गरियाबंद के अमर मसीहा डॉ. रज्जाक मेमन को 8वीं पुण्यतिथि पर नमन, ऐसे व्यक्ति जिसने कभी पेशे को नहीं बनने दिया व्यावसायिक,ताउम्र 10-20 रुपये में किया हर दर्द का इलाज ।

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By Sangani

गरियाबंद के अमर मसीहा डॉ. रज्जाक मेमन की 8वीं पुण्यतिथि पर तिरंगा चौक में श्रद्धांजलि सभा हुई। गरीब मरीजों की सेवा और उनकी सादगी को याद कर नगरवासी भावुक हुए।

गरियाबंद कुछ लोग इस दुनिया से चले जाते हैं, लेकिन उनकी इंसानियत और सेवा की कहानियां लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहती हैं। गरियाबंद के दिवंगत डॉ. रज्जाक मेमन भी ऐसी ही शख्सियत थे, जिनकी 8वीं पुण्यतिथि पर नगरवासियों की आंखें नम हो गईं। तिरंगा चौक पर जब उनके चाहने वालों ने कैंडल जलाकर और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी, तो माहौल महज एक श्रद्धांजलि सभा का नहीं, बल्कि एक ऐसे डॉक्टर की यादों का बन गया, जिसने अपनी जिंदगी जरूरतमंदों की सेवा में समर्पित कर दी थी।

गरियाबंद के अमर मसीहा डॉ. रज्जाक मेमन

गरियाबंद के अमर मसीहा डॉ. रज्जाक मेमन जो आज भी लोगों के दिलों में बसे है

डॉ. रज्जाक मेमन को याद करते हुए उनके सहपाठी, शुभचिंतक और नगरवासी भावुक नजर आए। किसी को उनका सरल स्वभाव याद आया, तो किसी के जेहन में गरीब मरीजों के प्रति उनकी संवेदनशीलता ताजा हो गई। श्रद्धांजलि सभा में मौजूद लोगों के लिए यह सिर्फ एक पुण्यतिथि नहीं थी, बल्कि उस इंसान को याद करने का अवसर था, जिसकी मौजूदगी कभी गरियाबंद के लोगों के लिए भरोसे का दूसरा नाम हुआ करती थी।

जब इलाज से पहले इंसानियत को मिलती थी प्राथमिकता

डॉ. रज्जाक मेमन की पहचान एक ऐसे चिकित्सक के रूप में बताई जाती है, जिन्होंने चिकित्सा सेवा को कमाई का जरिया बनाने के बजाय जरूरतमंदों की मदद को महत्व दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, वे गरीब और असहाय मरीजों से महज 10 से 20 रुपये तक फीस लेते थे। इस छोटी-सी रकम के पीछे भी एक संवेदनशील सोच थी—मरीज को मदद पाने के साथ अपना आत्मसम्मान बनाए रखने का एहसास हो।

गरियाबंद जिला बनने से पहले के दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौतियां थीं। ऐसे समय में डॉ. मेमन की चिकित्सा सेवाओं को स्थानीय लोग आज भी याद करते हैं। उनके इलाज, व्यवहार और सादगी से जुड़ी यादें उनके शुभचिंतकों के बीच उनकी विरासत का हिस्सा बनी हुई हैं।

गरियाबंद ने ऐसी अंतिम यात्रा पहले कभी नहीं देखा था…

डॉ. रज्जाक मेमन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके अंतिम सफर में पूरा गरियाबंद शहर उमड़ पड़ा था। जनाजे के दौरान कई किलोमीटर तक लोगों की लंबी कतारें नजर आईं, मानो पूरा शहर अपने चहेते डॉक्टर को आखिरी विदाई देने सड़कों पर उतर आया हो। गरियाबंद के इतिहास में यह दृश्य लोगों की यादों में आज भी बसा है, जब हर आंख नम थी और हर चेहरे पर डॉक्टर मेमन के जाने का गम साफ दिखाई दे रहा था। उन्हें आखिरी बार देखने और विदाई देने पहुंचे लोगों की भीड़ उनकी लोकप्रियता और लोगों से उनके गहरे जुड़ाव की कहानी बयां कर रही थी।

तिरंगा चौक पर कैंडल की रोशनी में लौट आईं पुरानी यादें

8वीं पुण्यतिथि पर तिरंगा चौक में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान नगरवासियों ने कैंडल जलाकर और पुष्प अर्पित कर डॉ. मेमन को नमन किया। उनके साथ जुड़े लोगों ने पुरानी यादें साझा कीं। इस दौरान कई लोग भावुक हो गए और दिवंगत डॉक्टर की सेवा भावना को याद किया।

श्रद्धांजलि देने वालों में साबिर वकील, रामकुमार वर्मा, राजेश साहू, पार्षद छगन यादव, पार्षद पुनाराम यादव, सन्नी मेमन, योगेश बघेल, हरीश ठक्कर ,जलाराम ठक्कर,अवधराम यादव, बीरेन्द्र सेन, चंद्रभूषण चौहान, अमनदास मानिकपुरी, मुकेश भोई, घनश्याम यादव, चंदन सिन्हा, सौरभ यादव, कादर हिंगोरा, मुकेश यादव, जुनेद खान, युगल सोनी, बाजीराम सेन और डालसिंग साहू सहित अन्य शुभचिंतक मौजूद रहे।

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