​राजिम कल्प कुंभ में आस्था के नाम पर सिस्टम का बड़ा खेल 3 दिन के टेंडर में 6 करोड़ स्वाहा करने की तैयारी सबसे बड़ा सवाल कौन है वो खास जिसके लिए 72 घंटे में सिमट गया ।

Sangani

By Sangani

राजिम कल्प कुंभ गरियाबंद में सीएम विष्णु देव साय का दौरा और दूसरी तरफ राजिम कुंभ के 6 करोड़ के टेंडर में खेला 3 दिन में टेंडर क्लोज करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल।

गरियाबंद प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज गरियाबंद के दौरे पर हैं मंच से घोषणाएं हो रही हैं राजिम कुंभ कल्प मेले को दिव्य और भव्य बनाने के संकल्प दोहराए जा रहे हैं लेकिन साहब मंच के पीछे जिला प्रशासन ने भव्य भ्रष्टाचार की ऐसी स्क्रिप्ट लिखी है कि मुख्यमंत्री की साख ही दांव पर लग जाए ।

​राजिम कल्प कुंभ

​राजिम कल्प कुंभ सीएम बोले भव्य आयोजन होगा प्रशासन लगा सेटिंग में ?

एक तरफ सीएम साय राजिम कुंभ कल्प की गरिमा लौटाने की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ गरियाबंद कलेक्ट्रेट में सुपरफास्ट टेंडर एक्सप्रेस दौड़ रही है जिसका स्टॉपेज सिर्फ 3 दिन का है ​सीएम का दिव्य संकल्प बनाम प्रशासन का टेंडर खेल मुख्यमंत्री साय चाहते हैं कि राजिम कुंभ में देश दुनिया के लोग आएँ लेकिन प्रशासन शायद यह चाहता है कि टेंडर में केवल अपने लोग आएँ ।

प्रशासन का मिशन सीक्रेट कैंडिडेट

कलेक्टर का मिशन 6 करोड़ के इवेंट टेंडर को 72 घंटे में निपटाना
​3 दिन में कुंभ नहाने की तैयारी नियमों को ताक पर रखकर निकाले गए इस टेंडर की रफ्तार देखकर तो बुलेट ट्रेन भी पानी कम मांगे 7 तारीख को विज्ञापन आता है और 10 तारीख को बीड क्लोज
शायद गरियाबंद प्रशासन ने ऐसी तकनीक खोज ली है कि ठेकेदार नींद में ही करोड़ों का प्रेजेंटेशन बना लेता है और अगले ही दिन टेंडर जीत भी जाता है

कांग्रेस का सवाल क्या ये साय सरकार का सुशासन है

कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने इस पर करारा तंज कसा है उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री खुद जिले में हों तब अधिकारियों की इतनी हिम्मत कि वे खुलेआम खेला कर रहे हैं 3 दिन की समय सीमा साफ बताती है कि मैच फिक्सिंग हो चुकी है ठेकेदार पहले से माला पहनकर तैयार बैठा है टेंडर तो बस उसे सरकारी तिलक लगाने की रस्म ।

जंबूरी पार्ट 2 कलेक्टर साहब का मौन व्रत

​पर्यटन विभाग से छीनकर पहली बार यह जिम्मा कलेक्ट्रेट को मिला तो उम्मीद थी कि काम बेहतर होगा लेकिन यहाँ तो जंबूरी कैंप की तरह पार्ट 2 शुरू हो गया है इस पूरे मामले पर कलेक्टर भगवान सिंह उईके से फोन कर जानकारी मांगी गई तो उन्होंने हर बार की तरह फोन उठाना जरूरी नहीं समझा और चुप्पी साध रखी है शायद वे सीएम की अगवानी में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 21 दिन के नियम और पारदर्शिता की याद ही नहीं रही

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