एकलव्य विद्यालय का नया अध्याय गरियाबंद के छुरा एकलव्य विद्यालय के 15 छात्रों ने NEET और अन्य प्रवेश परीक्षाओं में सफलता हासिल की,कमार जनजाति के दो बच्चों की उपलब्धि बनी खास मिसाल पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद सरकारी स्कूलों की पढ़ाई को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं कहीं शिक्षक कम हैं, कहीं संसाधनों की कमी है और कहीं परीक्षा परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आते। लेकिन गरियाबंद जिले के छुरा का एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय इन तमाम धारणाओं को थोड़ा-सा परेशान करता नजर आ रहा है। यहां सरकारी स्कूल के बच्चे अब सिर्फ परीक्षा पास करने की कोशिश नहीं कर रहे, बल्कि NEET, JEE Mains, NIFT, CUET और दूसरी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में अपना नाम दर्ज करा रहे हैं।

एकलव्य विद्यालय का नया अध्याय NEET से लेकर कई बड़ी परीक्षाओं में हासिल कर रहे सफलता
वर्तमान में 6th से 12th के करीब 480 छात्र-छात्राओं वाले इस विद्यालय के विद्यार्थियों ने इस सत्र में अलग-अलग उच्च शिक्षा प्रवेश परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन किया है। उपलब्ध परिणामों को जोड़ें तो 49 सफलताएं सामने आती हैं। इनमें 15 विद्यार्थियों ने NEET UG, 15 ने NCET ITEP, 8 ने B.Sc Nursing, 4 ने B.Pharma, 3 ने JEE Mains और 2-2 विद्यार्थियों ने NIFT तथा CUET में सफलता हासिल की है। खास बात यह है कि कुछ विद्यार्थियों ने एक से ज्यादा परीक्षाएं भी पास की हैं।
15 बच्चों ने NEET पास किया जिसमें 11 बेटियां 4 बेटे और खास बात इसमें 2 कमार जनजाति के बच्चे भी शामिल।
अब जरा इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा सुनिए। NEET में सफल 15 विद्यार्थियों में 11 छात्राएं और 4 छात्र हैं। इनमें कमार जनजाति के एक छात्र और एक छात्रा भी शामिल हैं। यानी जिस समुदाय के बच्चों को लेकर कभी यह धारणा थी कि उनकी दुनिया जंगल और वन उपज तक सीमित है, उसी समुदाय के बच्चे अब मेडिकल प्रवेश परीक्षा की किताबों में अपने भविष्य की तलाश कर रहे हैं। कहने को तो यह सिर्फ एक परीक्षा का परिणाम है, लेकिन असल में यह सोच बदलने वाला परिणाम है।
नई तकनीक नई सोच और नया तरीका बच्चों को बना रहा पढ़ाई में माहिर
विद्यालय में पढ़ाई का तरीका भी अब पुराने सरकारी स्कूल वाले अंदाज से काफी आगे निकल चुका है। बच्चों के हाथ में टैबलेट और लैपटॉप हैं, कक्षाओं में डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल होता है और विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों से भी परिचित कराया जा रहा है। यानी यहां सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बच्चा किताब पढ़ रहा है या नहीं, सवाल यह है कि वह आने वाली दुनिया के लिए तैयार हो रहा है या नहीं।
विद्यालय में सत्र 2026-27 से Centre of Excellence भी शुरू किया गया है। इसमें पूरे छत्तीसगढ़ से 60 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। इनमें 30 विद्यार्थी मेडिकल और 30 विद्यार्थी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। मतलब साफ है अब लक्ष्य सिर्फ बोर्ड परीक्षा में अच्छे नंबर नहीं, बल्कि देश की बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में जगह बनाना है।
प्रिंसिपल कमलाकांत यादव का जुनून आदिवासी बच्चों का बना रहा भविष्य
