गरियाबंद के देवभोग में बेलाट नाला पुल और झाखरपारा में बैंक की मांग को लेकर विधायक जनक ध्रुव और ब्लॉक कांग्रेस का चक्का जाम,जनहित की समस्याओं पर सरकार को घेरा ।
गरियाबंद के देवभोग में राजनीति का पारा सातवें आसमान पर है। मामला जनहित का है, तो अंदाज़ भी ज़रा धमाकेदार होना लाज़मी था, मंगलवार को नेशनल हाइवे पर गाड़ियों के पहिए तब थम गए, जब कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा और क्षेत्रीय विधायक जनकराम ध्रुव सहित ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेंद्र मांझी अपनी पूरी पलटन के साथ सड़क पर डट गए।

विकास की नाला नीति और बैंक का इंतज़ार
कहने को तो हम डिजिटल इंडिया के दौर में हैं, लेकिन देवभोग के 36 गांवों के नसीब में आज भी बेलाट नाला की लहरें गिनना ही लिखा है। आलम यह है कि बारिश आते ही इन गांवों का संपर्क दुनिया से ऐसे कट जाता है जैसे बिना रिचार्ज के मोबाइल। ज्ञापन में बड़े ही सलीके से सरकार को याद दिलाया गया है कि पुल की फाइल दो-तीन बार स्वीकृत होकर शायद बजट की किसी अलमारी में सो गई है। कांग्रेसियों का कहना है कि अब कागजों से बाहर निकलकर कंक्रीट को ज़मीन पर आने का कष्ट करना चाहिए।

एक बैंक के लिए वनवास जैसा इंतज़ार
झाखरपारा में बैंक खोलने की मांग भी उतनी ही पुरानी है जितनी कि लोगों की जेब खाली रहने की मजबूरी,देवभोग के इकलौते बैंक में इतनी भीड़ होती है कि पैसे निकालने के लिए लोगों को ‘तपस्या’ करनी पड़ती है। प्रदर्शनकारियों का तर्क सीधा है जब खाते लाखों में हैं, तो बैंक एक क्यों?
स्वास्थ्य, शिक्षा और पलायन का दर्द
व्यंग्य की बात यह है कि शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले में देवभोग आज भी पड़ोसी राज्य ओडिशा के धर्मगढ़ पर आश्रित है। विधायक जी और कार्यकर्ताओं ने साफ़ शब्दों में कहा कि अगर पंचायतों को उनके हिस्से की मूलभूत राशि और नरेगा का काम नहीं मिला, तो लोग यहाँ विकास नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों में रोटी ढूंढने पलायन ही करेंगे।
फिलहाल, चक्का जाम और नारेबाजी के बीच पुलिस प्रशासन मौके पर मुस्तैद रहा। अब देखना यह है कि राज्यपाल महोदय तक पहुँचा यह दर्द भरा खत देवभोग की सड़कों और पुलों की किस्मत बदलता है या फिर यह फाइल भी अगले सत्र के इंतज़ार में ठंडे बस्ते में चली जाएगी।