हिमांशु साँगाणी
गरियाबंद, मैनपुर | पाँच बार विधायक देने वाले मुनगापदर गाँव के लोग जब नदी किनारे झरिया खोदकर पानी पीने को मजबूर थे, तब प्रशासन “बरसात का इंतजार” करने की सलाह दे रहा था। लेकिन जब “Pairi Times 24×7” ने इस जल संकट की हकीकत को उजागर किया और भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरलीधर सिन्हा ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, तो मामला तूल पकड़ गया। अब वही प्रशासन, जो अब तक कानों में तेल डाले बैठा था, अचानक “संवेदनशील” हो गया है!

न्यूज का असर: अब लगेगा थ्री-फेस पावर पंप!
जल जीवन मिशन के तहत गाँव में 40 किलोलीटर की पानी की टंकी तो खड़ी थी, मगर पानी नहीं था। अब विभाग ने घोषणा की है कि गाँव में 1.5 किमी दूर बोर खनन किया गया है, जिसकी जल आवक क्षमता पर्याप्त है। जल्द ही थ्री-फेस पावर पंप लगाकर ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
मुरलीधर सिन्हा ने खोली पोल, तो जागा प्रशासन
जब भाजपा नेता मुरलीधर सिन्हा पंचायत चुनाव प्रचार के दौरान मुनगापदर पहुँचे, तो ग्रामीणों ने उनसे अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि “हर हफ्ते टाइम-लिमिट बैठक होती है, मगर इनमें बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा क्यों नहीं होती?” उनके इस सवाल के बाद जल जीवन मिशन की यह योजना सुर्खियों में आ गई।
विकास की टंकी में आखिर पानी कैसे आएगा?
पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता विप्लव धृतलहरे ने बताया कि 7 मार्च 2025 को ठेकेदार मेसर्स एम.एस. कंस्ट्रक्शन, रायपुर ने विद्युत कनेक्शन के लिए 8,580 रुपए जमा किए हैं। जैसे ही बिजली कनेक्शन मिलेगा, वैसे ही पंप इंस्टॉल कर पानी की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
जब तक खबर नहीं छपी, तब तक सब चुप क्यों थे?
गाँव के लोग वर्षों से पानी के लिए संघर्ष कर रहे थे, मगर प्रशासन को जैसे इसकी खबर ही नहीं थी। सवाल उठता है कि जब योजना पूरी हो चुकी थी, पाइपलाइन बिछ चुकी थी, टंकी खड़ी थी—तो पानी क्यों नहीं था?
जल जीवन मिशन के नाम पर “मिशन क्लियर”
गाँव में 138 घरेलू नल कनेक्शन मंजूर थे, मगर जल प्रदाय व्यवस्था अधूरी थी। प्रशासन अब कह रहा है कि “हम जल जीवन मिशन के प्रति संवेदनशील हैं”—लेकिन यह संवेदनशीलता तब क्यों नहीं दिखी, जब गाँव के लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे थे?
क्या प्रशासन को जगाने के लिए हर बार खबर और नेता की जरूरत पड़ेगी?
यह सवाल सिर्फ मुनगापदर का नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का है। जब तक जनता आवाज़ नहीं उठाती और कोई नेता दबाव नहीं बनाता, तब तक विकास योजनाएँ सिर्फ़ कागज़ों पर दौड़ती रहती हैं। Pairi Times 24×7 ने यह साबित कर दिया कि जब मीडिया अपनी भूमिका निभाता है और नेता दबाव बनाते हैं, तो सरकारी तंत्र को भी जागना पड़ता है। अब देखना यह है कि यह “संवेदनशीलता” कितने दिन तक कायम रहती है!