तस्करों को नहीं लगी भनक, आसमान से ड्रोन कर रहा था निगरानी… फिर हुई ऐसी रेड कि मच गया हड़कंप ।

Sangani

By Sangani

तस्करों को नहीं लगी भनक CG-ओडिशा बॉर्डर पर लकड़ी तस्करी के खिलाफ USTR का हाईटेक ऑपरेशन,थर्मल ड्रोन ने संदिग्ध ठिकानों की पहचान की, डॉग स्क्वॉड के साथ रेड में बड़ी मात्रा में लकड़ी जब्त।

गरियाबंद छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर लकड़ी तस्करी के खिलाफ एक ऐसा हाईटेक ऑपरेशन चला, जिसकी भनक कथित तस्करों को भी नहीं लग सकी। आसमान में उड़ते थर्मल इमेजिंग ड्रोन ने पहले संदिग्ध ठिकानों और लकड़ी के संभावित भंडारण स्थलों की पहचान की, इसके बाद जमीन पर उतरी टीम ने डॉग स्क्वॉड और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर लक्षित छापेमारी शुरू कर दी। कार्रवाई में बड़ी मात्रा में संदिग्ध लकड़ी जब्त की गई है और अब पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।


उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) ने ओडिशा पुलिस और नबरंगपुर वन विभाग के सहयोग से 24 अगस्त को नबरंगपुर जिले के रायघर रेंज अंतर्गत दासपुर गांव में यह संयुक्त कार्रवाई की। कार्रवाई छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा क्षेत्र में अवैध सागौन और अन्य लकड़ी के परिवहन व भंडारण से संबंधित विशेष खुफिया सूचना के आधार पर की गई।

तस्करों को नहीं लगी भनक

तस्करों को नहीं लगी भनक पहले आसमान से ड्रोन की नजर, फिर जमीन पर बड़ी रेड

ऑपरेशन के दौरान USTR की टीम सुबह करीब 10 बजे क्षेत्र में पहुंची। ओडिशा वन विभाग द्वारा तलाशी वारंट से जुड़ी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद करीब 12:30 बजे कार्रवाई शुरू हुई।
लेकिन छापेमारी से पहले टीम ने सीधे संदिग्ध ठिकानों में प्रवेश नहीं किया। पहले थर्मल इमेजिंग ड्रोन को आसमान में भेजा गया। ड्रोन ने इलाके की हवाई निगरानी कर संदिग्ध लकड़ी भंडारण वाले स्थानों और उन परिसरों की पहचान की, जहां विस्तृत तलाशी की जरूरत थी। इस तकनीकी निगरानी के कारण टीम को सामान्य तरीके से बड़े इलाके में बेतरतीब तलाशी लेने के बजाय सीधे संदिग्ध स्थानों पर सटीक कार्रवाई करने में मदद मिली।

डॉग स्क्वॉड टीना भी उतरी मैदान में

हाईटेक ड्रोन निगरानी के साथ-साथ USTR ने अपनी प्रशिक्षित कैनाइन सदस्य ‘टीना’ को भी ऑपरेशन में शामिल किया। डॉग स्क्वॉड की मदद से छिपाकर रखी गई लकड़ी और कथित अपराध से जुड़े अन्य संभावित साक्ष्यों की तलाश की गई।
ड्रोन की नजर और डॉग स्क्वॉड की मदद से चलाए गए इस संयुक्त ऑपरेशन ने सीमा क्षेत्र में वन अपराध के खिलाफ आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

तीन संदिग्ध परिसरों की तलाशी, बड़ी मात्रा में लकड़ी जब्त

खुफिया सूचना और ड्रोन से मिले निगरानी इनपुट के आधार पर दासपुर गांव में तीन संदिग्ध परिसरों की तलाशी ली गई। पहले दो परिसरों की तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में ऐसी लकड़ी मिली, जिसके अवैध रूप से प्राप्त और भंडारित किए जाने की आशंका जताई गई है।
मामले में USTR ने POR क्रमांक 96/13, दिनांक 24 अगस्त 2026 दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब 3 से 4 घनमीटर लकड़ी जब्त की गई है, हालांकि इसकी अंतिम गणना और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।

