​गरियाबंद में प्राइवेट स्कूलों की लापरवाही यमराज अवतार को पुलिस-आरटीओ और शिक्षा विभाग का मूक समर्थन नियम कानून दरकिनार करते हुए चल रही स्कूल बसे ?

Sangani

By Sangani

संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद

गरियाबंद में प्राइवेट स्कूलों की लापरवाही स्कूल बसें सुरक्षा और नियमों की खुलेआम उड़ा रही धज्जियां, पुलिस, आरटीओ और शिक्षा विभाग की लापरवाही से श्रद्धा पब्लिक स्कूल की बस में बच्ची घायल। फर्स्ट एड बॉक्स नदारद, प्रशासन मौन।

गरियाबंद की सड़कों पर दौड़ती निजी स्कूलों की बसें अब महज़ वाहन नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का चलता-फिरता स्मारक बन चुकी हैं। शासन ने नियम तो ऐसे बनाए हैं कि परिंदा भी पर न मार सके, लेकिन गरियाबंद में पुलिस प्रशासन, आरटीओ और शिक्षा विभाग की त्रिमूर्ति ने मिलकर इन नियमों को रद्दी के भाव बेच दिया है। ताज़ा शिकार श्रद्धा पब्लिक स्कूल की बस की एक मासूम बच्ची हुई, जिसका हाथ खिड़की से कट गया, लेकिन बस में प्राथमिक उपचार के नाम पर सन्नाटा पसरा था।

​गरियाबंद में प्राइवेट स्कूलों की लापरवाही

​गरियाबंद में प्राइवेट स्कूलों की लापरवाही पुलिस और आरटीओ की भूमिका मुस्तैदी या महज़ औपचारिकता ?

​पुलिस प्रशासन और यातायात विभाग का काम केवल चौराहों पर चालान काटना नहीं, बल्कि बच्चों को ले जा रही इन बसों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। नियमतः, पुलिस और यातायात विभाग को समय-समय पर स्कूल बसों की फिटनेस, ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन और सुरक्षा उपकरणों की जांच करनी चाहिए। लेकिन गरियाबंद में पिछले कई महीनों से जांच नहीं हुई है और अगर हुई होती तो राज्यशसन के द्वारा जो नियम बनाए गए है उनका पालन किया जा रहा होता लेकिन जिला प्रशासन शायद किसी महा-हादसे के शुभ मुहूर्त का इंतज़ार कर रही है, तभी तो गरियाबंद की रोड पर बेखौफ दौड़ती इन बसों पर उनकी नज़र नहीं पड़ती जो नियम कानून को ठेंगा बताकर बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रही है ।

नियमों की शव-यात्रा और श्रद्धा पब्लिक स्कूल का कारनामा

​शासन के नियम कहते हैं कि नर्सरी और प्राइमरी के बच्चों के लिए बस में महिला स्टाफ अनिवार्य है। लेकिन गरियाबंद में महिला स्टाफ तो दूर, बस में एक ढंग का फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं है। जब श्रद्धा पब्लिक स्कूल की बस में कंडक्टर की गलती से बच्ची का हाथ कटा और खून बहने लगा, तब ड्राइवर और कंडक्टर बस रोकने के बजाय किसी किराना दुकान पर बैंडेज तलाश रहे थे। यह गरियाबंद जिला प्रशासन, आरटीओ और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है कि उनके नाक के नीचे बच्चों की जान से सरेआम खिलवाड़ हो रहा है।

प्रशासनिक जुगलबंदी या भारी लापरवाही?

नियमों के मुताबिक बसों में CCTV कैमरे, GPS और हॉरिजॉन्टल ग्रिल का होना अनिवार्य है। लेकिन क्या गरियाबंद प्रशासन ने कभी इन बसों को रोककर यह देखने की जहमत उठाई कि कैमरे चल रहे हैं या सिर्फ डमी लगे हैं? क्या शिक्षा विभाग ने कभी स्कूल संचालकों से पूछा कि बिना महिला स्टाफ के बसें कैसे चल रही हैं?सच्चाई यह है कि जब तक आरटीओ, पुलिस और शिक्षा विभाग एक साथ मिलकर सड़कों पर नहीं उतरेंगे, तब तक श्रद्धा पब्लिक स्कूल जैसे संस्थान बच्चों की जान को किराना दुकान के भरोसे छोड़ते रहेंगे। अब देखना यह है कि इस खबर के बाद प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटती है या वे फिर से किसी नई लापरवाही की चादर ओढ़कर सो जाते हैं।

अगर आपके बच्चे भी इन बसों में जाते है तो खबर आपके लिए भी है

यह खबर उन अभिभावकों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है जो अपने बच्चों को सुरक्षित मानकर निजी बसों में भेजते हैं, क्योंकि आज श्रद्धा पब्लिक स्कूल की लापरवाही सामने आई है तो कल किसी और स्कूल की बस में आपके बच्चे की सुरक्षा से खिलवाड़ हो सकता है। फिलहाल गरियाबंद की सड़कों पर नियमों की शव-यात्रा निकल रही है और अब देखना होगा कि इस गंभीर मामले के बाद सोया हुआ प्रशासन जागता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार करता रहेगा।

स्कूल जाते समय कल हुए हादसे में युवक हुआ घायल

गरियाबंद के मुख्य मार्गों पर स्कूल आने-जाने के समय यातायात नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जहाँ किसी भी चौक-चौराहे पर सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आती और इसी का नतीजा है कि शारदा चौक पर एक हृदयविदारक हादसा हो गया जिसमें अपनी मासूम बच्ची को स्कूल छोड़ने जा रहे एक युवक को ट्रक चालक ने लापरवाही पूर्वक टक्कर मार दी। इस दौरान बच्ची को बचाने की जद्दोजहद में युवक खुद ट्रक के नीचे आ गया और गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसका इलाज फिलहाल रायपुर के अस्पताल में चल रहा है।

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