इस बदलाव के पीछे विद्यालय के प्राचार्य कमलाकांत यादव और उनकी 35 शिक्षकों की टीम की मेहनत को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्राचार्य के अनुसार, करीब दो साल पहले जब उन्होंने विद्यालय की जिम्मेदारी संभाली थी, तब परीक्षा परिणाम लगभग 50 प्रतिशत था। लगातार अकादमिक सुधार और अनुशासन पर काम करने के बाद परिणाम लगभग शत-प्रतिशत तक पहुंचा।
NEET की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए तो गर्मी की छुट्टियां भी कुछ अलग रहीं। जहां छुट्टी का मतलब आमतौर पर घर जाना और किताबों को अलमारी में बंद कर देना होता है, वहां इन विद्यार्थियों ने विद्यालय में रहकर पढ़ाई की। शिक्षकों ने भी उनका साथ दिया और विशेष तैयारी कराई। नतीजा सामने है 15 विद्यार्थियों ने NEET में सफलता हासिल की।
7 सौ स्कूलों के बीच बाजी मारी और जीती 1 करोड़ की राशि
विद्यालय का सफर केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। जनवरी 2026 में दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित नेशनल मॉडल यूथ ग्राम सभा में करीब 700 स्कूलों के बीच छुरा के एकलव्य विद्यालय ने पहला स्थान हासिल किया। इस उपलब्धि के लिए विद्यालय को एक करोड़ रुपये की राशि मिलने की जानकारी है। बच्चों को सिर्फ किताबों में बंद रखने के बजाय उन्हें बड़े शहरों में पढ़ने वाले मेधावी विद्यार्थियों से भी मिलवाया जाता है। दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद और मुंबई जैसे शहरों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बुलाकर यहां के बच्चों से संवाद कराया जाता है। मकसद साफ है बच्चों को यह एहसास दिलाना कि बड़े सपने सिर्फ बड़े शहरों के बच्चों की संपत्ति नहीं हैं।
कमलाकांत यादव ने बदली सरकारी स्कूल के प्रति बनी अवधारणा
छुरा के एकलव्य विद्यालय की कहानी इसलिए खास है क्योंकि यहां सरकारी स्कूल बनाम प्राइवेट स्कूल की पुरानी बहस को बच्चे अपने परिणामों से जवाब दे रहे हैं। टैबलेट हो या डिजिटल क्लास, NEET हो या JEE, कमार जनजाति का विद्यार्थी हो या किसी दूसरे आदिवासी समुदाय का बच्चा संदेश एक ही है।
गोल्ड मेडलिस्ट वेद प्रकाश निषाद अब एकलव्य के बच्चों को सिखा रहे मूर्तिकला
छुरा के शिशु मंदिर से प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने वाले वेद प्रकाश निषाद ने खैरागढ़ से स्कल्पचर यानी पेंटिंग और मूर्तिकला के क्षेत्र में गोल्ड मेडल हासिल किया। शिक्षा पूरी करने के बाद वेद प्रकाश वापस अपने क्षेत्र में लौटे और अब छुरा के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों के बीच कला की प्रतिभा को निखारने में जुटे हैं। जो बच्चे पढ़ाई के क्षेत्र में NEET, JEE और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का परचम लहरा रहे हैं, उन्हें वेद प्रकाश स्कल्पचर और मूर्तिकला की बारीकियां भी सिखा रहे हैं। उनका प्रयास है कि आदिवासी क्षेत्र के बच्चों की प्रतिभा केवल किताबों और प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित न रहे, बल्कि कला और रचनात्मकता के क्षेत्र में भी उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिले। एक ओर विद्यालय के विद्यार्थी डॉक्टर और इंजीनियर बनने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वेद प्रकाश जैसे स्थानीय प्रतिभाशाली कलाकार उन्हें कला की दुनिया में भी अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार कर रहे हैं।
सरकारी स्कूल में पढ़कर बड़े सपने देखना अब कोई मजाक नहीं रहा। छुरा के बच्चे तो उन सपनों की प्रवेश परीक्षा भी पास करने लगे हैं।
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