बारिश में रेत घाट बंद लेकिन गरियाबंद के नागझर रेत घाट को लेकर व्हाट्सएप पर रेत सप्लाई के रेट वायरल। बारिश में खनन प्रतिबंध के बावजूद 10 चक्का 7 हजार और 12 चक्का 8 हजार रुपए का रेट जारी होने से प्रशासन पर सवाल।
गरियाबंद बारिश के मौसम में जहां शासन के नियमों के तहत रेत खनन और रेत घाटों के संचालन पर पाबंदी रहती है और प्रदेश के अधिकांश रेत घाट बंद हैं, वहीं गरियाबंद जिले का नागझर रेत घाट कथित तौर पर एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वजह है व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल हो रहे संदेश, जिसमें बाकायदा रेत की सप्लाई और उसके रेट की जानकारी दी जा रही है।वायरल मैसेज के अनुसार नागझर से करीब 5 किलोमीटर दूरी तक रेत पहुंचाने के लिए 10 चक्का वाहन का रेट 7 हजार रुपए और 12 चक्का वाहन का रेट 8 हजार रुपए बताया गया है। मैसेज में संपर्क नंबर भी जारी किया गया है।

बारिश में रेत घाट बंद मगर व्हाट्सएप पर पहले 7 हजार , फिर 8 हजार और फिर आया पूरा रेट कार्ड
मामला यहीं नहीं रुकता। व्हाट्सएप चैट में पहले 7000 रुपए का रेट बताया गया। इसके बाद कहा गया कि रॉयल्टी नहीं है और सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक रेत उपलब्ध कराई जाएगी। फिर 12 चक्का वाहन के लिए 8000 रुपए का रेट बताया गया।इसके कुछ समय बाद व्हाट्सएप ग्रुप में एक व्यवस्थित संदेश सामने आया, जिसमें लिखा गया कि
स्थान नागझर फिंगेश्वर से लगभग 5 किलोमीटर दूर है जहां
10 चक्का का रेट 7 हजार
12 चक्का का 8 हजार
संपर्क नंबर भी जारी
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब बारिश के दौरान रेत खनन और घाटों के संचालन पर प्रतिबंध है, तब आखिर यह रेट लिस्ट किस चीज की है और रेत की सप्लाई कहां से हो रही है?

राज्य भर में घाट बंद, फिर नागझर में किसकी अनुमति से चल रहा कारोबार?
बारिश के मौसम में नदी-नालों से रेत उत्खनन पर्यावरण और सुरक्षा के लिहाज से प्रतिबंधित रहता है। ऐसे समय में प्रदेश के अधिकांश रेत घाट बंद बताए जाते हैं। लेकिन नागझर क्षेत्र को लेकर वायरल हो रहे व्हाट्सएप संदेश प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में रेत का परिवहन और बिक्री हो रही है, तो इसकी जांच होनी चाहिए कि रेत कहां से लाई जा रही है, क्या उसके लिए वैध अनुमति है और व्हाट्सएप ग्रुप में खुलेआम रेट जारी करने वालों पर प्रशासन की नजर क्यों नहीं पड़ी?
प्रशासन को खबर नहीं या फिर सब कुछ ऑल इज वेल ?
सबसे बड़ा सवाल गरियाबंद जिला प्रशासन और खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है। व्हाट्सएप ग्रुप में कथित तौर पर खुलेआम रेट जारी किए जा रहे हैं, वाहन के हिसाब से कीमत तय हो रही है और सप्लाई का समय भी बताया जा रहा है।लेकिन जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी है या नहीं, यह साफ नहीं है। शायद अब अवैध कारोबार को पकड़ने के लिए जंगल, नदी और सड़क पर दौड़ने की जरूरत नहीं रही बस व्हाट्सएप ग्रुप खोलना है! क्योंकि यहां तो कथित तौर पर कारोबार का पूरा “मेन्यू कार्ड” ही उपलब्ध है।
व्हाट्सअप ग्रुप और चैट की जांच जरूरी
हालांकि वायरल संदेशों और व्हाट्सएप चैट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया जाना बाकी है। इसलिए प्रशासन को पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि नागझर क्षेत्र से रेत का वैध परिवहन हो रहा है या प्रतिबंध के बावजूद किसी तरह का अवैध रेत कारोबार संचालित किया जा रहा है।यदि वायरल मैसेज और रेट सूची सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के साथ-साथ निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
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