हिमांशु साँगाणी गरियाबंद
नपा में बैठने वाला नेता चाहिए, सिर्फ पोस्टर वाला नहीं!
गरियाबंद नगर पालिका चुनाव इस बार विकास के मुद्दे से आगे बढ़कर ‘जनता से मिलने वाले अध्यक्ष’ की तलाश पर आ गया है। मतदाताओं का सीधा सवाल है – “हमें ऐसा अध्यक्ष चाहिए, जिसे काम के लिए ढूंढना न पड़े, बल्कि वह खुद जनता के बीच मौजूद हो।”न की शहर से नदारद ?
भाजपा में दावेदारों की कतार, लेकिन जनता किसे अपनाएगी?
नगर पालिका अध्यक्ष पद का सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होना भाजपा के लिए नई चुनौती बन गया है। इस बार कई नाम सामने आ रहे हैं – रिखीराम यादव, जिनकी पिछली बार अध्यक्ष पद की दावेदारी मजबूत थी, इस बार संघ परिवार के समर्थन से आगे बढ़ सकते हैं।
भाजपा से अध्यक्ष पद के संभावित दावेदार

सुरेंद्र सोनटेके, जो मंडल अध्यक्ष होने के साथ-साथ नगर पालिका में उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं, उनकी संगठन में मजबूत पकड़ है। वहीं, आसिफ मेमन को जनता में लोकप्रिय माना जाता है, जबकि पारस देवांगन और आशीष शर्मा भी संगठन से जुड़े पुराने चेहरे हैं। इसके अलावा पूर्व नपा अध्यक्ष गफ्फू मेमन भी दावेदारी के चर्चे हो रहे है लेकिन उनके पुराने अधूरे वादे उनकी राह में कांटे का रोड़ा बन सकते हैं।
कांग्रेस से अध्यक्ष पद के संभावित दावेदार

कांग्रेस में चेहरे तो कई, लेकिन सबसे भरोसेमंद कौन?
कांग्रेस में सबसे चर्चित नाम आबिद ढेबर का है जो युवा नेता होने के अलावा पार्टी में अच्छी पकड़ भी रखते है दूसरा नाम रितिक सिन्हा का है, जो पूर्व में वार्ड पार्षद रह चुके हैं और जनता में अच्छी पकड़ रखते हैं। प्रेम सोनवानी, विधायक अमितेश शुक्ल के करीबी माने जाते हैं, और वर्तमान में शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी । जिससे उनकी दावेदारी मजबूत हो सकती है।
इसके अलावा, हरमेश चावड़ा, केशू सिन्हा, राजेश साहू, छगन यादव, मुकेश पांडेय ,संदीप सरकार, गेंदलाल सिन्हा,गोपाल सिन्हा भी इस दौड़ में शामिल हैं।
जनता का मूड – ‘फोटो वाला नहीं, फील्ड में दिखने वाला अध्यक्ष चाहिए’
अब असली सवाल यह है कि भाजपा अपने पिछले कार्यकाल की कमजोरियों को कैसे संभालेगी और कांग्रेस क्या जनता के भरोसे पर खरी उतरेगी? हालांकि इस बार भाजपा से अधिक कांग्रेस में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार है
जनता को इस बार कोई ‘चेंबर से नदारद अध्यक्ष’ नहीं चाहिए, बल्कि ऐसा नेता चाहिए जो गली-मोहल्ले में दिखे में दिखे जनता के बीच रहे उनकी सुनवाई करे और वादों को पूरा करे!
तो गरियाबंद की कुर्सी पर कौन बैठेगा – जनता का सच्चा सेवक या सिर्फ बड़े बड़े वादे करने वाला चुनावी पोस्टरों का चेहरा?