गरियाबंद पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी रिपोर्ट जारी की है! जानें कैसे 36 नक्सलियों ने छोड़ी बंदूक और 35 हुए ढेर। 74 अत्याधुनिक हथियारों की जब्ती के पीछे का रोमांचक सच और पूरी इनसाइड स्टोरी पढ़ें पैरी टाईम्स पर ।
गरियाबंद। गरियाबंद पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों के नक्सल विरोधी अभियानों का एक ऐसा काला चिट्ठा खोला है, जो इलाके में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी और नक्सलियों के ढहते किले की कहानी बयां करता है। पुलिस द्वारा जारी किए गए आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि अबूझमाड़ से लेकर गरियाबंद के घने जंगलों तक, अब लाल आतंक की जड़ें हिल चुकी हैं।
फाइल फोटो

खौफ के खात्मे की पूरी इनसाइड स्टोरी
दशकों से गरियाबंद के पहाड़ों और जंगलों में छिपे नक्सलियों के खिलाफ पुलिस ने जो चक्रव्यूह रचा था, उसका असर अब धरातल पर दिखने लगा है। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार:
- लाल गलियारे से लौटती जिंदगी: साल 2012 से लेकर अब तक (19 जनवरी 2026) कुल 36 सक्रिय नक्सलियों ने बंदूक का साथ छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया। यह आत्मसमर्पण नक्सलियों के टूटते मनोबल का सबसे बड़ा सबूत है।
- मुठभेड़ का खूनी अंजाम: जंगलों में हुई आमने-सामने की मुठभेड़ों में अब तक 35 दुर्दांत नक्सलियों को ढेर किया जा चुका है। सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति ने नक्सलियों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
- हथियारों का जखीरा: पुलिस ने केवल नक्सलियों को ही नहीं मारा, बल्कि उनके सबसे बड़े ‘हाथ-पैर’ यानी हथियारों पर भी चोट की है। अब तक कुल 74 हथियार जब्त किए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें केवल पुराने कट्टे नहीं, बल्कि कई अत्याधुनिक विदेशी हथियार भी शामिल हैं, जिन्हें देखकर सुरक्षा एजेंसियां भी हैरान हैं।

क्या अब गरियाबंद से पूरी तरह साफ होगा नक्सलवाद?
पुलिस द्वारा जारी ये आंकड़े केवल नंबर नहीं, बल्कि उन जवानों के शौर्य की कहानी है जिन्होंने अपनी जान हथेली पर रखकर इन दुर्गम इलाकों को सुरक्षित बनाया है। जिस तरह से नक्सलियों के पैर उखड़ रहे हैं और भारी मात्रा में आधुनिक हथियार मिल रहे हैं, उससे साफ़ है कि गरियाबंद अब पूरी तरह ‘शांति की ओर’ कदम बढ़ा चुका है।