, जो संगठन की सैन्य शक्ति के टूटने का स्पष्ट संकेत है।
सरकार की अंतिम चेतावनी और बदलता परिदृश्य
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे के लिए दी गई समय-सीमा (Deadline) ने संगठन के भीतर खलबली मचा दी है। सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और विकास की पहुंच ने नक्सलियों के बीच ‘अस्तित्व का संकट’ पैदा कर दिया है। इसी का परिणाम है कि अब नक्सली कमांडर जंगलों में लड़ने के बजाय सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाना बेहतर समझ रहे हैं।
पुनर्वास नीति बंदूक छोड़ कलम और रोजगार की ओर
ओडिशा सरकार की व्यापक पुनर्वास नीति के तहत, इन पूर्व नक्सलियों को न केवल सुरक्षा दी जाएगी, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए विशेष पैकेज भी दिया जा रहा है:
आर्थिक मदद 36 महीनों तक 10 हज़ार रुपये का मासिक वजीफा और कौशल विकास प्रशिक्षण।
आवास और विवाह अंत्योदय गृह योजना के तहत पक्का मकान और विवाह के लिए आर्थिक प्रोत्साहन।
सामाजिक सुरक्षा हेल्थ कार्ड और मुफ्त राशन की सुविधा ताकि वे एक सामान्य नागरिक की तरह जीवन जी सकें।
सरकार की अपील हिंसा छोड़ें, मुख्यधारा में आएं
इस मौके पर ओडिशा पुलिस के महानिदेशक (DGP) ने अन्य सक्रिय माओवादियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की विकास नीति और सुरक्षाबलों का अभियान रुकने वाला नहीं है। उन्होंने अन्य नक्सलियों से अपील की कि वे समय रहते आत्मसमर्पण कर दें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनें, अन्यथा कानून अपनी सख्त कार्रवाई जारी रखे ।