सिर्फ जब्ती नहीं, अब पूरे नेटवर्क तक पहुंचेगी जांच

इस कार्रवाई के बाद जांच का दायरा केवल जब्त लकड़ी तक सीमित नहीं रखा गया है। USTR अब यह पता लगाने में जुटा है कि जब्त सागौन और अन्य लकड़ी आखिर कहां से आई, इसे किसने उपलब्ध कराया, किन लोगों ने परिवहन और भंडारण में भूमिका निभाई और क्या इसके पीछे कोई संगठित अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क सक्रिय है।
जांच में लकड़ी के वास्तविक भौगोलिक स्रोत, अवैध कटाई की संभावना, परिवहन और भंडारण से जुड़े लोगों, संभावित फाइनेंसरों और पहले जब्त किए गए वन अपराध के माल से किसी संभावित संबंध की भी पड़ताल की जाएगी।


मामले में रायघर रेंज से संबंधित पुराने जब्ती रिकॉर्ड और सागौन लकड़ी के स्रोत की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दस्तावेज के अनुसार प्रारंभिक स्तर पर यह सूचना सामने आई है कि एक संदिग्ध परिसर से मिली सागौन लकड़ी का स्रोत रायघर रेंज से जुड़ा हो सकता है। इसे लेकर नबरंगपुर के DFO को रायघर रेंज कार्यालय के रिकॉर्ड और पहले जब्त की गई लकड़ी का ऑडिट/रिकॉर्ड सत्यापन कराने के लिए सूचित किया गया है।
USTR और RCCF कोरापुट द्वारा पुराने मामलों में जब्त लकड़ी और जब्ती मेमो से जुड़े दस्तावेजों के लिए पहले भी पत्राचार किए जाने का उल्लेख है। दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी संभावित अनियमितता या संलिप्तता की पुष्टि केवल विस्तृत दस्तावेजी और कानूनी जांच के बाद ही की जा सकेग

रायघर रेंज के पुराने रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में

पहले भी सामने आया था इसी बॉर्डर बेल्ट में तस्करी का पैटर्न
दासपुर-सोनपुर-रायघर क्षेत्र पहले भी लकड़ी तस्करी की गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहा है। USTR के अनुसार दिसंबर 2023 में भी ओडिशा वन अधिकारियों के साथ संयुक्त कार्रवाई की गई थी। उस समय छत्तीसगढ़ क्षेत्र से कथित रूप से अवैध सागौन लकड़ी को ओडिशा ले जाने की सूचना पर कार्रवाई हुई थी।
दस्तावेज के अनुसार उस कार्रवाई में 30 से अधिक आरोपियों के पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी। एक ही सीमा क्षेत्र में बार-बार लकड़ी तस्करी से जुड़ी सूचनाएं सामने आने के बाद अब अंतरराज्यीय समन्वय और पूरी सप्लाई चेन की संयुक्त जांच की जरूरत और बढ़ गई है।

हाईटेक मॉडल से वन अपराध पर शिकंजा

USTR अब वन और वन्यजीव अपराध के खिलाफ पारंपरिक कार्रवाई के साथ आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहा है। इस ऑपरेशन में मानवीय खुफिया सूचना, अंतरराज्यीय समन्वय, थर्मल ड्रोन निगरानी, डॉग स्क्वॉड, लक्षित तलाशी और कानूनी जांच को एक साथ इस्तेमाल किया गया।
अधिकारियों का फोकस केवल अवैध लकड़ी जब्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध कटाई से लेकर परिवहन, भंडारण, आपूर्ति और अंतिम उपयोग तक की पूरी कड़ी को चिन्हित करने पर है। सीमा क्षेत्र में सक्रिय संभावित संगठित नेटवर्क तक पहुंचने के लिए पड़ोसी राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय को और मजबूत करने की बात भी कही गई है।

यह भी पढ़ें…USTR प्रवासी पक्षी आर्कटिक से उदंती-सीतानदी तक… हजारों किलोमीटर उड़कर पहुंचा खास पंखों वाला मेहमान ।

कृपया शेयर करें

लगातार सही खबर सबसे पहले जानने के लिए हमारे वाट्सअप ग्रुप से जुड़े

Join Now

Join Telegram

Join Now

error: Content is protected !!