हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर प्रवासी पक्षी पैसिफिक गोल्डन प्लोवर पहुंचा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व। गरियाबंद में दुर्लभ पक्षी का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड दर्ज।
गरियाबंद, 27 अगस्त 2026 छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) में एक ऐसे खास मेहमान की मौजूदगी दर्ज हुई है, जिसने हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर यहां पहुंचकर वन्यजीव प्रेमियों और अधिकारियों का ध्यान खींचा है। दक्षिण उदंती परिक्षेत्र में पैसिफिक गोल्डन प्लोवर (Pluvialis fulva) नामक दुर्लभ और लंबी दूरी तक प्रवास करने वाले पक्षी का महत्वपूर्ण फोटो रिकॉर्ड सामने आया है।
इस पक्षी की तस्वीर 26 अगस्त 2026 को वन विभाग की नियमित पेट्रोलिंग के दौरान दर्ज की गई। खास बात यह रही कि इस महत्वपूर्ण वन्यजीव रिकॉर्ड को दक्षिण उदंती परिक्षेत्र में तैनात पेट्रोलिंग श्रमिक दीपक निर्मलकर ने दर्ज किया।

आर्कटिक से हजारों किलोमीटर की यात्रा, फिर उदंती-सीतानदी में पड़ाव
पैसिफिक गोल्डन प्लोवर आकार में भले ही छोटा हो, लेकिन इसकी यात्रा किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं है। यह पक्षी मुख्य रूप से उत्तरी एशिया और अलास्का के आर्कटिक एवं उप-आर्कटिक क्षेत्रों में प्रजनन करता है। मौसम बदलते ही यह गर्म इलाकों की ओर लंबी उड़ान भरता है।
प्रवास के दौरान यह पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय करता है। कुछ पक्षियों की यात्रा 13 हजार किलोमीटर से भी अधिक मानी जाती है। इतनी लंबी उड़ान के बीच नदी किनारे, आर्द्रभूमियां, उथले जल क्षेत्र और घासभूमियां इनके लिए बेहद जरूरी पड़ाव बन जाते हैं।
अब इस प्रवासी पक्षी का उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखना इस बात का संकेत है कि यहां का प्राकृतिक वातावरण सिर्फ स्थानीय वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
सिर्फ बाघों का घर नहीं, प्रवासी पक्षियों का भी सुरक्षित पड़ाव
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां बाघ, तेंदुआ, हाथी, गौर, जंगली कुत्ते, हॉर्नबिल और गिद्ध समेत कई महत्वपूर्ण वन्यजीव पाए जाते हैं। लेकिन पैसिफिक गोल्डन प्लोवर की मौजूदगी ने USTR की जैव विविधता में एक नया और रोमांचक अध्याय जोड़ दिया है।
रिजर्व के घने जंगलों के साथ-साथ यहां की घासभूमियां, मौसमी जलस्रोत, नदियां, जलाशय और उथले जल क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक “रिफ्यूलिंग स्टेशन” की तरह काम कर सकते हैं। लंबी यात्रा के दौरान पक्षी ऐसे स्थानों पर भोजन करते हैं, आराम करते हैं और अगली उड़ान के लिए ऊर्जा जुटाते हैं।
क्या खाता है पैसिफिक गोल्डन प्लोवर?
पैसिफिक गोल्डन प्लोवर का भोजन मुख्य रूप से कीटों और छोटे अकशेरुकी जीवों पर आधारित होता है। यही कारण है कि खुले मैदान, नदी तट, कीचड़ वाले क्षेत्र, आर्द्रभूमियां और उथले जल वाले इलाके इसके लिए उपयुक्त आवास माने जाते हैं।
भारत में इसे आमतौर पर शीतकालीन प्रवासी पक्षी के रूप में देखा जाता है। ऐसे में अगस्त के अंत में उदंती-सीतानदी क्षेत्र में इसका रिकॉर्ड होना पक्षी विशेषज्ञों और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पेट्रोलिंग श्रमिक बना जैव विविधता का प्रहरी
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि महत्वपूर्ण पक्षी रिकॉर्ड किसी बड़े सर्वेक्षण अभियान के दौरान नहीं, बल्कि वन विभाग की नियमित पेट्रोलिंग के दौरान सामने आया। दक्षिण उदंती परिक्षेत्र में पेट्रोलिंग कर रहे श्रमिक दीपक निर्मलकर की सतर्कता और फोटोग्राफिक रिकॉर्डिंग ने इस प्रजाति की उपस्थिति को दर्ज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ऐसे रिकॉर्ड भविष्य में यह समझने में मदद करेंगे कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कौन-कौन से प्रवासी पक्षी आते हैं, वे कितने समय तक रुकते हैं और किन प्राकृतिक आवासों का उपयोग करते हैं।
एक पक्षी, लेकिन दुनिया को जोड़ने वाला संदेश
हजारों किलोमीटर दूर आर्कटिक क्षेत्र से उड़कर भारत पहुंचने वाले एक छोटे से पक्षी का गरियाबंद के जंगलों में रुकना प्रकृति के वैश्विक जुड़ाव की खूबसूरत तस्वीर पेश करता है। एक प्रवासी पक्षी की यात्रा कई देशों, नदियों, आर्द्रभूमियों और जंगलों को जोड़ती है।
पैसिफिक गोल्डन प्लोवर का उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में आगमन सिर्फ एक पक्षी का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि USTR की समृद्ध और जीवंत जैव विविधता का प्रमाण है।
उदंती-सीतानदी अब सिर्फ वहां नहीं जाना जाता जहां जंगलों में बाघ दहाड़ते हैं, बल्कि यह उन जगहों में भी शामिल हो रहा है जहां हजारों किलोमीटर दूर से उड़कर आने वाले प्रवासी पक्षी अपनी थकी उड़ान को कुछ पल का ठिकाना देते हैं।
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