संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
कोकड़ी दिव्यांग स्कूल गरियाबंद में एनजीओ की मनमानी और प्रशासनिक अनदेखी का बड़ा खुलासा हुआ है जहाँ बच्चों ने वीडियो जारी कर घटिया खाने और साबुन तक न मिलने का दर्द बयां किया है रसूखदार संचालिका पर कार्यवाही न होने से मासूम नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं पूरी रिपोर्ट देखें पैरी टाईम्स पर ।
गरियाबंद के कोकड़ी स्थित दिव्यांग स्कूल में सेवा के नाम पर चल रहे महारस का भांडा खुद उन मासूमों ने फोड़ दिया है जिनके सहारे एनजीओ अपनी रोटियां सेक रहा है दिव्यांग बच्चों ने अपनी व्यथा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर प्रशासन की संवेदनशीलता के परखच्चे उड़ा दिए हैं वीडियो में रोटियों की जो खस्ता हालत दिख रही है उसे देखकर लगता है कि बच्चों को खाना नहीं बल्कि एनजीओ की लापरवाही का प्रसाद परोसा जा रहा है ।

कोकड़ी दिव्यांग स्कूल गरियाबंद रोटियों की पत्थर जैसी सच्चाई और गायब होता साबुन
कोकड़ी के इस दिव्यांग स्कूल का संचालन एक एनजीओ के भरोसे है जहाँ बच्चों का आरोप है कि उन्हें घटिया स्तर का भोजन दिया जा रहा है रोटियां ऐसी हैं जिन्हें चबाना किसी चुनौती से कम नहीं बच्चों ने वीडियो में साफ कहा कि उन्हें नहाने के लिए साबुन और कपड़े धोने के लिए निरमा तक नसीब नहीं हो रहा है शायद एनजीओ की संचालिका को लगता है कि इन मासूमों की खुशबू से ज्यादा कीमती उनके बजट की बचत है ।

अधिकारियों का धृतराष्ट्र अवतार और संचालिका की अजेय सत्ता
हैरानी इस बात की है कि इस स्कूल की संचालिका पर पहले भी बदसलूकी और घटिया खानपान की शिकायतें होती रही हैं लेकिन प्रशासनिक गलियारों में उनकी पकड़ इतनी मजबूत है कि आज तक कोई भी जांच अधिकारी उनकी चौखट लांघने की हिम्मत नहीं जुटा पाया न तो किसी और संस्था को इसका काम सौंपा जाता है और न ही वर्तमान व्यवस्था में सुधार की कोई कोशिश दिखती है ऐसा लगता है जैसे दिव्यांग बच्चों की बेबसी ही इस एनजीओ की सबसे बड़ी ताकत बन गई है
वीडियो पर वीडियो मगर साहब की नींद है कि टूटती ही नहीं
यह पहली बार नहीं है जब बच्चों ने अव्यवस्था को लेकर वीडियो बनाए है बच्चे लगातार अलग-अलग माध्यमों से वीडियो भेजकर अपनी सुध लेने की गुहार लगा रहे हैं उनका सीधा आरोप है कि यहाँ कोई देखरेख करने वाला नहीं है और न ही कोई बड़ा अधिकारी कभी उनका हाल जानने स्कूल के भीतर कदम रखता है प्रशासन की इस खामोशी ने इन मासूमों को नरकीय जीवन जीने पर मजबूर कर दिया है अब सवाल यह है कि इस नए वीडियो के बाद भी क्या कलेक्टर की जांच टीम केवल कागजों पर दौड़ेगी या फिर इन बच्चों को सच में इंसान समझा जाएगा